100 साल जमशेदपुर के : जमशेदपुर की खूबी है कि यहां हर कुछ पांच मिनट के सफर में पा सकते हैं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jan 2019 8:29 AM (IST)
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डेजी ईरानी , जमशेदपुर : मेरा जन्म वर्ष 1948 में जमशेदपुर में हुआ था. मैंने सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से बारहवीं तक पढ़ाई की फिर उच्च शिक्षा के लिए मद्रास गयी. वहां से वापस लौटने के बाद मैंने बैंक अॉफ बड़ौदा ज्वाइन किया. इसके बाद डॉक्टर ईरानी से मुलाकात हुई अौर हमने 1971 में शादी […]
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डेजी ईरानी , जमशेदपुर : मेरा जन्म वर्ष 1948 में जमशेदपुर में हुआ था. मैंने सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से बारहवीं तक पढ़ाई की फिर उच्च शिक्षा के लिए मद्रास गयी. वहां से वापस लौटने के बाद मैंने बैंक अॉफ बड़ौदा ज्वाइन किया.
इसके बाद डॉक्टर ईरानी से मुलाकात हुई अौर हमने 1971 में शादी कर ली. हमारे तीन बच्चे हुए. तीनों ने शहर से ही पढ़ाई की. बेटा जुबीन ईरानी ने लोयोला से जबकि बेटी नीलोफर व तनाज दोनों ने कॉन्वेंट से बारहवीं तक पढ़ाई करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख किया.
मैं दस साल तक मुंबई में भी रही. लेकिन वह शहर से भावनात्मक लगाव नहीं हो पाया. रिटायरमेंट के बाद मौका था कि हम मुंबई में ही रहें, लेकिन हम दोनों ने सोचा कि आखिर रिटायरमेंट के बाद हमें क्या चाहिए.
घर के नजदीक हॉस्पिटल अौर पांच से दस अच्छे दोस्त. दोनों जमशेदपुर में मिले अौर हम वापस जमशेदपुर आ गये. जमशेदपुर शहर से अच्छा शहर पूरे देश में कहीं नहीं है. जितना हरा-भरा व साफ-सफाई यहां है वह कहीं अौर नहीं है. जहां तक बदलाव की बात है कि बेशक मुझे याद है कि उस वक्त हमलोग घर के बाहर खाट बिछा कर सो जाते थे.
घर का सामान बाहर ही पड़ा रहता था, लेकिन कोई छूता भी नहीं था. जनसंख्या बढ़ने से बाद सुरक्षा का इश्यू तो बना ही है. ट्रैफिक भी पहले नहीं था. हर किसी के पास पहले साइकिल हुआ करती थी, इक्के दुक्के लोगों के पास स्कूटर होता था. इस शहर में बारहवीं तक जो शिक्षा दी जाती है वह वर्ल्ड क्लास है.
हमें बच्चे को बारहवीं तक अपने साथ रखना जरूरी है. कारण है कि उस उम्र में वे माता पिता से वैल्यूज सीखते हैं, जो जीवन भर उनके काम आता है. पहले कभी-कभी यह लगता था कि इस शहर में मॉल की बड़ी कमी है. लेकिन अब धीरे-धीरे यह कमी भी दूर हो गयी है.
एक अच्छा मॉल बन गया हैं जबकि दो-तीन प्रक्रिया में हैं. यह कमी भी पूरी हो गयी है. अक्सर बाहरी लोगों से यह सुनने को मिलता है कि इस शहर में एयरपोर्ट नहीं होने की वजह से समस्या होती है, लेकिन ऐसी बात नहीं है.
अगर हाइवे की स्थिति ठीक हो जाये तो फिर आराम से ढ़ाई घंटे में ही रांची एयरपोर्ट जाया जा सकता है. यहां अगर आपको मॉल, मार्केट, स्टेडियम, पार्क, हॉस्पिटल कहीं भी जाना है तो 5 मिनट के अंदर जा सकते हैं.
इस शहर की अनेक खूबियां है. मेरी दो ड्रीम थी. पहला साईं मंदिर की शुरुआत जबकि दूसरी बेहतर सुविधाअों से लैस अोल्ड एज होम शुरू करना. साईं मंदिर तो बन गया है, अोल्ड एज होम बनाने के लिए प्रयास किया गया था. लेकिन जमीन की तकनीकी पेच की वजह से यह नहीं बन सका.
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