जिले में इंदिरा आवास योजना में गड़बड़ी

Updated at : 23 Jul 2015 6:51 AM (IST)
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जिले में इंदिरा आवास योजना में गड़बड़ी

विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति ने समीक्षा बैठक के दौरान पकड़ी कोडरमा : जिले में इंदिरा आवास योजना व अन्य विकास योजनाओं में लूट मची है. बुधवार को स्थानीय परिसदन में अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के अध्यक्ष व सदस्य विधायकों ने ऐसी ही गड़बड़ी पकड़ी. समिति ने पाया कि जिले […]

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विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति ने समीक्षा बैठक के दौरान पकड़ी
कोडरमा : जिले में इंदिरा आवास योजना व अन्य विकास योजनाओं में लूट मची है. बुधवार को स्थानीय परिसदन में अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के अध्यक्ष व सदस्य विधायकों ने ऐसी ही गड़बड़ी पकड़ी.
समिति ने पाया कि जिले में तीन वर्ष के दौरान 6200 इंदिरा आवास के एवज में सिर्फ 2200 आवास ही पूरा हुआ है. 4000 इंदिरा आवास योजना के संबंध में सही से रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं है.
जिले में नियम के अनुकूल काम हो रहा है या नहीं, इसकी जांच व जानकारी लेने के लिए समिति के चेयरमैन व विधायक अरुप चटर्जी, विधायक राजकुमार यादव व शशिभूषण समाद बुधवार को यहां पहुंचे हुए थे.
समिति ने परिसदन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. समिति ने बैठक में एनआरइपी, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, पथ निर्माण, भू अजर्न, भू राजस्व, मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा, वन विभाग के अलावा पीएचइडी व एनआरएलएम योजना की समीक्षा की व वर्तमान स्थिति से अवगत हुई. समीक्षा के दौरान गड़बड़ी पाये जाने पर समिति ने अधिकारियों को फटकार लगायी.
इंदिरा आवास योजना में गड़बड़ी की बात डीडीसी केके ठाकुर ने स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें किस स्तर से लापरवाही हुई है, यह जांच के बाद सामने आयेगा. उन्होंने कहा कि सभी इंदिरा आवास को पूर्ण कराया जायेगा.
समित के सदस्यों ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन माह का समय देते हुए इसके लिए डीडीसी केके ठाकुर व स्पेशल डिवीजन को जांच का आदेश दिया है. समिति के सदस्य राजकुमार यादव ने कहा कि इंदिरा आवास का रिकार्ड नहीं मिलना बड़ा घोटाला है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11, 2011-12 व 2013-14 की रिपोर्ट में पूर्ण इंदिरा आवास का जिक्र तो है, पर अन्य इंदिरा आवास की राशि आवंटित होने के बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा कि आदेश दिया गया है कि अगर इसका पता नहीं चलता है, तो पहले पैसा रिकवरी का प्रयास करें फिर सर्टिफिकेट केस करें. उन्होंने कहा कि गलत पाये जाने पर इस मामले में पंचायत सेवक, जेइ व बीडीओ पर भी कार्रवाई होगी. हालांकि डीडीसी का कहना था कि फॉलो अप नहीं करने के कारण ऐसा हुआ है. इसे सुधारने का प्रयास होगा.
राजकुमार यादव ने बताया कि जिले में विधायक मद की राशि का आवंटन प्राप्त कर लेने के बावजूद काम नहीं करने का मामला भी पकड़ में आया है. वर्ष 2012-13 में कोडरमा विधानसभा में कुल 299 योजनाएं स्वीकृत हुई थीं, जिनमें से मात्र 186 पूर्ण हुई, जबकि 113 अपूर्ण हैं.
