जहां जंगल का घनत्व कम है, वहीं वनरोपण करें

Published at :14 Feb 2017 2:04 AM (IST)
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जहां जंगल का घनत्व कम है, वहीं वनरोपण करें

सीएफ व एसीएफ ने दारू वन प्रक्षेत्र की जांच की हजारीबाग : हजारीबाग जिले के दारू वन प्रक्षेत्र में 50 हेक्टेयर हरे-भरे वन में अवकृष्ट वनरोपण परियोजना की जांच पीसीसीएफ बी हेंब्रोम ने की. आरसीसीएफ हजारीबाग संजीव कुमार और सीएफ संजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर एसीएफ प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सोमवार को स्थल जांच […]

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सीएफ व एसीएफ ने दारू वन प्रक्षेत्र की जांच की
हजारीबाग : हजारीबाग जिले के दारू वन प्रक्षेत्र में 50 हेक्टेयर हरे-भरे वन में अवकृष्ट वनरोपण परियोजना की जांच पीसीसीएफ बी हेंब्रोम ने की. आरसीसीएफ हजारीबाग संजीव कुमार और सीएफ संजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर एसीएफ प्रमोद कुमार अग्रवाल ने सोमवार को स्थल जांच किया. दारू प्रक्षेत्र के रेंजर व वनपाल से योजना की जानकारी ली. ग्रामीणों से बातचीत की. एसीएफ प्रमोद कुमार अग्रवाल ने दारू वन प्रक्षेत्र के पिपचो गांव में गोधिया, अंजनिया, मदनवागढ़ा और तिलकागढ़ा जंगल में अवकृष्ट वनरोपण योजना जंगल के खाली जमीन पर करने को कहा. कोई पेड़ अब नहीं काटने, पेड़ की छटनी पर भी रोक लगा दिया.
सिर्फ बीट खुदाई करने को कहा. एसीएफ ने वहां नये बने नर्सरी स्थल पर कई अनियमितता पायी. हरे-भरे बली को गाड़ कर मचान बनाया गया था. इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए तत्काल इसे हटाने को कहा. वन विभाग के प्रावधान के अनुसार मचान बनाने का निर्देश दिया. ग्रामीण नंदकिशोर प्रसाद, बसंत राणा ने कहा कि यह जंगल बड़े-बड़े पेड़- पौधों से हरा भरा था. जिसे वन विभाग ने पेड़ लगाने के लिए काट दिया.
बताया कि सरकार की योजना के तहत मोरब्बा में वनरोपण बड़े पैमाने पर हुआ था. इसके उत्पादन से बिरहोर लोग रस्सी बना कर अपनी जीविकोपार्जन करते थे. लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने योजना के नाम पर मोरब्बा की खेती को भी नष्ट कर दिया. कुल मोरब्बा खेती का 50 प्रतिशत भाग भी अब सुरक्षित नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि जंगल खाली जमीन पर लगाने के बजाय कई हरे-भरे पेड़ों को भी काटा गया है. एसीएफ प्रमोद कुमार अग्रवाल ने बताया कि दारू वन प्रक्षेत्र में अवकृष्ट वनरोपण योजना के तहत विभाग ने यहां काम किया है.
अवकृष्ट वनरोपण में साल, सागवान एवं अन्य पेड़ जो खराब हो जाते हैं, इसका खूटी वहां रहता है. उसे हटाया गया है. एक पेड़ में आठ-10 टहनी निकल जाते हैं. उसकी छंटाई होती है. खूटी को निकालने के लिए उसे जलाया जाता है. छोटी-छोटी झाड़ियाें को हटाया जाता है. यह कार्रवाई हुई है. जो पेड़-पौधे छांटे गये वह ग्रामीणों को दे दिया गया. एसीएफ ने यह भी बताया कि गांव वाले दो-चार छोटे पेड़ काट लिये होंगे, लेकिन विभाग द्वारा बड़े पेड़ काटने का कोई प्रमाण नहीं मिला.
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