आदिवासियों को मिले संवैधानिक हक

Updated at : 10 Aug 2016 7:26 AM (IST)
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आदिवासियों को मिले संवैधानिक हक

खूंटी : विश्व आदिवासी दिवस पर मंगलवार को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा खूंटी के द्वारा कचहरी मैदान में सभा आयोजित की गयी. सभा में दामु मुंडा ने कहा कि भारत के संविधान के लागू हुए 66 वर्ष बीत गये. इसके बावजूद आदिवासियों को उनका हक नहीं मिला, जो काफी दुखद है. हर सरकार आदिवासियों के […]

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खूंटी : विश्व आदिवासी दिवस पर मंगलवार को अखिल भारतीय आदिवासी महासभा खूंटी के द्वारा कचहरी मैदान में सभा आयोजित की गयी. सभा में दामु मुंडा ने कहा कि भारत के संविधान के लागू हुए 66 वर्ष बीत गये. इसके बावजूद आदिवासियों को उनका हक नहीं मिला, जो काफी दुखद है.
हर सरकार आदिवासियों के समुचित विकास की बात करती है, पर इसे हकीकत में उतारा नहीं जा सका है. भारत का संविधान का अनुच्छेद 244 में अनुसूचित क्षेत्र एवं आदिवासी क्षेत्र ही आदिवासी भारत है. आदिवासी भारत का शासन एवं नियंत्रण संविधान के पांचवीं एवं छठी अनुसूची के तहत होना चाहिए. पर यह अधिकार नहीं मिला है.
चोन्हास खलखो ने कहा कि संविधान में रुढ़ीवादी विधि एवं सामाजिक-सांस्कृतिक परंपरा को विधि का बल स्वत: प्राप्त है. राज्य सरकार को स्पष्ट हिदायत है कि सामान्य नागरिकों केहित में ऐसा कोई कानून न बने, जिससे आदिवासियों की हानि हो. पर इस पर अमल अब तक नहीं किया गया है.
मुचिराय मुंडा, पौलुस बोदरा, बेनेदिक नौरंगी, बी पाहन ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र, आदिवासी क्षेत्र के विकास के नाम पर किसी तरह का आदिवासियों का विस्थापन नहीं करने की बात कही गयी है. पर सरकार आदिवासियों का जमीन हड़पने के लिए नये-नये कानून बना रही है. सरकार की मंशा को कदापि पूरा नहीं होने दिया जायेगा. यदि ऐसा हुआ तो एक और उलगुलान राज्य में छिड़ेगा. जागरूकता के बाबत कई नृत्य पेश किये गये.
मौके पर लोगों ने संकल्प लिया कि सभी जान दे देंगे, पर आदिवासी अपनी जमीन का एक टुकड़ा भी विकास के नाम पर सरकार को नहीं लेने देंगे. मांगों के बाबत एक ज्ञापन बिरसा पाहन, बालगोविंद तिर्की, चैतन मुंडा, मंगरा मुंडा, दुर्गावती ऑड़ेया, बिरसा मुंडा, शनिका संगा, एस टूटी, शनिका पाहन, राम टूटी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे.
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