लीड ़ कोयला के भंडार में रोजगार का अभाव

Published at :13 Oct 2015 7:25 PM (IST)
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लीड ़ कोयला के भंडार में रोजगार का अभाव

लीड ़ कोयला के भंडार में रोजगार का अभाव बहेरा पंचायत की रिपोर्ट 13हैज60 में- बहेरा पंचायत की जर्जर सड़क पंचायत वाचचरही. 32 वर्ष बाद 2010 में जब पंचायत चुनाव हुआ था, तो ग्रामीणोें में गांवों के चहुंमुखी विकास की उम्मीद जगी थी. चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों की इस उम्मीद पर पंचायत प्रतिनिधि कितना […]

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लीड ़ कोयला के भंडार में रोजगार का अभाव बहेरा पंचायत की रिपोर्ट 13हैज60 में- बहेरा पंचायत की जर्जर सड़क पंचायत वाचचरही. 32 वर्ष बाद 2010 में जब पंचायत चुनाव हुआ था, तो ग्रामीणोें में गांवों के चहुंमुखी विकास की उम्मीद जगी थी. चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों की इस उम्मीद पर पंचायत प्रतिनिधि कितना खरा उतरे इो लेकर प्रभात खबर ने अभियान शुरू किया है. बहेरा पंचायतकुल मतदाता 4941महिला 2318पुरुष 2633चरही. वर्ष 2010 में पंंचायत चुनाव हुआ. इन पांच वर्षों में पंचायत की स्थिति थोड़ी बदली, पर जनता के अनुरूप काम नहीं हुआ. हकीकत यह भी है कि पांच वर्षों में बहेरा पंचायत अंतर्गत सीसीएल तापिन साउथ परियोजना में लोकल सेल नहीं खुल पाया. बहेरा कोल डंप यार्ड कई सालों से बंद पड़ा है. पहले मजदूरों को अपने पंचायत में ही रोजगार मिल जाता था. आसपास के गांवों के सैकड़ों मजदूर लाभांवित होते थे. 20-25 वर्ष पूर्व सीसीएल तापिन साउथ में जो रौनक थी अब वह नहीं रही. लोकल सेल नहीं खुलने के कारण मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. रोजगार की खोज में मजदूर दूसरे राज्य पलायन कर रहे हैं. वर्तमान में मजदूरों में उत्साह नहीं है. लोकल सेल के खुलने से हजारों बहेरा व आसपास के मजदूर लाभांवित होते. बहेरा पंचायत आज भी मुलभूत सुविधा से वंचित है. बहेरा का मुख्य रोड पूर्ण रूप से जर्जर हो गया है. रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं. बरसात में यह रोड तालाब में बदल जाता है. तापिन साउथ का क्वार्टर पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है. इस ओर सीसीएल प्रबंधन का कोई ध्यान नहीं है. मजदूरों के क्वार्टर से पानी का रिसाव होता है. छत उखड़-उखड़ कर गिर रहा है. इसके जिम्मेवार जीएम कार्यालय के बड़े अधिकारी हैं. बहेरा व फुसरी पुल भी जर्जर हो चुका है. बहेरा, कजरी, भुरकुंडा, पीपरा, करीमगंज, मयुरनचवा गांव में ग्रामीणों के उम्मीद के अनुसार विकास नहीं हुआ. सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है.1993 में सीसीएल ने फुसरी गांव के सभी जमीन का अधिग्रहण किया. 