तीन दिनों से कमरे में कैद थी रंजना, किसी ने नहीं ली सुध
Updated at : 03 Jan 2019 6:36 AM (IST)
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आदित्यपुर : आइआइटी मद्रास के छात्रावास में आत्महत्या करनेवाली पीएचडी की छात्रा की पहचान कर ली गयी है. छात्रा रंजना कुमारी उर्फ टोनी आदित्यपुर रोड नंबर 31 की रहनेवाली थी. परिजनों ने रंजना की मौत पर सवाल उठाये हैं. संस्थान पर पूरे मामले में लापरवाही का आरोप लगाया है. रंजना की मौत की सूचना मिलने […]
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आदित्यपुर : आइआइटी मद्रास के छात्रावास में आत्महत्या करनेवाली पीएचडी की छात्रा की पहचान कर ली गयी है. छात्रा रंजना कुमारी उर्फ टोनी आदित्यपुर रोड नंबर 31 की रहनेवाली थी. परिजनों ने रंजना की मौत पर सवाल उठाये हैं. संस्थान पर पूरे मामले में लापरवाही का आरोप लगाया है.
रंजना की मौत की सूचना मिलने के बाद मां उषा देवी व मामा चेन्नई रवाना हो गये हैं. रंजना यहां अपने नाना-नानी के घर ही पली-बढ़ी थी. उसकी मां आंगनबाड़ी सेविका हैं. परिजनों ने रंजना की मौत की जांच की मांग की है. परिजनों का कहना है कि उसकी मौत किस परिस्थिति में हुई है, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए.
संस्थान ने नहीं, पुलिस ने दी जानकारी. रंजना की वृद्ध नानी ने रोते हुए बताया, तीन दिनों से रंजना की उसकी मां से बातचीत नहीं हुई थी. साल का पहला दिन होने के कारण उसे सुबह से ही फोन लगाया जा रहा था. लेकिन उसने नहीं उठाया. इसके बाद छात्रावास के वार्डेन से बात की गयी.
वार्डेन ने कहा कि रंजना सोयी होगी, तो फोन कैसे उठायेगी. जब तीन दिनों से रंजना ने खुद को कमरे में बंद रखा था, तो संस्थान क्या कर रहा था? संस्थान का कोई व्यक्ति या वार्डेन ने उसका हाल क्यों नहीं जाना? ये सारे सवाल संदेह पैदा करते हैं. नानी ने बताया कि रंजना की मौत की सूचना भी संस्थान ने नहीं दी. इसकी जानकारी पुलिस से मिली.
परिजनों की मांग, रंजना की मौत की हो जांच
रंजना के पड़ोसी जन कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष ओम प्रकाश ने बताया, रंजना ने गायत्री शिक्षा निकेतन व डीएवी पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की थी. एनआइटी जमशेदपुर से मेटलर्जी साइंस में बीटेक करने के बाद पिछले एक डेढ़ साल से आइआइटी मद्रास पीएचडी कर रही थी. वह काफी होनहार लड़की थी. उसकी मौत किस परिस्थिति में हुई यह पता लगाते हुए घटना की जांच गहराई से होनी चाहिए.
- सूचना के बाद चेन्नई पहुंचे मां और मामा
- तीन दिनों से बात नहीं हुई थी परिजनों की
- मोबाइल रिसीव नहीं कर रही थी
- परिजनों के अनुसार िकसी तरह का कोई दबाव नहीं था रंजना पर
- शालीन स्वभाव की थी पढ़ने में होनहार थी
परिस्थितियां संदेहास्पद
- प्रबंधन ने यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की कि रंजना आखिर कहां है
- कई बार लगाया गया फोन पर नहीं रिसीव कर रही थी
- पूछने पर वार्डेन ने नहीं दिया ठीक से जवाब, कहा – सो रही है, तो कैसे उठायेगी फोन
- तीन दिन से कमरे में कैद थी, तो संस्थान का कोई व्यक्ति या वार्डेन ने उसका हाल क्यों नहीं जाना
नानी के घर रहती थी रंजना
रंजना आदित्यपुर में अपने नाना-नानी के घर रहती थी. उसकी मां उषा देवी आंगनबाड़ी सेविका हैं. रंजना उषा देवी की अकेली संतान थी. उसके पिता मूल रूप से सिवान (बिहार) के रहनेवाले थे. पर मां-पिता में तलाक के बाद दोनों अलग-अलग रहते हैं. रंजना के नाना टिस्को में कार्यरत थे़
क्या है मामला
आइआइटी मद्रास में पीएचडी कर रही झारखंड की महिला शोधार्थी का शव मंगलवार को उसके छात्रावास के कमरे में मिला था. बताया गया कि उसने कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी. वह धातु विज्ञान विभाग की शोधार्थी थी.
पुलिस की पूछताछ में संस्थान की ही एक छात्रा ने बताया था कि महिला शोधार्थी दो दिन पहले साबरमती होस्टल में अपने कमरे में खुद को बंद कर लिया था.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, उन्हें मंगलवार की शाम को घटना के बारे में संस्थान की ओर से फोन पर सूचना मिली. कमरे से आ रही बदबू से लग रहा है कि यह घटना कुछ दिन पुरानी है. उन्होंने बताया कि जांच चल रही है.
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