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मुझे बना दिया था निरीह चेयरमैन

Updated at : 27 Oct 2016 8:22 AM (IST)
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मुझे बना दिया था निरीह चेयरमैन

मुंबई : टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने से आहत साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा के खिलाफ कई आरोप लगाये हैं और कहा है कि कंपनी में उन्हें ‘एक निरीह चेयरमैन’ की स्थिति में ढकेल दिया गया था. उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक […]

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मुंबई : टाटा उद्योग समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने से आहत साइरस मिस्त्री ने रतन टाटा के खिलाफ कई आरोप लगाये हैं और कहा है कि कंपनी में उन्हें ‘एक निरीह चेयरमैन’ की स्थिति में ढकेल दिया गया था. उन्होंने कहा कि निर्णय प्रक्रिया में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक शक्ति केंद्र बन गये थे.
टाटा संस के निदेशक मंडल के सदस्यों को लिखे एक गोपनीय किंतु विस्फोटक ई-मेल में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका दिये बिना ही भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह के चेयरमैन पद से हटाया गया. मिस्त्री का कहना है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई ‘चटपट अंदाज’ में की गयी. उन्होंने इसे कॉरपोरेट जगत के इतिहास की अनूठी घटना बताया.
मिस्त्री ने 25 अक्तूबर को लिखे ई-मेल में कहा, ‘‘24 अक्तूबर 2016 को निदेशक मंडल की बैठक में जो कुछ हुआ, वह हतप्रभ करने वाला था और उससे मैं अवाक रह गया. वहां की कार्रवाई के अवैध और कानून के विपरीत होने के बारे में बताने के अलावा, मुझे यह कहना है कि इससे निदेशक मंडल की प्रतिष्ठा में कोई वृद्धि नहीं हुई.” मीडिया को बुधवार को जारी इस ई-मेल में उन्होंने लिखा है, ‘‘अपने चेयरमैन को बिना स्पष्टीकरण और स्वयं के बचाव के लिये कोई अवसर दिये बिना चटपट कार्रवाई में हटाना कारपोरेट इतिहास में अनूठा मामला है.” मिस्त्री के आरोपों के बारे में टाटा संस से जवाब लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी.
नहीं िमली काम करने की आजादी : टाटा समूह के पूर्व प्रमुख ने कहा कि उन्हें दिसंबर 2012 में जब नियुक्त किया गया था. उन्हें काम करने में आजादी देने का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी के संविधान में संशोधन तथा टाटा परिवार ट्रस्ट तथा टाटा संस के निदेशक मंडल के बीच संवाद सम्पर्क के नियम बदल दिये गये थे.
22 करोड़ की धोखाधड़ी का हुआ खुलासा : मिस्त्री ने कहा कि कुछ सौदों को लेकर नैतिक रूप से चिंता जतायी गयी थी और हाल में फॉरेंसिक जांच से 22 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी वाले सौदों का खुलासा हुआ. इसमें भारत और सिंगापुर में ऐसे पक्ष जुड़े थे, जो वास्तव में हैं ही नहीं.
अचानक कार्रवाई व स्पष्टीकरण न होने से अफवाह बढ़े : साइरस मिस्त्री ने कहा कि अचानक से हुई कार्रवाई तथा स्पष्टीकरण के अभाव से अफवाह को बढ़ावा मिला तथा इससे उनकी तथा टाटा समूह की साख को काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह विश्वास नहीं कर सकता कि मुझे काम नहीं करने के आधार पर हटाया गया.” उन्होंने दो निदेशकों का जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें हटाये जाने के पक्ष में वोट दिया, जबकि हाल ही में उन लोगों ने उनके कामकाज की सराहना की थी.
