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झारखंड : RIMS में रसीद काटनेवाली कंपनी ने किया 99.42 लाख का गबन

Updated at : 30 Dec 2017 8:03 AM (IST)
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झारखंड : RIMS में रसीद काटनेवाली कंपनी ने किया 99.42 लाख का गबन

अजय दयाल रांची : रिम्स में मरीजों की पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच के लिए रसीद काटनेवाली कंपनी इंफोटेक लिंक प्राइवेट लिमिटेड पर चार वित्तीय वर्ष में 99.42 लाख रुपये का गबन करने का आराेप है. रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने मामले को लेकर बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. सदर डीएसपी […]

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अजय दयाल
रांची : रिम्स में मरीजों की पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच के लिए रसीद काटनेवाली कंपनी इंफोटेक लिंक प्राइवेट लिमिटेड पर चार वित्तीय वर्ष में 99.42 लाख रुपये का गबन करने का आराेप है.
रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने मामले को लेकर बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. सदर डीएसपी विकास चंद्र श्रीवास्तव ने मामले की जांच कर रिम्स प्रबंधन के कई लोगों का बयान भी दर्ज किया है.
रिम्स निदेशक डाॅ आरके श्रीवास्तव, एकाउंट ऑफिसर जारीका, एकाउंटेंट, कैशियर से भी जानकारी ली है. पुलिस ने कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए शुक्रवार को नोटिस भेजा. बताया जाता है कि मरीज की जांच नहीं होने की परिस्थिति में पैसे रिफंड करने के नाम पर कंपनी ने गड़बड़ी की है.
पैसे लौटाने के लिए लिखा पत्र : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित इंफोटेक लिंक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 2005 में रसीद काटने का जिम्मा दिया गया था. इसका निर्णय रिम्स की शासी परिषद की बैठक में लिया गया था. बताया जाता है कि काम मिलने के कुछ साल बाद से ही कंपनी ने गड़बड़ी शुरू कर दी थी, पर इसकी जानकारी किसी को नहींमिल पायी थी.
2016 में रिम्स प्रबंधन को इसकी जानकारी मिली. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने इंफोटेक लिंक प्राइवेट लिमिटेड से काम वापस ले लिया. रिम्स प्रबंधन ने महालेखाकार ऑफिस में मामले को ऑडिट करने को लिए पत्र लिखा. ऑडिट में वित्तीय वर्ष 2012-13 में 44़ 58 लाख, 2013-14 में 21.68 लाख, 2014-15 में 16.18 लाख और वर्ष 2015-16 में 16.98 लाख (कुल 99़ 42 लाख रुपये) के गबन किये जाने का मामला सामने आया. इसकी जानकारी होने के बाद रिम्स प्रबंधन ने राशि लौटाने के लिए कंपनी को तीन बार पत्र भी लिखा, पर कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी.
रिम्स के प्रभारी निदेशक ने दर्ज करायी प्राथमिकी
मामले का खुलासा होने के बाद मैंने पहले जांच करायी. इसके बाद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. एजी की ऑडिट देख कर यह आशंका है कि कंपनी ने 99़ 42 लाख रुपये का गबन किया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है़
– डॉ आरके श्रीवास्तव, प्रभारी रिम्स निदेशक
पुलिस ने अपनी तरफ से रिम्स के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ कर ली है़ कंपनी काे भी नोटिस भेजा गया है. कंपनी द्वारा अपना पक्ष रखने के बाद कार्रवाई होगी. आवश्यकता पड़ी तो पुलिस जमशेदपुर भी जायेगी़
– विकास चंद्र श्रीवास्तव, डीएसपी, सदर
कैसे की गड़बड़ी
इंफोटेक लिंक प्राइवेट लिमिटेड मरीजों की पैथाेलाॅजी व रेडियोलॉजी (एक्सरे, अल्ट्रा साेनोग्राफी, एमआरआइ) जांच की रसीद काटती थी. कंपनी मरीज से पैसे लेकर उसे रसीद की दो प्रति देती थी. मरीज रसीद की एक प्रति उस विभाग में जमा करता, जहां जांच करानी होती और दूसरी अपने पास रखता था.
कंपनी इस रसीद की एक और प्रति निकालती थी. इसे अपने पास रिकॉर्ड के लिए रखती थी. कई मामलों में मशीन खराब होने या कोई अन्य कारणों से मरीज की जांच नहीं होने पर पैसे वापस हो जाते थे. इस स्थिति में कंपनी पैसा वापस लेनेवाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ा कर दिखा देती थी. बैलेंस सीट चेक करने पर मामले का खुलासा हुआ. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने महालेखाकार कार्यालय (एजी ऑफिस) से आॅडिट का अनुरोध किया.
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