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हजारीबाग जिले के 1485 स्कूलों ने नहीं दिया 26 करोड़ का हिसाब, यही रवैया रहा तो अगले वर्ष की जा सकती है बजट में कटौती

By Prabhat Khabar Print Desk
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हजारीबाग जिले के 1485 स्कूलों ने नहीं दिया 26 करोड़ का हिसाब
हजारीबाग जिले के 1485 स्कूलों ने नहीं दिया 26 करोड़ का हिसाब
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Jharkhand News, Hazaribagh News हजारीबाग : जिले के 1485 सरकारी स्कूलों (कक्षा एक से आठ तक) ने पिछले चार वित्तीय वर्ष से झारखंड शिक्षा परियोजना कार्यालय हजारीबाग को 26 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दिया है. इसको लेकर परियोजना कार्यालय ने 25 मार्च तक खर्च की गयी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र देने को कहा है. वहीं, उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं करनेवालों से राशि वापस करने को कहा गया है, नहीं तो स्कूल प्रबंधन समिति व जिम्मेदार शिक्षकों पर कार्रवाई की जायेगी.

वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 एवं 2019-20 का हिसाब 1485 स्कूलों ने अब तक नहीं दिया है. झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से विद्यालय विकास अनुदान, छात्र-छात्राओं को दो सेट पोशाक, विद्यालय किट, विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्यों का प्रशिक्षण एवं विद्यालय से बाहर रह गये बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षण आदि के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति के खाते में समय-समय पर राशि भेजी गयी है. इसके अलावा 2015-16 व 2016-17 में बेंच-डेस्क मद में राशि उपलब्ध करायी गयी है.

शिविर लगा मांगा जा रहा है उपयोगिता प्रमाण पत्र :

उपयोगिता प्रमाण पत्र व राशि की वसूली के लिए शिक्षा परियोजना कार्यालय की ओर से कैंप लगाया जा रहा है. 20 मार्च को केरेडारी प्रखंड के लिए डायट परिसर में कैंप लगेगा. इसी कैंपस में टाटीझरिया प्रखंड के लिए 21 मार्च, पदमा प्रखंड के लिए 22 मार्च, चलकुसा प्रखंड के लिए 23 मार्च, कटकमदाग प्रखंड के लिए 24 मार्च एवं सदर प्रखंड के लिए 25 मार्च को कैंप लगेगा. इससे पहले चौपारण, इचाक, विष्णुगढ़, कटकमसांडी, बरकट्ठा, दारु, डाडी, चुरचू, बड़कागांव एवं बरही प्रखंड के लिए कैंप लग चुका है.

समायोजन में हो रही है देरी इस संबंध में कटकमसांडी की फुटरा पंचायत के धरधरा मवि के सचिव संजय चंद ने कहा कि परियोजना कार्यालय को समय-समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाता है, लेकिन कार्यालय की ओर से उसका समायोजन करने में देरी की जाती है. उन्होंने 28 हजार रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं जमा किया है. यह बैंक के ब्याज की राशि है.

1485 स्कूलों ने 26 करोड़ रुपये का हिसाब अब तक नहीं दिया है. प्रथम दृष्ट्या यह वित्तीय अनियमितता का मामला लगता है. स्कूल प्रबंधन समिति व शिक्षकों से 25 मार्च तक खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा गया है. वहीं, जहां राशि खर्च नहीं हुई है, उस स्कूल को राशि लौटाने को कहा गया है. ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद रांची के वरीय अधिकारियों से सलाह ली जा रही है. अगर इसी तरह का रवैया रहा, तो अगले वित्तीय वर्ष में स्कूल बजट में कटौती की जायेगी.

मिथिलेश कुमार सिन्हा, डीइओ सह परियोजना डीपीओ

Posted By : Sameer Oraon

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