इनमें से सबसे ज्यादा योजनाएं एनआरइपी में 26 व ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल में 70 अपूर्ण हैं. वहीं इसके बाद स्वीकृत 67 योजनाओं में मात्र 25 पूर्ण हुई है. वर्ष 2014-15 में 83 में से मात्र 69 पूर्ण और 14 अपूर्ण हैं. उन्होंने बताया कि इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनायी गई है. इसमें विशेष प्रमंडल के इइ भी शामिल हैं. इन्हें एक माह के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है. बैठक में डीडीसी केके ठाकुर, डीपीओ शाहिद अहमद, डीइओ एसके राय, सीएस डॉ मधुबाला राणा सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे.
बैठक में विद्युत विभाग के किसी अधिकारी के शामिल नहीं होने पर इसे समिति की अवमानना मानते हुए स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया. इधर, समिति ने चंदवारा के महुआ दोहर निवासी बालेश्वर यादव को मनरेगा के तहत कूप निर्माण करा लेने के बाद भी भुगतान नहीं होने की शिकायत पर स्थल निरीक्षण किया. स्थल निरीक्षण में काम पूरा होने पर स्वीकृत दो लाख 77 हजार का भुगतान करने का निर्देश विभागीय अधिकारी को दिया गया.
जयनगर : झारखंड विधानसभा द्वारा गठित प्रत्यायुक्त समिति बुधवार को बांङोडीह प्लांट पहुंची. समिति ने प्लांट पहुंच कर डीवीसी प्रबंधन से विस्थापितों की समस्याओं पर चर्चा की.
समिति ने प्रबंधन से आरआर पॉलिसी लागू करने, विस्थापितों को नौकरी अथवा बेरोजगारी भत्ता देने व आने-जाने के लिए गेट देने के मुद्दे पर बातचीत की. समिति के सदस्य विधायक राजकुमार यादव ने बताया कि प्रबंधन का एक भी जवाब संतोषजनक नहीं है. डीवीसी विस्थापितों के साथ अन्याय कर रहा है.
इसकी रिपोर्ट सरकार को सौपेंगे. रिंग रोड सहित अन्य ग्रामीण सड़कों की स्थिति खराब है. पेयजल से लेकर अन्य सुविधाएं भी डीवीसी नहीं दे रहा है. मौके पर प्रबंधन के परियोजना प्रमुख एके बनर्जी, उप मुख्य अभियंता मोहन झा, एचआर हेड ओमप्रकाश, योगेंद्र कुमार, माले राज्य कमेटी सदस्य श्याम देव यादव व मजदूर नेता विजय पासवान थे.
स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर समिति ने लगायी सीएस को फटकार
समिति सदस्य राजकुमार यादव ने बैठक में सीएस डॉ मधुबाला राणा से पूछा कि जिले के मरकच्चो व सतगावां में अक्सर डॉक्टर नहीं रहते हैं. यही हाल अन्य पीएचसी का है. ऐसा क्यों.
इस पर सीएस ने डॉक्टरों की कमी की बात कही. उन्होंने कहा कि कुल 53 स्वीकृत पद में 34 डॉक्टर ही हैं. इस पर विधायक ने कहा कि 34 डॉक्टर तो बहुत हैं. अन्य जिलों में तो इतने डॉक्टर भी नहीं हैं, फिर भी ऐसी स्थिति नहीं है.
उन्होंने कहा कि मरकच्चो के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अजय सेठ व सतगावां के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आशीष कुमार को अस्पताल में रहने को कहें. विधायक ने कहा कि क्यों नहीं ऐसे डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी जानी चाहिए. उन्होंने सीएस से दोनों डॉक्टरों के एक माह की रिपोर्ट मांगी. उन्होंने कहा कि डॉक्टर माह में कम से कम 18 दिन व सप्ताह में चार दिन ड्यूटी अवश्य करें.
वहीं समिति सदस्य ने जानना चाहा कि बीपीएल कोटा के तहत कितने लाभुकों को मेडिकेटेड मच्छरदानी का वितरण किया जाना है. इस पर डीपीएम समरेश सिंह ने कहा कि यहां मलेरिया का प्रकोप नहीं है, इसलिए मांग नहीं की गयी. इस पर विधायक ने शीघ्र रिपोर्ट बना कर भेजने को कहा.
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