पाक टीम ने पढ़ी थी धातकीडीह मस्जिद में नमाज

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जमशेदपुर : धातकीडीह की जामा मसजिद नगर की मस्जिदाें में सबसे खूबसूरत – आकर्षक होने के साथ – साथ पूरी तरह व्यवस्थित भी है. 1975 में मस्जिद की संग-ए-बुनियाद रखी गयी. इसके बाद में मस्जिद के विस्तार और नव निर्माण में टाटा स्टील के वरीय पदाधिकारी मरहूम डॉ महमूद खान एवं मरहूम वली इमाम की […]

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जमशेदपुर : धातकीडीह की जामा मसजिद नगर की मस्जिदाें में सबसे खूबसूरत – आकर्षक होने के साथ – साथ पूरी तरह व्यवस्थित भी है. 1975 में मस्जिद की संग-ए-बुनियाद रखी गयी.

इसके बाद में मस्जिद के विस्तार और नव निर्माण में टाटा स्टील के वरीय पदाधिकारी मरहूम डॉ महमूद खान एवं मरहूम वली इमाम की भूमिका खास तौर से काबिल जिक्र है. मस्जिद में हौज नुमा वजूखाना है, जहां 50 से अधिक लोग एक साथ वजू कर सकते हैं. मस्जिद के काफी वसी (विसाल) होने की कारण यहां दूर तक नमाजियों को खुतबा-तकबीर की आवाज सुनायी दे, इसके लिए आधुनिक तर्ज का माइक सेट लगाया गया है. मस्जिद के निचले और ऊपरी तल्ले मेेें कुल 37 सफें (पंक्तियां) हैं.
एक सफ में कुल 95-100 व्यक्ति नमाज अदा करते हैंं. जुमा के दिन चार हजार से अधिक लोग एक साथ नमाज पढ़ते हैं. रमजान के दिनों में प्रत्येक वक्त 800-1000 लोग पंजगणा नमाज अदा करते हैं. मस्जिद के रख–रखाव और प्रबंध समिति में कुल 16 लोग शामिल हैं, जो आपस में मिल बैठकर नमाजियों की सुविधा और इंतेजामात को देखते हैं. कीनन स्टेडियम में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में भाग लेने आये पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने भी इस मस्जिद में नमाज अदा की थी. इस लिहाज से जमशेदपुर के इतिहास में इस मास्जिद का नाम जुड़ गया है. हाफिज उमर अर्शा तक मस्जिद की इमामत कर चुके हैं.
अल्लाह को पसंद है माफ करना
हजरत ए अायशा रअ. ने रवायत फरमाती है कि पैगंबर मोहम्मद सअ ने इरशाद फरमाया वह स्वयं रात बेदारी कर पूरी रात इबादत फरमाते हैं. यह बरकतों और रहमतों का महीना है, इसलिए जितनी इबादतें की जायें, उनकी बरकतों से फैज उठाना चाहिए. रमजान की आखरी दस रातों में सात रातों को तलाशने का हुक्म है. शब-ए-कद्र की रात हजरत जिबरइल अस. जमीन पर तशरीफ लाते हैं और जो बंदे शब-ए-कद्र की रात बैठे या खड़े होकर अल्लाह का जिक्र कर रहे होते हैं. अल्लाह उन्हें उनकी गुनाहों को माफ फरमा देता है, क्योंकि अल्लाह को माफ करना बहुत पसंद है.
मौलाना आमीरूल हसन कासमी, खतीब व पेश-ए-इमाम, धातकीडीह मस्जिद
350 बच्चों को मसजिद में इस्लामी शिक्षा दी जा रही है
धातकीडीह जामा मस्जिद में अलजमाएतुल इस्लामिया नाम से एक दिनी मरकज, जिसको मदरसा भी कह सकते हैं, 2010 से संचालित किया जा रहा है. मस्जिद प्रांगण में आठ आलिम इन बच्चों को इस्लाम की बुनियादी शिक्षा देते हैं. यह बच्चे अधिकतर अंग्रेजी स्कूलों के छात्र हैं, जहां आरबी और उर्दू की पढ़ाई नहीं होती. इन बच्चों को धातकीडीह जामा मसजिद में कुरआन, नमाज और इस्लामी शिक्षा देकर प्रशिक्षित किया जा रहा है. यहां धातकीडीह एम-2, शास्त्रीनगर, कदमा, बिष्टुपुर, साकची और आशियाना गार्डेन मानगो तक के छात्र प्रत्येक दिन सुविधानुसार दीनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. मस्जिद प्रांगण में खूबसूरत घास लगायी गयी है. इसकी विशेष देखभाल की जाती है. मस्जिद सफेद मिनारों और दो मंजिला इमारतों से दूर से ही पहचानी जाती है. शहर की आकर्षक और व्यवस्थित बड़ी मस्जिदों में इसे माना जाता है. रमजान के दाैरान प्रत्येक दिन सामूहिक इफ्तार का इंतेजाम भी किया जाता है.
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