12 वर्ष बाद भी नहीं बन पाया कंदनी नदी पर पुल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Mar 2019 2:12 AM
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पुल बनने से मुख्यालय की दूरी 14 किमी होती कम स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण भी आठ वर्ष से अधूरा कैरो/लोहरदगा : कैरो को प्रखंड का दर्जा मिले 10 वर्ष बीत गये परंतु आज भी कैरो प्रखंड की जनता बुनियादी समस्याएं झेलने को विवश हैं. कैरो प्रखंड की मुख्य समस्याओं में कंदनी नदी पर बंडा के […]
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पुल बनने से मुख्यालय की दूरी 14 किमी होती कम
स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण भी आठ वर्ष से अधूरा
कैरो/लोहरदगा : कैरो को प्रखंड का दर्जा मिले 10 वर्ष बीत गये परंतु आज भी कैरो प्रखंड की जनता बुनियादी समस्याएं झेलने को विवश हैं. कैरो प्रखंड की मुख्य समस्याओं में कंदनी नदी पर बंडा के समीप अधूरा पुल तथा अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का संचालन न होना है. दोनों समस्याओं से लोग परेशान हैं. इन समस्याओं के निदान के लिए क्षेत्र के लोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है.
नंदनी नदी पर बंडा गांव के समीप पुल निर्माण का काम वित्तीय वर्ष 2007-08 में लगभग 85 लाख रुपये की लागत से प्रारंभ हुआ था. संवेदक द्वारा पुल निर्माण के नाम पर सिर्फ पिलर खड़ा कर दिया गया. लगभग 58 लाख रुपये निकासी भी कर ली. इसके बाद निर्माण कार्य जस का तस पड़ा है. इस पुल के बन जाने से जिला मुख्यालय की दूरी प्रखंड कार्यालय से मात्र 18 किमी हो जाती. परंतु पुल नहीं बनने से जिला मुख्यालय की दूरी कुडू या भंडरा के रास्ते 32 किमी है. यानी लोगों को 14 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है.
बरसात के दिनों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. प्रखंड क्षेत्र के लोग भंडरा बाजार पर निर्भर रहते हैं जो मवेशी खरीद बिक्री का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है. भंडरा बाजार कैरो, उतका, जिंगी, जोजरो, तान, हुदू, हनहट, चाल्हो, गजनी, टाटी, खरता, एडादोन, सिन्जो, उमरी आदि गांवों के किसान मवेशी खरीदने बेचने जाते हैं.
पुल के अभाव में इन गांवों के लोगों का बरसात के दिनों में बाजार जाना भी बंद हो जाता है. जबकि कई व्यापारी इसी धंधे से अपना परिवार चलाते हैं. इसके अलावा क्षेत्र के लोगों की दूसरी मुख्य समस्या स्वास्थ्य सुविधा है.
कैरो में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य 2010-11 में एक करोड़ 11 लाख रुपये की राशि से शुरू किया गया. भवन बनाया भी गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह कहकर यहां काम शुरू नहीं किया गया कि अभी यह फाइनल नहीं हुआ है. बाद में यह शरारतीतत्वों का अड्डा बन गया.
अब तो स्थिति यह है कि भवन का दरवाजा खिड़की तक शरारती तत्व चोरी कर ले जा रहे हैं. स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कैरो के लोगों को पुराना स्वास्थ्य केंद्र ही मिला है. यहां हर महीने 7 से 8 सौ मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं लेकिन सुविधा के अभाव में लोगों का इलाज नहीं हो पाता.
मजबूरन गांव के लोग झोला झाप डॉक्टर के पास पहुंचकर अपना इलाज कराते हैं. स्वास्थ्य उप केंद्र भी एक डॉक्टर, एक एएनएम, एक नर्स एवं दो जीएनएम के भरोसे चलता है. यह सुविधा प्रखंड वासियों के लिए पर्याप्त नहीं है. लोग जब बीमार होते हैं तो उन्हें रांची या लोहरदगा जाना पड़ता है. लेकिन सुविधा न रहने के कारण अधिकांश लोग ट्रेन के माध्यम से रांची या लोहरदगा जाते हैं.
आज भी इस क्षेत्र के लोग अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं. ऐसे तो चुनाव के समय नेता इस क्षेत्र में आते हैं और वे समस्या से जल्द निजात दिलाने की बात कहते हैं. परंतु चुनाव के बाद 5 सालों तक कभी समस्याओं का निदान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं करते और न ही क्षेत्र में दिखायी देते हैं.
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