जमशेदपुर : राजभवन का नाम ओलचिकि लिपि में लिखे जाने से संताल समुदाय में खुशी
Updated at : 03 Dec 2018 9:40 AM (IST)
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जमशेदपुर : रांची राजभवन के प्रमुख द्वार पर राजभवन का नाम ओलचिकि लिपि में लिखे जाने पर आदिवासी समुदाय में खुशी की लहर है. इससे आदिवासी संताल समुदाय ने सरकार द्वारा अच्छी पहल बताया है. रविवार को करनडीह स्थित इंटरनेशनल संताल काउंसिल कार्यालय में इसे लेकर एक बैठक बुलायी गयी थी. काउंसिल के कार्यकारी अध्यक्ष […]
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जमशेदपुर : रांची राजभवन के प्रमुख द्वार पर राजभवन का नाम ओलचिकि लिपि में लिखे जाने पर आदिवासी समुदाय में खुशी की लहर है. इससे आदिवासी संताल समुदाय ने सरकार द्वारा अच्छी पहल बताया है.
रविवार को करनडीह स्थित इंटरनेशनल संताल काउंसिल कार्यालय में इसे लेकर एक बैठक बुलायी गयी थी. काउंसिल के कार्यकारी अध्यक्ष नरेश मुर्मू ने बताया कि राजभवन के मुख्य द्वार पर ओलचिकि लिपि में राजभवन लिखे जाने से संताल समुदाय का मान सम्मान बढ़ा है. संताल काउंसिल लंबे समय से सरकारी कार्यालय का नाम ओलचिकि लिपि में लिखने को लेकर आंदोलन करता रहा है. आदिवासी संताल समुदाय को भरोसा है कि आने वाले दिनों में सभी जिला व प्रखंड मुख्यालय समेत अन्य सभी सरकारी कार्यालयों का नाम भी ओलचिकि में भी लिखा जायेगा.
इसे लेकर काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री रघुवर दास से भी मुलाकात करेगा. इस खुशी मेें रविवार को काउंसिल की ओर से राहगीरों के बीच लड्डू का वितरण किया गया. इस दौरान संताली भाषा-साहित्य समेत कई ज्वलंत मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया. मौके पर यूएन माझी, नरेश मुर्मू, कुशल हांसदा, बसंती मुर्मू, विरोध हांसदा, महेश मुर्मू समेत अन्य मौजूद थे.
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