तीन बिरहोर दे रहे मैट्रिक की परीक्षा

Updated at : 19 Feb 2016 12:44 AM (IST)
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तीन बिरहोर दे रहे मैट्रिक की परीक्षा

कोडरमा : हम भी पढ़ेंगे, हम भी बढ़ेंगे इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है डोमचांच प्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर सुदूरवर्ती पंचायत मसनोडीह के जिओरायडीह गांव के बिरहोर परिवार के बच्चों ने. संग्राम नामक संस्था व कुछ समाजसेवियों की मदद से यहां के तीन बिरहोर बच्चे मैट्रिक की परीक्षा दे रहे हैं. परीक्षा […]

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कोडरमा : हम भी पढ़ेंगे, हम भी बढ़ेंगे इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है डोमचांच प्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर सुदूरवर्ती पंचायत मसनोडीह के जिओरायडीह गांव के बिरहोर परिवार के बच्चों ने. संग्राम नामक संस्था व कुछ समाजसेवियों की मदद से यहां के तीन बिरहोर बच्चे मैट्रिक की परीक्षा दे रहे हैं. परीक्षा देने में उन्हें परेशानी हुई, तो झुमरीतिलैया के समाजसेवी शैलेंद्र अभय ने उनकी मदद की. जानकारी के अनुसार जियोरायडीह में राज्य से लुप्त हो रहे बिरहोर समुदाय का 29 परिवार अपना जीवन गुजर-बसर करता है.
वर्ष 2011 में जिले की संस्था संग्राम ने इस गांव को गोद लिया. इसके पूर्व इस गांव में बच्चे जंगल जाते थे. इनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं थे. गांव में सरकार की योजना नहीं चलने के कारण काफी समस्याएं थी. संस्था ने गांव की समस्या से सरकार को अवगत कराया. जिससे गांव में सरकार व संस्था के प्रयास से कई बदलाव हुए. यहां के बच्चों को पढ़ने के लिए खेल-खेल में शिक्षा की पहल भी संस्था ने की. इस कड़ी में गांव के 30 बच्चे जुड़ पढ़ने की इच्छा जतायी. संस्था ने उनका नामांकन मवि सिमरिया में करवाकर पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.
इसी गांव से मालिन बिरहोरनी, प्रदीप बिरहोर, मनोज बिरहोर पिता रामदयाल बिरहोर जो कक्षा आठ तक पढ़ाई कर छोड़ दिये थे. इसके लिए संस्था ने पहल कर उन्हें नौवीं की तैयारी करवाकर सत्यम शिवम सुंदरम उवि फुलवरिया में उनका नामांकन करवाया. यहां बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर विद्यालय प्रधान रामकृष्ण मेहता ने 10वीं माध्यमिक परीक्षा की तैयारी करवायी. इन बच्चों ने उच्च विद्यालय कोडरमा से फाॅर्म भर झारखंड माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुए. जब बच्चों के पास परीक्षा में जाने के लिए आर्थिक संकट उत्पन्न हुई, तो उसे पूरा करने के लिए एक वाट्स ग्रुप के सदस्य शैलेंद्र कुमार अभय ने गंभीरता से ले कर 2100 रुपये बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान की.
बच्चों को इस मुकाम तक पहुंचाने के प्रयास में रौशन सिन्हा, ओंकार विश्वकर्मा, बसंत मेहता, सुमन कुमार मेहता, घनश्याम साव, सुनीता कुमारी, आशीष कुमार, वंदना चंद्रवंशी, वीडियो वोलेंटियर डिंपी देवी, विनती विश्वकर्मा ने अहम योगदान दिया.
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