लीड) पांडेय गिरोह के वर्चस्व को मिली चुनौती

Published at :29 Oct 2015 7:55 PM (IST)
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लीड) पांडेय गिरोह के वर्चस्व को मिली चुनौती

लीड) पांडेय गिरोह के वर्चस्व को मिली चुनौती अपने घर में ही झेलनी पड़ रही थी विभूति शर्मा की धाक.-विभूति को रास्ते से हटाया तो सुशील आ गया सामने-चंद दिन ही कायम रही विभूति की हत्या के बाद पांडेय की बादशाहत-अपने ही गुट के सुशील ने दे दी बादशाहत को चुनौतीपतरातू. कोयलांचल सहित पतरातू के […]

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लीड) पांडेय गिरोह के वर्चस्व को मिली चुनौती अपने घर में ही झेलनी पड़ रही थी विभूति शर्मा की धाक.-विभूति को रास्ते से हटाया तो सुशील आ गया सामने-चंद दिन ही कायम रही विभूति की हत्या के बाद पांडेय की बादशाहत-अपने ही गुट के सुशील ने दे दी बादशाहत को चुनौतीपतरातू. कोयलांचल सहित पतरातू के औद्यागिक क्षेत्रों में वर्चस्व को लेकर पांडेय गिरोह हमेशा संघर्षरत रहा है. आपराधिक दुनिया में सतह पर पैर रखते ही उसका पहला सामना अपने घर पतरातू में ही दबंग विभूति शर्मा से हुआ. उस वक्त पतरातू में विभूति शर्मा की तूती बोलती थी. विभूति रेलवे में टीसी था. रेलवे के ठेका-पट्टों सहित आसपास में उसका ही सिक्का चलता था. खास कर रेलवे का कोई भी ठेका-पट्टा विभूति की मुहर के बगैर नहीं उठता था. भोला पांडेय रेलवे के ठेका-पट्टों में अपनी हुकूमत चाहता था. इसके लिए उसने कई प्रयास भी किये. लेकिन हर बार नाकामयाबी हाथ लगी. उस वक्त कोयलांचल सहित पतरातू औद्योगिक क्षेत्र में विभूति शर्मा के जाति के लोगों का ही दबदबा था. बगल के पीटीपीएस में काली शर्मा व बासल मेंं दूभा तिवारी का दहशत था. बरकाकाना व कोयलांचल क्षेत्र में भी इसी जाति के लोगों का सिक्का चल रहा था. जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद के लिए आ धमकते थे. उस वक्त विभूति की तरफ आंख उठाने की भी कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता था. ऐसे में भोला पांडेय ने अपना प्रभाव कायम करने के लिए रंगदारी के धंधे में विभूति से समझौता का प्रयास किया. लेकिन शर्मा ने अपने जाति के दबदबे के अहम में पांडेय के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया. गृह क्षेत्र में अपनी पैठ नहीं बना पाने का मलाल पांडेय को हमेशा रहा. उसने अपनी सोच को बदलते हुए पतरातू क्षेत्र के बजाय इसके आसपास खलारी व रांची के कुछ हिस्सों पर अपना फोकस कर दिया. चंद दिनों में ही उसने इन क्षेत्रों में अपनी दिलेरी से रंगदारी का सिक्का जमा लिया. लेकिन गृह क्षेत्र के रंगदारी में शर्मा की धाक उसे कांटे की तरह हमेशा चुभती रही. तब उसने विभूति की हत्या 1995 में नेपलिया नाम के सिरफिरे से करा दी. हमेशा पास में रिवाल्वर रखने वाला विभूति ट्रेकर से चलता था. पतरातू रेलवे क्रॉसिंग से स्टीम कॉलोनी जाने के क्रम में झाड़ियों में घात लगाये बैठे नेपलिया ने फायरिंग कर विभूति का खात्मा कर दिया. विभूति को रास्ते से हटाने के बाद खास कर रेलवे पर पांडेय की बादशाहत कायम हो गयी. इसके बाद पांडेय ने बारी-बारी काली शर्मा और फिर दुभा तिवारी को धमकी देकर क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर इन क्षेत्रों में भी कब्जा कर लिया. धीरे-धीरे पतरातू व पूरे कोयलांचल में पांडेय गिरोह की तूती बोलने लगी. लेकिन इस बादशाहत को चंद दिनों के बाद ही उसके अपने ही शागिर्द सुशील श्रीवास्तव से चुनौती मिलने लगी.

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