बच्चियों को कच्ची रोटी व एक्सपायरी डेट की दी घी

Published at :29 Sep 2016 7:34 AM (IST)
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बच्चियों को कच्ची रोटी व एक्सपायरी डेट की दी घी

हजारीबाग : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बड़कागांव का बुधवार को औचक निरीक्षण प्रशिक्षु आइएएस रामनिवास यादव के नेतृत्व में किया गया. टीम में बड़कागांव बीडीओ अलका कुमारी, मजिस्ट्रेट मधुमिता कुमारी शामिल थे. निरीक्षण के दौरान विद्यालय में काफी अनियमतता पायी गयी. निरीक्षण में पाया गया कि बच्चों को मेनू के अनुसार खाना नहीं मिलता […]

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हजारीबाग : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, बड़कागांव का बुधवार को औचक निरीक्षण प्रशिक्षु आइएएस रामनिवास यादव के नेतृत्व में किया गया. टीम में बड़कागांव बीडीओ अलका कुमारी, मजिस्ट्रेट मधुमिता कुमारी शामिल थे. निरीक्षण के दौरान विद्यालय में काफी अनियमतता पायी गयी. निरीक्षण में पाया गया कि बच्चों को मेनू के अनुसार खाना नहीं मिलता है. नाश्ते में बच्चों को जली व कच्ची रोटी परोसे जाते हैं. वहीं भंडार कक्ष में एक्सपायर डेट की रखी गयी थी, जिसे बच्चों को सेवन करने के लिए दिया जाता था. करीब नौ घंटे तक निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षु आइएएस की टीम ने कई फाइलों को खंगाला. यहां यह भी देखा गया कि विद्यालय के बच्चों से खाना बनवाया जाता था.
स्टॉक रजिस्टर अधूरा
निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षु आइएएस ने विद्यालय के स्टॉक रजिस्टर की जांच की. जांच में पाया कि तीसरे स्टॉक रजिस्टर सितंबर माह में भी भरा नहीं गया था. इसके अलावा अन्य स्टॉक रजिस्टर 22 सितंबर से मेंटेन नहीं था. यह जानकारी नहीं मिल पा रही थी खाद्यान का कितना सामान बचा हुआ है.
छात्रा की शिकायत
कक्षा छह की उमा कुमारी ने कहा कि शाम में स्कूल में नास्ता नहीं मिलता है. कभी-कभी भुंजा-चूड़ा दिया जाता है. 15 दिन पहले पनीर मिला था. कपड़ा धोने के लिए मात्र एक साबुन स्कूल से मिला था. ब्रस साल में एक बार मिलता है.
वार्डेन ने दी सफाई
वार्डेन संघमित्रा कुमारी ने कहा कि स्कूल में मेनू के अनुसार बच्चों को खाना दिया जाता है. सभी बच्चियां एक ही खाना खाकर बोर हो जाती हैं, इसलिए कभी-कभी मेनू से हट कर उन्हें खाना दिये जाते हैं.
मेनू के अनुसार खाना नहीं
विद्यालय में 351 बच्चियों का नामांकन है. 28 सितंबर को निरीक्षण के दौरान 340 बच्चे उपस्थित थे. बच्चों को खाने के लिए विद्यालय ने अलग-अलग दिन व समय के अनुसार मेनू तैयार किया है. बुधवार को नास्ते में पुड़ी, छोला और केला. दोपहर में चावल, अंडाकरी, साग और सलाद तथा शाम में बिल्लू चौप और समोसा, रात में चावल, रोटी, दाल, सब्जी, दूध और हॉर्लिक्स देना है.
लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि बच्चों को कच्ची व जली हुई रोटी व पानीदार सब्जी दी गयी. दोपहर में चावल, पतली दाल और अंडाकरी के स्थान पर उबले हुए अंडे दिये गये. निरीक्षण में पाया गया कि प्रत्येक दिन 11 किलो चावल, 13 किलो आटा व पांच किलो दाल कम बनाये जा रहे थे. प्रत्येक बच्चों को ढाई सौ एमएल कम दूध दिये जाते हैं.
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