शहीदों ने अपने खून से कलीसिया को सींचा है : बिशप
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Sep 2019 9:33 PM
जगरनाथ, गुमला गुमला धर्मप्रांत स्थित करौंदाबेड़ा पल्ली के शहीद स्वर्गीय फादर लौरेंस कुजूर, स्वर्गीय फादर जोसेफ कंडुलना व स्वर्गीय ब्रदर अमर अनूप इंदवार के शहादत के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को करौंदाबेड़ा के निर्मला सेवा आश्रम में शहीद रजत जयंती समारोह मनाया गया. समारोह में गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा, हजारीबाग, राउरकेला, लोहरदगा जिला […]
जगरनाथ, गुमला
गुमला धर्मप्रांत स्थित करौंदाबेड़ा पल्ली के शहीद स्वर्गीय फादर लौरेंस कुजूर, स्वर्गीय फादर जोसेफ कंडुलना व स्वर्गीय ब्रदर अमर अनूप इंदवार के शहादत के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को करौंदाबेड़ा के निर्मला सेवा आश्रम में शहीद रजत जयंती समारोह मनाया गया. समारोह में गुमला, रांची, खूंटी, सिमडेगा, हजारीबाग, राउरकेला, लोहरदगा जिला सहित पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, बंगाल, उड़ीसा सहित कई राज्यों के 50 हजार से भी अधिक ख्रीस्त विश्वासी शामिल हुए और शहीदों को श्रद्धांजलि दी.
इस अवसर पर करौंदाबेड़ा चर्च में समारोही पावन मिस्सा बलिदान किया गया. मुख्य अतिथि सह मुख्य अधिष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल अलोइस लकड़ा एवं सह अधिष्ठाता फादर इग्नासियुस टेटे व फादर निकोलस टेटे ने पावन मिस्सा बलिदान कराया. मौके पर बिशप ने कहा कि आज का दिन पवित्र दिन है. 25 साल पहले आज के दिन ही इस पल्ली के तीन पुरोहित कलीसिया की सेवा करते हुए शहीद हो गये. उन शहीदों को याद करें और जीवन को सुदृढ़ करें.
उन्होंने कहा कि ईश्वर हमारे साथ है. जीवन में बल और साहस के साथ आगे बढ़ें. हम जिस सोच के साथ आये हैं. ईश्वर हमारी उस सोच को पूरा करने में सहयोग करेंगे. इसलिए जीवन में खुश रहे और आनंद के साथ जीवन जीये. बिशप ने कहा कि कलीसिया के पुुजारियों ने बहुत ही कठिनाईयों और दुखों के साथ कलीसिया की स्थापना की है.
करौंदाबेड़ा के तीनों शहीद पुरोहित हमारे लिए एक उदाहरण हैं. परंतु कलीसिया के लिए सबसे पहला बलिदान देने वाले शहीद संत स्टेफन थे. पहली शताब्दी में उन्होंने कलीसिया केे लिए अपना बलिदान दिया. अगर हम उनकी शहादत को सोचने-समझने की कोशिश करें तो करौंदाबेड़ा के तीनों शहीदों की शहादत भी उसी तरह की है. उन तीनों की शहादत के बाद यहां सेमिनरी प्रशिक्षण खोला गया और वर्तमान में यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके लगभग डेढ़ सौ पुरोहित गुमला, सिमडेगा, हजारीबाग व लोहरदगा जैसे जिले में अपनी सेवा दे रहे हैं.
बिशप ने कहा कि कलीसिया के आरंभ से ही शैतानी शक्तियां ईश्वरीय शक्तियों को कम करने में लगे हुए हैं. परंतु कलीसिया के अनुयायों ने अपने खून से कलीसिया को सींचा है. जो वर्तमान में एक विशाल वृक्ष बन चुका है. कलीसिया के साथ ईश्वर शुरू से ही रहा है. इसलिए शैतानी शक्तियां भी कलीसिया का कुछ नहीं बिगाड़ सकती.
बिशप ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की महान कृति है. ईश्वर ने मनुष्य को अपने अनुरूप बनाया. इसलिए मनुष्य का जीवन लेने का हक भी सिर्फ ईश्वर को ही है. परंतु वर्तमान में सिर्फ भारत देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में देखा जा रहा है कि मनुष्य ही मनुष्य की जान लेने पर आतुर है. इसलिए ईश्वर से प्रार्थना करें कि वे सभी मनुष्यों को सदबुद्धि दें.
बिशप ने कहा कि यीशु ने कहा है.. मुझसे नम्रता, दया और असहायों की मदद करना सीखो. ईश्वर के प्रति आज्ञाकारी बनों. तभी ईश्वर का पुत्र कहलायेंगे. आज हमारे समाज में शिक्षा की भारी कमी है. इसलिए सच्चा चरित्र का निर्माण नहीं हो पा रहा है. ऊंच-नीच कहकर हमें बांटा जा रहा है. इसलिए न्याय-नीति का स्थापना करना है. शहीदों और संतों में ईश्वर का वास रहता है. ईश्वर हमें इन्हीं सब से परिपूर्ण करें.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










