बाटम) वर्चस्व की लड़ाई तब्दील हुई निजी रंजिश में

Published at :26 Oct 2015 8:21 PM (IST)
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बाटम) वर्चस्व की लड़ाई तब्दील हुई निजी रंजिश में

बाटम) वर्चस्व की लड़ाई तब्दील हुई निजी रंजिश में 26बीएचयू-11-खड़े यात्री वाहन, परेशान यात्री.26बीएचयू-13-जिंदल कैंप में सर्च ऑपरेशन में जुटे डीएसपी व अन्य.26बीएचयू-14-कैंप में जुटी भीड़ व पुलिसकर्मी.भुरकुंडा. किसी वक्त आपराधिक गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में खून-खराबा का होना आम माना जाता था. क्षेत्र के पांडेय गुट व श्रीवास्तव गुट भी इलाके में […]

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बाटम) वर्चस्व की लड़ाई तब्दील हुई निजी रंजिश में 26बीएचयू-11-खड़े यात्री वाहन, परेशान यात्री.26बीएचयू-13-जिंदल कैंप में सर्च ऑपरेशन में जुटे डीएसपी व अन्य.26बीएचयू-14-कैंप में जुटी भीड़ व पुलिसकर्मी.भुरकुंडा. किसी वक्त आपराधिक गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में खून-खराबा का होना आम माना जाता था. क्षेत्र के पांडेय गुट व श्रीवास्तव गुट भी इलाके में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए एक-दूसरे को टारगेट बनाया करते थे. लेकिन गुजरते वक्त के साथ ऐसा प्रतीत होता है कि अब लड़ाई वर्चस्व की नहीं रही. बल्कि इसका रंग-रूप बदल कर अब निजी रंजिश में तब्दील हो गयी है. विगत समय में हुए खून-खराबा के मामलों को देख कर तो यही प्रतीत हो रहा है. क्षेत्र के लोग भी अब लड़ाई को वर्चस्व की नहीं मान कर निजी रंजिश की लड़ाई मानने लगे हैं. चार फरवरी 2010 को रांची कोर्ट लाये जाने के दौरान दुमका में चर्चित भोला पांडेय की हत्या कर दी गयी थी. इस हत्याकांड में सुशील श्रीवास्तव गिरोह का नाम सामने आया था. भोला पांडेय की हत्या के बाद भतीजा किशोर पांडेय ने अपने चाचा की हत्या का बदला लेने का पक्का इरादा कर लिया. इस बीच 2010 में ही पांडेय गिरोह ने सुशील श्रीवास्तव की पत्नी मीनू श्रीवास्तव को निशाना बनाने की कोशिश की. रांची के अरगोड़ा क्षेत्र में उस पर हमला किया. लेकिन वह बाल-बाल बच गयी. दोनों गुटों द्वारा एक-दूसरे के परिजनों को निशाना बनाने का सिलसिला आगे बढ़ता गया. 15 अक्तूबर 2014 को जमशेदपुर के कदमा बाजार में किशोर पांडेय की गोली मार कर हत्या कर दी गयी. इसमें श्रीवास्तव गिरोह का नाम सामने आया था.किशोर की हत्या के बाद बदला लेने का हुआ था एलान : किशोर की हत्या के बाद उसके गुट के कई प्रमुख लोगों ने इस हत्या का बदला लेने का खुला एलान किया था. किशोर गुट ने अपने एलान को अमलीजामा भी पहनाया. दो जून 2015 को हजारीबाग कोर्ट परिसर में सुशील श्रीवास्तव को एके-47 से भून डाला गया. इस हत्याकांड की जिम्मेवारी पांडेय गुट के विकास तिवारी ने ली थी. घटना के कुछ महीने बाद विकास को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सुशील की हत्या के वक्त इस गुट के कई शूटरों ने हत्या का बदला लेने की घोषणा की थी. 26 अक्तूबर 2015 को श्रीवास्तव गुट के शूटरों ने किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय को पतरातू में दिनदहाड़े गोली मार दी. इसके अलावा दोनों गुट के अपराधी कई बार एक-दूसरे के करीबी सदस्यों पर भी हमला बोलते रहे हैं. अब चर्चा होने लगी है कि अगला टारगेट कौन हो सकता है.दोनों गुटों से अब तक मारे गये लोग : पांडेय व श्रीवास्तव गुट से अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं. पांडेय गुट के मारे गये लोगों में भोला पांडेय (2010 में), भोला पांडेय का भतीजा किशोर पांडेय (2014 में), किशोर का बॉडीगार्ड बबलू सिंह (2014 में), किशोर के पिता कामेश्वर पांडेय (2015 में). जबकि श्रीवास्तव गुट के सुशील श्रीवास्तव (2015 में), सुशील का करीबी ग्यासुद्दीन उर्फ ग्यास खान (2015 में), सकरुल्ला (2007 में), रवींद्र सिंह (2008 में) में मारे जा चुके हैं.गूंजती रही गोलियों की आवाज : पतरातू में किशोर के पिता कामेश्वर पांडेय को गोली मारकर तीन अपराधी ब्लॉक मुख्यालय के पीछे के रास्ते से रसदा गांव की ओर भाग निकले. पीछे से कई लोग इन्हें पकड़ने के लिए दौड़ पड़े. इस बीच एक अपराधी की गोली से मौत हो गयी. एक को पुलिस ने पकड़ लिया. जबकि एक अपराधी रसदा गांव के समीप जिंदल कैंप के झाड़ियों में छिप गया. इसे ढूंढने के दौरान दर्जनों राउंड गोलियां चलती रही. लोगों की भारी भीड़ जुटी हुई थी. डीएसपी वीरेंद्र चौधरी सहित विभिन्न थानों की पुलिस जमी हुई थी. लेकिन छिपे अपराधी का कोई अता-पता नहीं चल सका.बंद रहे वाहन : पतरातू में किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय को गोली मारे जाने की घटना के बाद इसका असर भुरकुंडा क्षेत्र में भी दिखा. कई बार अफवाहों का बाजार भी गरम हुआ. भुरकुंडा से पतरातू तक जाने वाले यात्री समेत अन्य वाहन भुरकुंडा में ही ठहर गये. स्थिति ऐसी थी कि कोई मोटरसाइकिल सवार भी पतरातू क्षेत्र जाने को तैयार नहीं था. रांची तक चलने वाली बसें भुरकुंडा में ही खड़ी हो गयी. पतरातू क्षेत्र जाने वाले यात्री काफी परेशान थे.सौंदा कांड का नहीं हुआ उदभेदन : भुरकुंडा थाना क्षेत्र के सौंदा में 21 अक्तूबर को राजेश राम के सहयोगी ब्रजेश सिंह को गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. हत्याकांड में श्रीवास्तव गुट का नाम सामने आया. पांच दिनों के भीतर पतरातू में किशोर के पिता की हत्या सुशील के गुर्गों ने कर दी. इस छोटे से अंतराल में हुए दो-दो हत्याओं ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है. ब्रजेश की हत्या व उसमें श्रीवास्तव गुट का नाम का सामने आना. इसके बावजूद ब्रजेश हत्याकांड में किसी तरह की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.

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