जतरा मेला . हत्यारी गांव में मांदर की थाप पर थिरकते रहे पांव

Updated at : 25 Oct 2018 12:38 AM (IST)
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जतरा मेला . हत्यारी गांव में मांदर की थाप पर थिरकते रहे पांव

हजारीबाग : हत्यारी गांव में बुधवार को आदिवासी जतरा मेला की धूम रही. यहां झारखंडी परंपरा की झलक देखी गयी. पारंपरिक नृत्य एवं गीतों से समां सुहाना हो गया. छोटनागपुर के लोकप्रिय गायक पद्मश्री मुकुंद नायक ने अपने सुरीली आवाज से नागपुरी एवं संताली में गीत प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने गीतों […]

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हजारीबाग : हत्यारी गांव में बुधवार को आदिवासी जतरा मेला की धूम रही. यहां झारखंडी परंपरा की झलक देखी गयी. पारंपरिक नृत्य एवं गीतों से समां सुहाना हो गया. छोटनागपुर के लोकप्रिय गायक पद्मश्री मुकुंद नायक ने अपने सुरीली आवाज से नागपुरी एवं संताली में गीत प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
उन्होंने गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारा व आदिवासी संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया. कार्यक्रम के पूर्व मुख्य अतिथि प्रदीप प्रसाद ने मेला के आयोजक सरना समिति के सदस्य एवं पाहनों के साथ भगवान बिरसा के चित्र पर माल्यार्पण किया. उसके बाद सरना स्थल पूजा की गयी.
मेले में विभिन्न प्रखंडों एवं गांवों के अखाड़ों से आये महिला-पुरुष कलाकारों ने ग्रुप बना कर मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किये. सभी पारंपरिक पोशाक में सजे थे. पद्मश्री मुकुंद नायक की गीत तोर मोर प्यार कभी न भुलाबे गोरी.. आइज सपना कहलाये बिरसा दादा..पर लोग खूब झूमे. मशहूर गायक पंकज राय ने भी गीतों से समां बांधा.
मेला में शामिल सांस्कृतिक टीम
आदिवासी जतरा मेला में मांझी टोला के भोला टुडू, विनय टुडू, संजना टुडू, अनीता टुडू, दीपा टोला के अंजु तिर्की, पूनम लकड़ा, उर्मिला कुजूर, बुंदी देवी, महेश, अंगद, तुर्का टोला के विमल तिर्की, मीना तिर्की, ललिता कच्छप, महुआ टोला बबीता किस्पोटा, ललिता लिंडा ने ढोल, नगाड़ा एवं मांदर के साथ नागपुरी नृत्य एवं गीत प्रस्तुत किया. मेला को सफल बनाने में जीतेंद्र लकड़ा, नरेंद्र कुजूर, महेश कच्छप, प्रवेश हंसदा, जसवंत कुजूर, मुकेश लिंडा, दीपक लकड़ा, संदीप लकड़ा, मंजीर मिंज आदि शामिल थे.
संस्कृति को बचाना जरूरी: मुकुंद नायक
मुकुंद नायक ने कहा कि जतरा मेला के आयोजन से आदिवासियों में उनकी संस्कृति, भाषा एवं वेशभूषा की झलक मिलती है. उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति को भी बचाना जरूरी है. समाजसेवी प्रदीप प्रसाद ने कहा कि आदिवासी युवा अपनी संस्कृति एवं भाषा को संरक्षित करते हुए देश और समाज को आगे बढ़ाने में योगदान दें.
मौके पर पाहन महेश कुजूर, अध्यक्ष रवि कच्छप, सचिव सोनू तिर्की, कोषाध्यक्ष समीर तिर्की, संचालन रवि लकड़ा, केंद्रीय सरना समिति के बंधन टोप्पो, जिप सदस्य विजय सिंह भोक्ता, कौलेश्वर रजक, नुनूलाल भुहयां, पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष जवाहरलाल सिन्हा, शैलेंद्र यादव, प्रकाश यादव, अनीता देवी, प्रदीप सिंह, अविनाश यादव समेत कई लोग शामिल थे.
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