मिट्टी के दीये लो बाबू, मेरे घर भी दिवाली है

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Oct 2019 12:41 AM

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गुमला : दीपावली का त्योहार है. अपने दीयों से हमारे घरों को रोशन करने वाले कुम्हारों की. उन बच्चों के चेहरे पर खुशी लाने की, जो पूरे एक साल तक मिट्टी के खिलौने का इंतजार करते हैं. हमारी दीपावली की रात इन्हीं कुम्हारों द्वारा बनाये गये मिट्टी के दीयों से रोशन होते हैं. तो क्यों […]

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गुमला : दीपावली का त्योहार है. अपने दीयों से हमारे घरों को रोशन करने वाले कुम्हारों की. उन बच्चों के चेहरे पर खुशी लाने की, जो पूरे एक साल तक मिट्टी के खिलौने का इंतजार करते हैं. हमारी दीपावली की रात इन्हीं कुम्हारों द्वारा बनाये गये मिट्टी के दीयों से रोशन होते हैं. तो क्यों नहीं इस दीपावली पर्व पर भी हम कुम्हारों की मेहनत को सलाम करते हुए उनके द्वारा मिट्टी से बनायी गयी सामग्री का उपयोग करें.

एक कुम्हार की व्यथा यह है. मेरी मेहनत को खरीदो लोगों, क्योंकि हमारे घर भी दीपावली है. अगर हम कुछ सालों में मनाये गये दीपावली पर्व पर गौर करें, तो लाइटिंग वाले चाइनीज सामान के आगे मिट्टी के दीये की डिमांड साल-दर-साल घटती जा रही है.

हिंदू धर्मावलंबी दीपावली व छठ जैसे पर्व में जहां अधिकतर लोग मिट्टी के दीया का उपयोग करते थे, वहीं अब मिट्टी के दीया के आगे लोगों का क्रेज चाइनिज सामान के प्रति ज्यादा बढ़ रहा है. इससे न केवल लोगों में स्वदेशी दीया के प्रति क्रेज घट रहा है, बल्कि मिट्टी की सामग्री बनाने वाले कुम्हारों के साल भर के व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. चार-पांच साल पूर्व एक कुम्हार परिवार 40 से 50 हजार रुपये तक का दीया बनाता था.
उस समय मिट्टी के दीया की डिमांड ज्यादा थी. जिस कारण उतने दीया भी बाजार में कम पड़ जाते थे. परंतु वर्तमान में चाइनीज वाले लाइटिंग आइटम के प्रति लोगों में बढ़ते क्रेज और दीया की कम खरीदारी को देखते हुए एक कुम्हार परिवार महज 10 से 15 हजार रुपये तक का ही दीया बना रहा है. वहीं मिट्टी से बने सामान की बात करें, तो पहले की अपेक्षा वर्तमान में इनकी कीमत में भी इजाफा हुआ है.
इजाफा इसलिए हुआ कि पूर्व में कुम्हारों को मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाता था, जिसका मूल्य कुम्हारों को देय नहीं होता था. परंतु अब कुम्हारों को मिट्टी की सामग्री बनाने के लिए मिट्टी खरीदनी पड़ती है. जो प्रति ट्रैक्टर 700 रुपये से एक हजार रुपये तक में मिलती है.
बाजार में उपलब्ध मिट्टी की सामग्री और कीमत : बाजार में मिट्टी से बने दीया, खिलौने सहित अन्य पूजन सामग्री उपलब्ध है. दीया 20 रुपये दर्जन बिक रहा है. खिलौने पांच से 20 रुपये है. ग्वालिन साइज के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक के हैं. चूक्का साइज के हिसाब से 10 से 20 रुपये प्रति पीस बिक रहा है. वहीं दीया तीन साइज का बाजार में बिक रहा है.
छोटा दीया 100 रुपये सैकड़ा, मिडियम दीया 120 रुपये व बड़ा दीया 150 रुपये सैकड़ा बिक रहा है. इसी प्रकार खिलौनों में शेर, घोड़ा व हाथी आदि 10 से 20 रुपये प्रति पीस, मिट्टी के अन्य खिलौने पांच रुपये प्रति पीस, पूजा में उपयोग होने वाले चूक्का व धूप-धुपन सहित अन्य सामग्री 10 से 30 रुपये प्रति पीस, छोटा ग्वालिन 30 से 40 और बड़ा ग्वालिन 50 से 80 रुपये प्रति पीस की दर से बिक रहा है. गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति 50 से 1100 रुपये प्रति पीस, प्लास्टिक माला 10 से 200 रुपये व कलश 10 से 30 रुपये बिक रहा है.
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