ओपीडी में इलाज छोड़ हड़ताल पर गये डॉक्टर, एक हजार से ज्यादा मरीज लौटे

Updated at : 01 Aug 2019 7:28 AM (IST)
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ओपीडी में इलाज छोड़ हड़ताल पर गये डॉक्टर, एक हजार से ज्यादा मरीज लौटे

जमशेदपुर : लोकसभा में पास हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक-2019 के खिलाफ पूरे देश के डॉक्टर बुधवार को काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रकट करते हुए हड़ताल पर रहे. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा घोषित यह हड़ताल गुरुवार की सुबह छह बजे तक जारी रही. बुधवार की सुबह नौ से 10 बजे तक एमजीएम का ओपीडी खुला […]

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जमशेदपुर : लोकसभा में पास हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक-2019 के खिलाफ पूरे देश के डॉक्टर बुधवार को काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रकट करते हुए हड़ताल पर रहे. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा घोषित यह हड़ताल गुरुवार की सुबह छह बजे तक जारी रही. बुधवार की सुबह नौ से 10 बजे तक एमजीएम का ओपीडी खुला रहा, लेकिन इसके बाद पहुंचे आइएमए के सदस्यों ने एमजीएम समेत सदर अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का ओपीडी बंद करा दिया.

वहीं, दूसरी ओर अधिकतर प्राइवेट अस्पताल व नर्सिंग होम में ओपीडी खुला रहा, लेकिन लंच के दौरान यहां के डॉक्टर भी एकजुट होकर हड़ताल का समर्थन किया लेकिन बाद में काम में लग गये. हड़ताल के कारण पूरे जिले में एक हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज नहीं हो पाया. हालांकि सभी अस्पतालों में इमरजेंसी के चालू रहने के कारण मरीजों को थोड़ी राहत मिली. यहां गंभीर मरीजों का इलाज किया गया.
परेशान दिखे मरीज. बुधवार की सुबह लगभग आठ बजे से एमजीएम के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की लाइन लग गयी, जहां काउंटर खुलने के बाद लोगों को पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं और ओपीडी नहीं खुलेगा. जानकारी मिलने पर निराश होकर मरीज वापस चले गये.
वहीं, एमजीएम के इमरजेंसी में 250 मरीजों का इलाज किया गया और 600 से ज्यादा बिना इलाज कराये वापस चले गये. इस दौरान कई मरीज व उनके परिजन अस्पताल परिसर में इलाज कराने के लिए भटकते नजर आये.
आइएमए के सदस्यों ने डॉक्टरों को लगाया काला बिल्ला. आइएमए के सदस्यों ने सभी अस्पतालों में जाकर डॉक्टरों को काला बिल्ला लगाया. साथ ही ओपीडी बंद कराया. इसमें आइएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार, डॉ एके लाल, डॉ सौरभ चौधरी, डॉ संतोष गुप्ता शामिल थे.
इलाज नहीं होने के कारण अस्पतालों में भटकते रहे मरीज व परिजन
क्या है एनएमसी बिल
अब तक मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी थी, लेकिन बिल पास कर एनएमसी विधेयक मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह लेगा. इसके तहत 3.5 लाख नॉन मेडिकल लोगों को लाइसेंस देकर सभी प्रकार की दवा लिखने और इलाज करने का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है, जिसका डॉक्टर विरोध कर रहे हैं.
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अनुबंध कर्मचारियों के हड़ताल का किया समर्थन
जमशेदपुर : एनआरएचएम कर्मियों द्वारा सात सूत्री मांगों को लेकर किये जा रहे हड़ताल को बुधवार को झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने नैतिक समर्थन दिया.
संघ के जिला मंत्री रवींद्र नाथ ठाकुर ने कहा कि एनआरएचएम कर्मचारियों द्वारा पूरे राज्य में हड़ताल किया जा रहा है. संघ इनकी मांगों को सही मानते हुए इनके आंदोलन को नैतिक रूम से समर्थन देता है. साथ ही जरूरत होने पर संघ के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल होकर हड़ताल कर करेंगे.
सदर अस्पताल : 150 से ज्यादा मरीज लौटे
खासमहल स्थित सदर अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लग गयी. लेकिन हड़ताल के कारण 150 से ज्यादा मरीज बिना इलाज कराये वापस चले गये. हड़ताल के कारण दूर से आने वाले मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
मरीजों के बोल
मुझे सर्दी, बुखार व पूरे बदन में दर्द है. सुबह आठ बजे इलाज कराने के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचा. तो पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं, जिसके कारण ओपीडी बंद है. इसके बाद इमरजेंसी में इलाज कराने पहुंचा, तो डॉक्टरों ने गुरुवार को आकर ओपीडी में इलाज कराने की बात बोल वापस कर दिया. पैसे नहीं होने के कारण दूसरे से भाड़ा लेकर इलाज कराने आया था. पैसा भी खत्म हो गया, इलाज भी नहीं हुआ.
सुखराम हेंब्रम, बालीगुमा
चार दिनों से तबीयत खराब है. अपने घर के पास इलाज करा रहा था, लेकिन ठीक नहीं होने पर एमजीएम पहुंचा, तो पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं इलाज नहीं होगा. अब वापस अपने घर जा रहे हैं.
मोटाय किस्कू, घाटशिला
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