गज गणना के तहत हाथियों की गिनती का काम पूरा

Updated at : 13 May 2017 8:20 AM (IST)
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गज गणना के तहत हाथियों की गिनती का काम पूरा

आज आ सकती है पीटीआर क्षेत्र में वर्तमान हाथियों की संख्या पर रिपोर्ट कोर एरिया रेंज में 39 व बफर एरिया रेंज में 44 टीम थी गणना में शामिल बेतला : राष्ट्रीय गज गणना कार्यक्रम के तहत पलामू टाईगर रिजर्व में हाथियों की गिनती का काम पूरा कर लिया गया है. नौ मई से गणना […]

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आज आ सकती है पीटीआर क्षेत्र में वर्तमान हाथियों की संख्या पर रिपोर्ट
कोर एरिया रेंज में 39 व बफर एरिया रेंज में 44 टीम थी गणना में शामिल
बेतला : राष्ट्रीय गज गणना कार्यक्रम के तहत पलामू टाईगर रिजर्व में हाथियों की गिनती का काम पूरा कर लिया गया है. नौ मई से गणना की शुरुआत की गयी थी. पूरे पीटीआर में बेतला पार्क सहित आठ रेंज है. इनमें छिपादोहर पूर्वी व पश्चिमी, गारू पूर्वी व पश्चिमी, बारेसाढ़, महुआडांड व कुटकु प्रक्षेत्र हैं. पिछले पांच वर्ष में पाये गये हाथियों के आंकड़ों के आधार पर पूरे पीटीआर में 127 ब्लॉक बनाये गये थे. इसका क्षेत्रफल पांच वर्ग किलोमीटर माना गया था. पलामू टाईगर रिजर्व के कोर एरिया के रेंज में 39 व बफर एरिया के रेंज में 44 टीम हाथी के गिनती में जुटी थी. चार सदस्यों वाली टीम को जीपीएस, कंपास, कैमरा सहित अन्य आवश्यक उपकरण दिये गये थे.
हाथियों की गिनती के काम की मॉनिटरिंग कोर एरिया के डीएफओ अनिल कुमार मिश्रा, बफर एरिया के डीएफओ महालिंग व पीटीआर क्षेत्र निदेशक एमपी सिंह कर रहे थे. राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से आये कई आर्ब्जर ने भी इस काम का जायजा लिया. इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस, बंगलौर के इकोलोजिकल सर्वे के विशेज्ञ सह नेशनल बोर्ड आॅफ वाइल्ड लाइफ के सदस्य डाॅ रमण सुकुमार, एलिफैंट प्रोजेक्ट के निदेशक आरके श्रीवास्तव व आर थोमस भी सर्वेक्षण में शामिल थे. एक्सपर्ट फ्रांसिस इमेयुल व मनीष बक्शी ने पूरे पीटीआर में गिनती के दौरान सक्रिय रहे.
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विधि से हुई गणना
हाथियों के गिनती के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों विधि अपनाये गये थे. गिनती के लिए तीन तरीके अपनाये गये. पहले दिन टीम के सदस्यों द्वारा देख कर हाथियों की गिनती की गयी. जबकि दूसरे दिन हाथियों के लीद को देखा गया गया. वहीं तीसरे दिन वाटर हॉल सहित हाथी पाये जाने वाले संभावित क्षेत्रों पर जाकर गिनती कर उनका फोटोग्राफी किया गया. हाथियों के गिनती के लिए ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस ) का सहारा लिया गया.
तीनों तरीकों से हाथियों के प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के बाद वास्तविक संख्या का पता लगाया जायेगा. पीटीआर क्षेत्र निदेशक एमपी सिंह ने बताया कि अभी सुदूरवर्ती इलाके से अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुआ है. रिपोर्ट मिलने के बाद डाटा कंपाइल किया जायेगा. उम्मीद है कि 13 मई को पीटीआर क्षेत्र में में हाथियों की वर्तमान संख्या का पता लग जायेगा. हथियों की गिनती में किसी तरह की कमी न रह जाये इसका पूरा प्रयास किया गया है.
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