पानी को तरस रही लाधुप पंचायत

Updated at : 08 May 2017 5:23 AM (IST)
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पानी को तरस रही लाधुप पंचायत

सुमित कुमार चंदवा : प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर लाधुप पंचायत में जिला प्रशासन की ओर से कई लाभकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. बरसात का पानी रोकने के उद्देश्य से लाधुप पंचायत में अब तक करीब चार दर्जन डोभा का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा हेसला डैम भी है. बावजूद इसके […]

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सुमित कुमार
चंदवा : प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर लाधुप पंचायत में जिला प्रशासन की ओर से कई लाभकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. बरसात का पानी रोकने के उद्देश्य से लाधुप पंचायत में अब तक करीब चार दर्जन डोभा का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा हेसला डैम भी है. बावजूद इसके लाधुप के खेत सिंचाई के लिए तरस रहे हैं. यह स्थित इसलिए है क्योंकि डोभा निर्माण कार्य केवल टारगेट पूरा करने के लिए हुआ है, किसी भी डोभा में पानी नहीं है.
हेसला डैम का छलका 15 वर्ष पहले टूट गया, लेकिन अाज तक किसी ने सुधी नहीं ली. डैम में पानी रुकता नहीं है. आलम यह है कि पंचायत के किसान बरसाती पानी के भरोसे खेती कर रहे हैं.
करीब आठ-नौ एकड़ में फैला है डैम : हेसला डैम लाधुप पंचायत के सेन्हा गांव में है. करीब आठ-नौ एकड़ में फैले इस डैम से तपती गरमी में भी गांव वालों को काफी सहारा मिलता रहा है.
ग्रामीणों की मानें तो आजादी के बाद इस डैम का निर्माण हुआ था. उस वक्त पूरे परिधि में पानी भरा रहता था. यह डैम करीब छह हजार एकड़ भूमि को सिंचित करता था. सेन्हा से दुधिमाटी होते हेसला तक करीब सात किमी नहर का निर्माण भी कराया गया था. लाधुप, पिरदाग, हेंसला, दुधिमाटी, मनातू व लोहरदगा जिले के रजगुरूवा गांव के लोग इससे लाभांवित होते थे. करीब 15 वर्ष पूर्व पानी के दबाव में डैम का छलका टूट गया. इसके बाद से डैम में पानी का समुचित ठहराव नहीं हो पा रहा है. मिट्टी भर जाने से डैम के आस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है. नहरों में झाड़ियां उग आयी हैं. बारिश के दिनों में पानी दुधिमाटी गांव की ओर कहर बरपाता है.
किसी ने नहीं की पहल : पूर्व मुखिया
इस संबंध में पूर्व मुखिया बिफई मुंडा ने कहा कि किसी जमाने में यह डैम लाधुप की लाइफ लाइन थी. आज इसके सूखने का खतरा मंडरा रहा है. वाटर लेबल भी नीचे खिसकता जा रहा है. छलका निर्माण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अजूर्न मुंडा से लेकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बैजनाथ राम को कई बार आवेदन दिये गये. लघु सिंचाई विभाग की टीम ने डैम का निरीक्षण किया था. उक्त टीम ने कहा था कि यह बड़ा काम है. जिला से बनना संभव नहीं है. विधायक-सांसद को भी कई बार आवेदन दिये गये. बावजूद अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
आंदोलन के मूड में हैं ग्रामीण
पूर्व मुखिया बिफई मुंडा व वर्तमान मुखिया आशा देवी के नेतृत्व में ग्रामीण डैम में छलका निर्माण करवाने को लेकर आंदोलन के मूड में हैं. मुखिया द्वय ने बताया कि डैम का छलका टूटने के बाद यहां खेती कार्य में काफी कमी आयी. तालाब-कूप के सहारे पटवन नहीं हो पाता.
गरमी में ये स्रोत भी सूख जाते हैं. मुखिया आशा देवी ने कहा कि अगर छलका का निर्माण व जीर्णोद्धार हो जाये तो पूरे पंचायत समेत लोहरदगा के गांव में भी सिंचाई की कमी दूर होगी. पाकरटोला, बरबरी टोला, मुखिया टोला, गुलइची टोला, कलहु टोला समेत दर्जनों गांव में इसके लिये हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है. हस्ताक्षरयुुक्त आवेदन मुख्यमंत्री को सौंपा जायेगा.
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