असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली में नहीं कर पा रहे आवेदन

Updated at : 27 Aug 2018 6:55 AM (IST)
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असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली में नहीं कर पा रहे आवेदन

जमशेदपुर : कोल्हान विवि से शोध करने वाले उम्मीदवार झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की बहाली के लिए निकली रिक्तियों के आलोक में नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर पद के आवेदन के लिए संबंधित उम्मीदवारों से दो अलग-अलग प्रमाण पत्रों की मांग की जा […]

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जमशेदपुर : कोल्हान विवि से शोध करने वाले उम्मीदवार झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की बहाली के लिए निकली रिक्तियों के आलोक में नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. असिस्टेंट प्रोफेसर पद के आवेदन के लिए संबंधित उम्मीदवारों से दो अलग-अलग प्रमाण पत्रों की मांग की जा रही है. इसके तहत जेआरएफ व नेट की योग्यता से छूट के लिए उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र देना होगा कि उन्होंने 11 जुलाई 2009 से पहले पीएचडी डिग्री की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर ली है.
जबकि वर्ष 2009 के बाद पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों की डिग्री पर अगर यूजीसी रेगुलेशन 2009 के तहत शोध करने का उल्लेख नहीं है तो ऐसे उम्मीदवारों को विवि की समर्थ पदाधिकारी की ओर से निर्गत प्रमाण पत्र देना होगा. इसमें स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख करना होगा कि उन्होंने 2009 की नियमावली के अनुसार शोध कार्य पूर्ण किया है. कोल्हान विवि से शोध करने वाले उम्मीदवार संबंधित प्रमाण पत्र के लिए कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं.
इन्हें संबंधित प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा रहा है. उम्मीदवारों के आवेदन के लिए महज चार दिनों का समय बचा है. लिहाजा विवि से पीएचडी करने वाले छात्र अपने हाथों से यह अवसर निकलता हुआ देख रहे हैं. कोल्हान विवि सेे वर्ष 2018 के अगस्त तक 59 उम्मीदवारों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है.
इन छात्रों को बैरंग लौटाया : कोल्हान विवि के काॅमर्स विभाग से शोध करने वाले डॉ गौरीशंकर व डॉ मितु आहुजा संबंधित प्रमाण पत्र लेने के लिए पिछले पंद्रह दिनों से विवि के चक्कर लगा रहे हैं. इन दोनों उम्मीदवारों को संबंधित प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किये गये हैं. उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने यूजीसी 2009 शोध नियमावली के आधार पर अपना शोध कार्य पूरा किया. बावजूद इसके विवि प्रमाण पत्र निर्गत नहीं कर रहा है.
विवि का तर्क नहीं उतर रहा विद्यार्थियों के गले : विवि की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि वर्ष 2012 और इससे पहले किये गये शोध पंजीकरण तत्कालीन रांची विवि के शोध नियमावली के आधार पर किये गये. कोल्हान विवि ने 24 मार्च 2009 को रांची विवि की ओर से पारित अधिसूचना के आधार पर शोध नियमावली को स्वीकार किया. रांची विवि ने 11 जुलाई 2009 की यूजीसी की नियमावली को स्वीकार नहीं किया था. लिहाजा कोल्हान विवि संबंधित प्रमाण पत्र निर्गत नहीं कर सकता.
विद्यार्थियों का तर्क है कि जब उन्होंने वर्ष 2009 के बाद शोध पंजीकरण कराया. विभाग व विवि की ओर से संचालित सभी प्रक्रियाओं का पालन किया. लिहाजा विवि छात्रों के भविष्य के साथ इतना बड़ा मजाक कैसे कर सकता है. विवि की तरफ से दावा किया जा रहा है कि संबंधित विज्ञापन में वर्ष 2009 के यूजीसी रेगुलेशन के आधार पर शोध नहीं करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी विकल्प दिया गया है. विवि उसके सापेक्ष प्रमाण पत्र निर्गत कर रहा है. उम्मीदवारों का कहना है कि विज्ञापन में ऐसा कोई विकल्प मौजूद नहीं है.
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