तोड़ा जा सकता है मिहिजाम कॉलेज का भवन

Published at :30 Apr 2016 7:47 AM (IST)
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तोड़ा जा सकता है मिहिजाम कॉलेज का भवन

मिहिजाम : शुक्रवार को न्यायालय के आदेश के बाद जनजातीय संध्या महाविद्यालय मिहिजाम परिसर के एक हिस्से पर वादी शांति बाला दासी के परिजनों को दखल दिहानी दिलायी गयी. न्यायालय के आदेश के बाद नियुक्त दंडाधिकारी सह बीडीओ अमित कुमार, नाजिर संजय कुमार शुक्ला, लाइन नाजिर पंकज कुमार, थाना प्रभारी मंगल प्रसाद, सीआइ आशुतोष कुमार […]

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मिहिजाम : शुक्रवार को न्यायालय के आदेश के बाद जनजातीय संध्या महाविद्यालय मिहिजाम परिसर के एक हिस्से पर वादी शांति बाला दासी के परिजनों को दखल दिहानी दिलायी गयी. न्यायालय के आदेश के बाद नियुक्त दंडाधिकारी सह बीडीओ अमित कुमार, नाजिर संजय कुमार शुक्ला, लाइन नाजिर पंकज कुमार, थाना प्रभारी मंगल प्रसाद, सीआइ आशुतोष कुमार दल-बल के साथ मौके पर सुबह करीब 9 बजे पहुंचे.
कॉलेज परिसर के अंदर एवं बाहरी क्षेत्र में स्थित वादी के जमीन पर दखलदहानी के लिए करीब पांच घंटे बाद कार्रवाई पूरी हुई. इस दौरान मापी के बाद दाग पर लाल झंडा लगाया गया और ढोल बजा कर बासगाड़ी की गयी. जिसके बाद दखलदार के मजदूरों ने कॉलेज परिसर की चहारदीवारी ढहाना शुरू कर दिया. नन सेलेबल उक्त 4 एकड़ 84 डिसमिल का मामला वर्ष 1979 का है.
जिसमें से वादी की प्लॉट संख्या 2044 ए, बी, सी जो कॉलेज के आहाते में 234 डिसमिल जमीन है को कब्जा दिलाया. इसके अलावे कॉलेज परिसर से बाहरी इलाके मालपाड़ा, अांबेदकरनगर, राजबाड़ी में मौजूद वादी के जमीन पर भी दखल दिलायी गयी. शांतिबाला दासी और उसके चचेरे भाई मागाराम महतो के बीच जमीन बंटवारे को लेकर न्यायालय में मामला शुरू हुआ था. इस बीच मागाराम महतो ने वर्ष 1989 में जमीन को कॉलेज निर्माण के लिए राज्यपाल के नाम दान कर दी. वादी के हिस्से में डिग्री कॉलेज का दो वर्ष पूर्व विधायक निधि से करीब 25 लाख रुपए की लागत से बना भवन भी आ गया है.
सामाचार प्रेषण तक भवन नहीं ढहाया गया था. इस बीच डिग्री के प्राचार्य कृष्ण मोहन साह और अन्य ने कॉलेज तथा छात्रों के हित में जमीन को लेकर समझौता कर लेने के लिए वादी के परिजनों को समझाने बुझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन वादी नहीं मान रहे थे. इस दौरान कॉलेज के छात्र कर्मी व अन्य बुद्धिजीवी हताश और निराश दिखे. वादी शांतिबाला दासी के बेटे सतीष चंद्र महतो ने कहा कि अब समझौते का कोई सवाल ही नहीं होता है. इतने दिनों तक न्यायालय में मामला रहा, लेकिन कोई समझौता के लिए नहीं आया.
छात्र हित में हाइकोर्ट में की है अपील : प्राचार्य
डिग्री के प्राचार्य कृष्ण मोहन साह का कहना था कि हम आदेश को लेकर छात्रहित में उच्च न्यायालय में अपील कर चुके हैं. फैसला आना बाकी है. शासी निकाय के अध्यक्ष सह एसडीओ नवीन कुमार ने कहा कि न्यायालय ने अपना काम किया है. गवर्निंग बॉडी छात्रों के हित में चिंतन कर वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करेगी.
शांतिबाला के भाई ने दी थी कॉलेज को दान में जमीन
वर्ष 1983 में क्षेत्र के कई गण्यमान्य लोगों ने मिलकर क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए कॉलेज स्थापना करने की प्रक्रिया शुरू की थी. जिसमें रेलपार स्थित हाइस्कूल के तत्कालीन हेडमास्टर भोलानाथ ओझा, वर्तमान जेएमएम जिलाध्यक्ष श्यामलाल हेंब्रम, दुलाल राय, पीपी मिश्रा, पीसी झा, झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन सहित कई लोग शामिल थे.
कॉलेज के भवन और जमीन उपलब्ध होने में हो रही देरी के चलते भोलानाथ ने हाइस्कूल में ही संध्या के समय कॉलेज की पढ़ाई शुरू करने पर जोर दिया और कॉलेज शुरू भी कर दिया गया, क्योंकि उसी स्कूल में दिन में कॉलेज नहीं चल सकता था. दिन में छोटी कक्षाओं की पढ़ाई होती थी. इसी कारण कॉलेज के नाम के साथ संध्या शब्द जुड़ा.
दूसरी ओर कॉलेज के भवन और जमीन के लिए मालपाड़ा निवासी मागाराम और उसके परिवार ने लगभग साढ़े आठ एकड़ जमीन दान कर दी. वादी शांतिबाला दासी के पुत्र सतीश चंद्र महतो के मुताबिक वर्ष 1977 में ही जमीन का बंटवारा हो गया था, लेकिन हमारे हिस्से पर कब्जा करने नहीं दिया जा रहा था. मागाराम ने हमारे और अपने हिस्से की जमीन भी कॉलेज भवन निर्माण के लिए दान दे दिया. इसी को लेकर मामला चल रहा था. जिस हमें डिग्री प्राप्त हुई है.
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