गुमला में रेल लाइन और बाइपास सड़क बड़ा मुद्दा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Apr 2019 8:20 AM
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दुर्जय पासवान गुमला : लोहरदगा संसदीय सीट पर कुल 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. सब प्रचार-प्रसार में लगे हैं. इस दौरान लोग कई जन मुद्दा भी उठा रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख है गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ने तथा अधूरी बाइपास सड़क का निर्माण पूरा कराना. लोग प्रत्याशियों से पूछ रहे हैं – […]
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दुर्जय पासवान
गुमला : लोहरदगा संसदीय सीट पर कुल 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. सब प्रचार-प्रसार में लगे हैं. इस दौरान लोग कई जन मुद्दा भी उठा रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख है गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ने तथा अधूरी बाइपास सड़क का निर्माण पूरा कराना. लोग प्रत्याशियों से पूछ रहे हैं – गुमला को रेलवे लाइन से कब जोड़ा जायेगा. वर्तमान सांसद से शहरी सवाल कर रहे हैं – अब तक बाइपास सड़क क्यों नहीं बनी. इन सवालों पर नेता चुप्पी साधे हैं. कुछ बोल नहीं रहे. यदि विधानसभावार लोगों की मांग पर गौर करें, तो गुमला, बिशुनपुर व सिसई विस क्षेत्र की मांग अलग-अलग है.
गुमला विस : स्कूलों को मर्ज किया जाना बना मुद्दा
गुमला विधानसभा में बाइपास सड़क, परमवीर अलबर्ट एक्का के जारी प्रखंड का विकास, अपरशंख जलाशय योजना, बेकार पड़ा जीएनएम व मत्स्य कॉलेज, शहीदों के गांव का विकास सहित स्कूलों को मर्ज करने के मुद्दे उठ रहे हैं. बाइपास व रेलवे लाइन का मुद्दा हर चुनाव में उठता है, पर समस्या जस की तस है. इसके अलावा कई गांव है. जहां अभी तक सड़क नहीं बनी है. पूर्वी क्षेत्र के मुरकुंडा को प्रखंड बनाने व पुलिस पिकेट की स्थापना की मांग भी अधूरी है.
बिशुनपुर विस नहीं स्थापित हुआ अल्युमिनियम कारखाना
बिशुनपुर विधानसभा क्षेत्र में टोटो को प्रखंड बनाने की मांग लंबे अरसे से चल रही है. घाघरा प्रखंड में अल्युमिनियम का कारखाना स्थापित करने, बिशुनपुर व घाघरा प्रखंड के पहाड़ी इलाकों में पानी, बिजली, सड़क, शौचालय, रोजगार व शिक्षा की समस्या प्रमुखता के साथ उठ रही है. अल्युमिनियम कारखाना के नाम पर नेता सिर्फ वोट लेते हैं. इधर आदिम जनजातिय गांवों का विकास नहीं हो रहा तथा इनका पलायन जारी है.
सिसई विस : करंज और पुसो पंचायत अब तक नहीं बना प्रखंड
सिसई विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा करंज व पुसो को प्रखंड का दर्जा नहीं मिलना है. जबकि सिसई से गुमला व गुमला से लेकर रांची तक इसकी मांग उठती रही है. इसके अलावा बसिया व सिसई तक 37 किमी अधूरी सड़क भी नेताओं को कटघरे में खड़ा कर रही है. इस खराब सड़क के कारण कई नेताओं का रिजल्ट खराब हो सकता है. वहीं बसिया व कामडारा प्रखंड के कई गांवों में उग्रवाद भी चुनावी मुद्दा बन रहे हैं.
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