विदेशी अधिग्रहणों से कंपनी पर कर्ज का बोझ बढ़ा : मिस्त्री ने टाटा समूह की कंपनियों में विरासत में मिली समस्याओं के बारे में विस्तार से बताते हुए अपने पत्र में लिखा है कि जेएलआर और टेटले के अपवाद को छोड़कर विदेशी अधिग्रहण रणनीति से बड़े पैमाने पर कर्ज का बोझ बढ़ा. उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय इस्पात कारोबार की संपत्ति के मूल्य को 10 अरब डॉलर से अधिक घटने की आशंका है.
आइएचसीएल की कई विदेशी संपत्तियां तथा ओरिएंट होटल्स में होल्डिंग को घाटे में बेचा गया. न्यूयार्क में पियेरे के पट्टे के लिये जो कठिन शर्तें रखी गयी, उससे बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण होगा.” मिस्त्री ने कहा कि टाटा केमिकल्स को अपने ब्रिटेन तथा केन्या परिचालनों के संदर्भ में अभी भी कड़े निर्णय की जरूरत है.
आइएचसीएल की कड़ी आलोचना की : उन्होंने समूह की होटल इकाई आइएचसीएल के मामले में कड़ी आलोचना करते हुए कि अंतरराष्ट्रीय रणनीति में काफी गड़बड़ी थी और उसने सीरॉक संपत्ति का काफी ऊंचे मूल्य पर अधिग्रहण किया. मिस्त्री ने कहा, ‘‘इस विरासत को सुलझाने के क्रम में आइएचसीएल को पिछले तीन साल में अपना करीब पूरा नेटवर्थ बट्टे खाते में डालना पड़ा. इससे उसकी लाभांश देने की क्षमता प्रभावित हुई. उन्होंने अपने पत्र में टाटा कैपिटल, टाटा पावर और समूह के दूरसंचार कारोबार की समस्याओं को भी विस्तार से बताया है, जो उन्हें विरासत में मिली.
सेबी की निगाह, शेयर बाजारों ने सफाई मांगी
सेबी देख रहा है कि कहीं इस मामले में कंपनी संचालन व बाजार सूचीबद्धता के नियमों का कोई उल्लंघन तो नहीं हुआ है. सेबी के अलावा शेयर बाजारों ने भी समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों से मिस्त्री के इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा है कि समूह की घाटे में चल रही कंपनियों की वजह से समूह की कंपनियों की संपत्ति में 1.18 लाख करोड़ रुपये का बट्टा लग सकता है.
नैनो को बताया संबंधों में खटास का मुद्दा : टाटा और अपने बीच बेहतर संबंध नहीं होने का स्पष्ट संकेत देते हुए उन्होंने रतन टाटा द्वारा शुरू की गयी घाटे वाली नैनो कार परियोजना का मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कहा कि इसे भावनात्मक कारणों से बंद नहीं किया जा सका. एक कारण यह भी था कि इसे बंद करने से बिजली कार बनाने वाली एक इकाई को ‘सूक्ष्म ग्लाइडर’ की आपूर्ति बंद हो जाती. उस इकाई में टाटा की हिस्सेदारी है.
रतन टाटा ने विमानन में उतरने को किया मजबूर : मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि यह रतन टाटा ही थे, जिन्होंने समूह को विमानन क्षेत्र में कदम रखने को मजबूर किया था और उनके लिए (मिस्त्री के लिए) एयर एशिया तथा सिंगापुर एयरलाइंस के साथ हाथ मिलाना एक औपचारिकता मात्र बची थी. उन्होंने कहा है कि समूह को नागर विमानन क्षेत्र में उतरने के लिए पहले की योजनाओं से कहीं अधिक पूंजी डालनी पड़ी.
समूह की कंपनियों को बुधवार को बाजार में दस हजार करोड़ का नुकसान हुआ. इसके साथ ही दो दिनों में समूह को 21000 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. बुधवार को बीएसइ में टाटा मोटर्स के शेयर 4.27%, टाटा स्टील के 4.01%, टाटा पावर के 2.06% गिरे. इसके अलावा टाटा मेटालिका के शेयर 3.85%, टाटा एलिक्सा के 3.15%, टाटा ग्लोबल बेवरेज के 3.10%, टाटा कम्यूनिकेशनस के 2.68%, टाटा स्पांज आयरन के 0.57% और टाटा कॉफी के शेयर 0.42% गिरे.
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