जागरूक होकर ही बचा जा सकता है एड्स से

Updated at : 03 Dec 2019 1:12 AM (IST)
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जागरूक होकर ही बचा जा सकता है एड्स से

लोहरदगा : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एड्स पर सेमिनार का आयोजन महिला कॉलेज लोहरदगा में किया. मौके पर आइएमए चेयरमैन डॉ गणेश प्रसाद ने कहा कि 21वीं सदी में स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में एड्स शीर्ष पर है. पश्चिमी देशों से आयी इस बीमारी की चपेट में भारत सहित दुनिया के तमाम देश आज […]

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लोहरदगा : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एड्स पर सेमिनार का आयोजन महिला कॉलेज लोहरदगा में किया. मौके पर आइएमए चेयरमैन डॉ गणेश प्रसाद ने कहा कि 21वीं सदी में स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में एड्स शीर्ष पर है. पश्चिमी देशों से आयी इस बीमारी की चपेट में भारत सहित दुनिया के तमाम देश आज चुके हैं.

भारत को पूरी तरह एड्स मुक्त होने में बहुत वक्त लगेगा. इस देश में 15 से 49 वर्ष की आयु के बीच के करीब 30 लाख लोग एचआइवी पीड़ित हैं. पूरा विश्व इस महामारी को मिटाने की दिशा में प्रयत्नशील है. भारत की 99 प्रतिशत आबादी अभी एड्स मुक्त है. लोगों को जागरूक होने की जरूरत है.

असुरक्षित यौन संबंध और एचआइवी पॉजिटिव रक्त से संक्रमण से बचकर ही एड्स को दूर रखा जा सकता है. भारत में एचआइवी का पहला मामला 1986 में आया. सरकार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम चलाकर लोगों को जागरूक कर रही है. एड्स पीड़ित से भेदभाव या नफरत नहीं किया जाना चाहिए. हर जिले में एचआइवी ग्रसित लोगों के लिए परामर्श केंद्र हैं जहां उन्हें हर सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाती है.

कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो स्नेह कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित जीवन शैली हमें एड्स जैसी बीमारी से बचा सकती है. रेड क्रॉस के जिला सचिव अरुण राम ने कहा कि लोहरदगा जैसी छोटी सी जगह में भी 60 एचआइवी पीड़ित हैं. इनमें आधा दर्जन बच्चे हैं जिन्हें एचआइवी पीड़ित माता से संक्रमण हुआ है.

इस तरह जन्म लेने वाले बच्चों का जीवन भी संकट पर हो जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ की कई इकाइयां, रेड क्रॉस आइएमए सहित कई संगठन एड्स पर नियंत्रण की दिशा में बेहतर कार्य कर रहे हैं. इसे आम नागरिकों से सहयोग मिलना चाहिए. मौके पर कॉलेज के कई शिक्षक और छात्राएं मौजूद थीं.

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