1996 में सीसीएल ने फुसरी के रैयतों को जमीन का प्रति डिसमील 10 से 70 रुपये करके मुआवजा दिया. गांव के 96 प्रतिशत ग्रामीण भूमिहीन व रोजगार विहीन हैं. फुसरी गांव को प्रखंडों की ओर से कोई सुविधा नहीं मिलती है. सीएसआर के तहत सीसीएल को प्रभावित गांवों में पर्यावरण रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य रक्षा, ग्रामीण जनता की रक्षा, संस्कृति बढ़ावा, सड़क, बिजली, पानी एवं अन्य विकास कार्य धरातल पर नहीं उतरा. फुसरी सामुदायिक भवन का निर्माण वन विभाग से एसओसी नहीं मिलने के कारण अधूरा है.13हैज62 में- बहेरा मुखिया बबली पीटर होरो पांच वर्ष मैंने विकास का कार्य किया : बबली पीटर होरो बहेरा मुखिया बबली पीटर होरो ने कहा कि पांच वर्षों में सरकार ने जो अधिकार दिया उसके मुताबिक मैंने पांच वर्षों में विकास कार्य किया. पांच वर्ष के कार्यकाल में सबको साथ लेकर चला. हर वर्ग के लोगों को सम्मान दृष्टि से देखा. मनरेगा से कुंआं, रोड, तालाब, समतलीकरण, पीसीसी पथ, चापानल, नाली, विवाह घर, सामुदायिक भवन व 13वें वित से कई विकास कार्य किये. लोगों को विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन से जोड़ा. लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया. 13हैज 63 में- दूसरे स्थान पर रहे लालो मांझी पांच वर्ष में बहेरा का कुछ भी विकास नहीं हुआ : लालो मांझी पिछले पंचायत चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे लालो मांझी ने कहा कि पांच वर्ष निष्क्रिय शासन काल रहा. बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए कोई खास पहल नहीं की गई. वंचित विधवा, वृद्धापेंशन लोगों को नहीं मिल पाया. मुखिया लोगों के विश्वास पर खरा उतर नहीं सके. बहेरा पंचायत में रोजगार का कोई विकल्प नहीं खुला. शिक्षित बेरोजगार बेकार पड़े रहे. उनके लिए कोई पहल नहीं की गयी. यादों में फोटो : 13 हैज 61,पुर्व मुखिया बीगन महतो आज के चुनाव में पैसे वालों की पूछ बहेरा पंचायत के 66 वर्षीय पूर्व मुखिया बीगन महतो ने बताया कि पहले के चुनाव और अभी के चुनाव में काफी अंतर है. उस समय पैसा का माहौल नहीं था आज के चुनाव में पैसे वालों की पूछ होती है. आज जनता व मतदाता उम्मीदवारों के व्यक्तित्व व सामाजिक प्रतिष्ठा को देख कर मतदान करते हैं. 1978 में मुखिया और सरपंच की कुछ अलग ही पहचान थी. वर्तमान समय में जनता मुखिया व सरपंच की बातों को ज्यादा अहमियत नहीं देते. पहले के चुनाव में नाम मात्र पैसा खर्चा होता था. वर्तमान चुनाव में सिर्फ पैसे का ही खेला है. कैसा हो प्रतिनिधि 13 हैज 64,देवकी महतो 13 हैज 65 ,गणेश टुडू 13 हैज 66,सुरेश मुर्मू हैज 67 ,देवलाल महतो 13 हैज 68 , सुशीला देवी13 हैज 69,संतोष राय प्रतिनिधि शिक्षित व ईमानदार होचरही. बहेरा पंचायत के देवकी महतो ने कहा कि आने वाले पंचायत में पंचायत का चहुंमुखी विकास करने वाला प्रतिनिधि चुन कर सामने आये. पंचायत के अधूरे कार्यों को पूरा करने वाला ही चुनाव जीते़ गणेश टुडू ने कहा कि सबको सम्मान दृष्टि से देखने वाला हो. बहेरा पंचायत में सिंचाई की कोई व्यव्स्था नहीं है. इस समस्या को दूर करने वाला हो. सुरेश मुर्मू ने कहा कि प्रतिनिधि शिक्षित व ईमानदार हो, तााकि समाज का विकास हो सके़ देवलाल महतो ने कहा कि विकास कार्य धरातल पर उतार कर काम करने वाला हो. बरोजगारों को रोजगार से जोड़ने वाला हो. संतोष राय ने कहा कि नि:स्वार्थ भाव से समाज के प्रति काम करने वाला प्रतिनिधि ही सामने आये.

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