मूल्य बढ़ने से घर का बजट गड़बड़ाया

Published at :14 Aug 2013 1:09 AM (IST)
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मूल्य बढ़ने से घर का बजट गड़बड़ाया

प्याज की कीमत में लगी आग, लोग परेशान कोडरमा : फिल्मों में डॉन होते हैं और रियल दुनिया में भी डॉन देखने को मिलते हैं, पर सब्जी बाजार में भी एक डॉन की धमक ने लोगों को परेशान कर दिया है. जी हां, महंगाई की आग में प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं. यह […]

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प्याज की कीमत में लगी आग, लोग परेशान

कोडरमा : फिल्मों में डॉन होते हैं और रियल दुनिया में भी डॉन देखने को मिलते हैं, पर सब्जी बाजार में भी एक डॉन की धमक ने लोगों को परेशान कर दिया है. जी हां, महंगाई की आग में प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं. यह हाल तब है जब सावन में कम ही लोग प्याज खाते हैं.

जो लोग प्याज खाते हैं, वे तो प्याज का दाम सुन कर ही इसे छूने से डर रहे हैं. आखिर घर का बजट गड़बड़ाने का डर जो सता रहा है.

बाजार में प्याज 50 रुपये किलो बिक रहा है, तो दाल में तड़का लगना बंद हो गया है. होटलों से लेकर रोस्टोरेंट में प्याज का सेवन कम तो हुआ ही है, आम घरों में भी प्याज खाना कम हो गया है.

अचानक आयी इस तेजी ने आम जनता को परेशान कर दिया है. गरीब की थाली पर पहले से ही महंगाई की मार है और अब नमक प्याज रोटी भी खाना नसीब मुश्किल लग रहा है. पहले जमाना था जब लोग कहते थे प्याज नमक रोटी तो खा ही लेंगे, लेकिन अब इस प्याज पर भी संकट है.

यही नहीं, दुकानदारों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में दाम और भी बढ़ सकते हैं. आवक कम होने के कारण प्याज के दामों में वृद्धि बतायी जा रही है. वैसे, झुमरीतिलैया शहर में लोकल प्याज तो कम ही रहा है, पर नासिक के प्याज के दाम भी बढ़े हुए हैं.

लोगों कम ही ले रहे हैं प्याज : अनिल कुमार राणा ने बताया कि दस दिन पहले प्याज थोक भाव में 28-30 रुपये बिकता था तो वे 36-38 रुपये में खुदरा प्याज बेच रहे थे. आज वे लोग ही 40-42 रुपये में प्याज खरीद रहे हैं, तो प्याज 50 रुपये किलो बिकेगा ही. कई ग्राहकों ने तो प्याज लेना बंद कर दिया है.

जो ग्राहक एक से दो किलो तक प्याज ले जाते थे, वे अब एक पाव ले रहे हैं. हालांकि, एक माह के बाद जब बाहर से प्याज आने लगेगा, तो कम से कम दाम छह रुपये गिर सकता है. दुकानदार विजय साव ने बताया कि बाजार में प्याज की मांग जितनी है, उतनी प्याज उपलब्ध नहीं है.

लगता है कि दाम 60 रुपये तक पहुंच जायेगा. अजय कुमार ने बताया कि प्याज बिहार से बहुत आता था, मगर बाढ़ अन्य समस्याओं के कारण आवक नहीं है. लोकल स्तर पर भी प्याज का उत्पादन नहीं के बराबर है. ऐसे में मांगें पूरी नहीं हो पा रही हैं.

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