चाय बेचने को मजबूर हैं विनसेंट
Updated at : 19 Feb 2015 12:50 AM (IST)
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खूंटी : स्नातक पास नि:शक्त विनसेंट बोदरा(47) नौकरी नहीं मिलने के कारण एसएस हाइस्कूल खूंटी के समीप सड़क के किनारे एक गुमटी में चाय बेचने को विवश है. शिक्षित होने के बावजूद विनसंेट को परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. विनसंेट का जन्म […]
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खूंटी : स्नातक पास नि:शक्त विनसेंट बोदरा(47) नौकरी नहीं मिलने के कारण एसएस हाइस्कूल खूंटी के समीप सड़क के किनारे एक गुमटी में चाय बेचने को विवश है. शिक्षित होने के बावजूद विनसंेट को परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
विनसंेट का जन्म मुरहू के सिद्धू करंजटोली गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था. जन्म से ही वो पोलियो से पीड़ित थे. दोनों पैरों से लाचार होने के बावजूद विनसंेट ने पांच साल की उम्र से स्कूल जाना शुरू कर दिया. उन्होंने मुरहू हाइस्कूल से माध्यमिक तथा बिरसा कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए विनसेंट ने कुरसी बुनाई का काम सीखा. दिन में कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद रात में कुरसी बुनाई का काम करते थे. स्नातक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण होने के बाद विनसंेट को उम्मीद थी कि उन्हें कोई सरकारी नौकरी मिल जायेगी. काफी प्रयास के बाद भी जब कोई नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने एसएस हाइस्कूल के समीप सड़क किनारे गुमटी लगा कर चाय बेचना शुरू कर दिया.
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