इलाज को नहीं थे पैसे, गई वृद्धा की जान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Aug 2018 4:10 AM

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परिवार को मिलता था मात्र दस किलो अनाज सोमवार की रात कर दिया अंतिम संस्कार आर्थिक तंगी के कारण नहीं हुआ समुचित इलाज जामताड़ा : करमाटांड़ प्रखंड के कालाझरिया गांव में बीमारी एवं गरीबी ने 60 वर्षीय महिला दुखी देवी की जान ले ली. वृद्धा पिछले पांच वर्ष से बीमारी चल रही थी, लेकिन आर्थिक […]

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परिवार को मिलता था मात्र दस किलो अनाज

सोमवार की रात कर दिया अंतिम संस्कार
आर्थिक तंगी के कारण नहीं हुआ समुचित इलाज
जामताड़ा : करमाटांड़ प्रखंड के कालाझरिया गांव में बीमारी एवं गरीबी ने 60 वर्षीय महिला दुखी देवी की जान ले ली. वृद्धा पिछले पांच वर्ष से बीमारी चल रही थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण महिला बड़े अस्पताल में अपना इलाज नहीं करा पायी. इस कारण उसकी मौत हो गयी है. परिजनों ने सोमवार रात को ही वृद्धा का दाह संस्कार भी कर दिया. बता दें कि यह क्षेत्र सूबे के कृषि मंत्री रणधीर सिंह का है. करमाटांड़ प्रखंड के मटटांड़ पंचायत के कालाझरिया गांव सारठ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. जहां से रणधीर सिंह विधायक हैं और सूबे के कृषि मंत्री भी हैं.
कई बार आवेदन देने के बाद भी नहीं मिला कुछ लाभ : मृतका के पति शंकर साह ने बताया कि पहले चल-फिर सकता था, उस समय कमा के भी लाता था पर अचानक शरीर ने साथ देना छोड़ दिया. और एक भाग अपाहिज हो गया. वहीं धीरे-धीरे परिवार की स्थिति दयनीय होने लगी. घर पर अनाज का अभाव होने लगा. भूख के कारण कुपोषित होकर बीमार पड़ गयी. पत्नी का इलाज हमलोग सरकारी अस्पताल में कई बार कराये थे, लेकिन वह ठीक नहीं हुई. डॉक्टरों ने दूसरे जगह बड़े अस्पताल में ले जाने को कहा, लेकिन पैसा के अभाव में हमलोग दूसरे जगह कहीं नहीं ले जा पाये. इलाज एवं पोषण के अभाव में मेरी पत्नी की मौत हो गयी.
घर में चार सदस्य पर मिल रहा था मात्र 10 किलो अनाज
दुखी देवी के परिवार में कुल चार सदस्य हैं. जिसमें दुखी देवी, दिव्यांग पति शंकर साह, विधवा बेटी उर्मीला देवी एवं चार वर्षीय नाती हैं. सरकार के तरफ से इस परिवार को सिर्फ लाल कार्ड ही मिला हुआ था. बाकी और कुछ सरकारी लाभ नहीं मिला था. शंकर साह के अनुसार उक्त लाल कार्ड पर उन्हें सिर्फ 10 किलो चावल एवं गेहूं मिल रहा था. जिससे पूरे परिवार का भरण-पोषण हो रहा था. मृतिका के घर में कोई भी कमाने वाला नहीं था. पति दिव्यांग था और पुत्री विधवा. इस गरीब परिवार को सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ लाल कार्ड ही दिया गया था. इसके अलावा किसी भी प्रकार की योजना का लाभ इस परिवार को नहीं मिला. लाल कार्ड में 10 किलो अनाज मिल रहा था. शंकर को दिव्यांग पेंशन योजना का भी लाभ नहीं मिला था. शंकर साह ने बताया कि दिव्यांग पेंशन के लिए कई बार संबंधित विभाग में आवेदन भी दिये थे. लेकिन अभी तक पेंशन नहीं मिला. बेटी भी विधवा है, वह भी हमारे साथ ही रहती है उसे भी विधवा पेंशन दिलाने के लिए भी विभाग में कई बार आवेदन दिया है. पर अब तक पेंशन योजना का लाभ नहीं मिला है. कहा कि बेटी के पति का निधन बीमारी के कारण चार पूर्व हो गया है.
बोले पदाधिकारी
इस संबंध में बीडीओ ने कहा कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है. पता कराते हैं.
मनीष कुमार, बीडीओ, करमाटांड़
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