महंगाई पर आस्था भारी
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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इस बार मां सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा लुभायेगी एक हजार से अधिक स्थानों पर होती है पूजा सरस्वती पूजा में दो दिनों तक माहौल रहता है भक्तिपूर्ण गुमला : आदिवासी बहुल जिले में मां सरस्वती पूजा मनाने की प्राचीन परंपरा है. पहले घरों में चित्र व प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती थी. परंतु समय के […]
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इस बार मां सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा लुभायेगी
एक हजार से अधिक स्थानों पर होती है पूजा
सरस्वती पूजा में दो दिनों तक माहौल रहता है भक्तिपूर्ण
गुमला : आदिवासी बहुल जिले में मां सरस्वती पूजा मनाने की प्राचीन परंपरा है. पहले घरों में चित्र व प्रतिमा स्थापित कर पूजा होती थी. परंतु समय के साथ सरस्वती पूजा करने की परंपरा भी बदली है. अब जगह-जगह पर प्रतिमा स्थापित कर भव्य रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है.
दो दिनों तक माहौल भक्तिमय रहता है. हालांकि समय के साथ मां सरस्वती, गणोश व लक्ष्मी मां की प्रतिमा के दाम बढ़े हैं. महंगाई के कारण ऐसा हुआ है. महंगाई के बावजूद लोगों व खास कर बच्चों में आस्था कम नहीं हुई है. पहले सीमित स्थानों पर पूजा होती थी. अभी जिले के सभी 12 प्रखंडों में एक हजार से अधिकक स्थानों पर प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है. गुमला शहरी क्षेत्र में दो सौ से अधिक स्थानों पर पूजा की धूम रहती है.
24 जनवरी को पूजा है. इसे देखते हुए तैयारी चल रही है. खास कर बच्चे उत्साहित हैं. सभी अपने स्तर से पूजा पंडाल बनाने में लगे हुए हैं. वहीं कलाकार मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं. स्कूलों में प्रतिमा स्थापित कर मां सरस्वती की पूजा भव्य रूप से की जाती है.
मुख्य आकर्षण पालकोट प्रखंड में रहता है. पंपापुर गुफा में पूजा की जाता है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र, रायडीह, चैनपुर, डुमरी, अलबर्ट एक्का जारी, घाघरा, विशुनपुर, भरनो, सिसई, कामडारा, बसिया व पालकोट प्रखंड में सरस्वती पूजा को लेकर उल्लास है. छोटानागपुरिया तेली उत्थान समाज के छात्रवास में सरस्वती पूजा के अवसर पर कई कार्यक्रम होंगे. मौके पर बच्चों के लिए डांस, कुरसी रेस, भंडाफोड़, बिस्किट रेस व क्विज का आयोजन किया गया है.
पूर्वजों के समय से प्रतिमा बना रहे हैं
कलाकार राजकुमार प्रजापति कई पीढ़ियों से प्रतिमा बना रहा है. उसने कहा कि आज भी गुमला के कई स्थानों पर उनके द्वारा बनायी गयी प्रतिमा की पूजा होती है. पहले उसके पिता महावीर प्रजापति प्रतिमा बनाते थे. अब पिता के स्थान पर वह प्रतिमा बना रहा है. सहयोग में मुकेश प्रजापति, नितेश प्रजापति व अनिल प्रजापति है.
पहले पांच से 50 रुपये लगता था प्रतिमा का दाम
समय के साथ प्रतिमा का दाम बढ़ा है. पहले पांच से 50 रुपये तक प्रतिमा का दाम लगता था. परंतु इस महंगाई में मिट्टी के भी दाम लगने लगे हैं. अन्य सामानों के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है. आज एक प्रतिमा की कीमत दो सौ से पांच हजार रुपये तक है. दाम अधिक होने के बाद भी प्रतिमा की खूब बिक्री होती है.
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