शौचालय निर्माण में गुमला जिला फिसड्डी, ओडीएफ होना अभी ''दूर की कौड़ी''

Published at :03 May 2018 8:10 PM (IST)
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शौचालय निर्माण में गुमला जिला फिसड्डी, ओडीएफ होना अभी ''दूर की कौड़ी''

।। दुर्जय पासवान ।। गुमला : गुमला जिला शौचालय बनाने में सबसे पीछे है. इस कारण गुमला को ओडीएफ होना अभी दिल्ली दूर है. ओडीएफ के लिए गुमला में दो महीने में 90 हजार शौचालय बनाना है. तभी स्वच्छ भारत का सपना गुमला में साकार होगा. गुमला की इस दुर्दशा का आंकड़ा गुरुवार को उस […]

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।। दुर्जय पासवान ।।

गुमला : गुमला जिला शौचालय बनाने में सबसे पीछे है. इस कारण गुमला को ओडीएफ होना अभी दिल्ली दूर है. ओडीएफ के लिए गुमला में दो महीने में 90 हजार शौचालय बनाना है. तभी स्वच्छ भारत का सपना गुमला में साकार होगा.
गुमला की इस दुर्दशा का आंकड़ा गुरुवार को उस समय सामने आयी. जब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक गुमला पहुंची. उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत् शौचालय निर्माण अभियान की समीक्षा बैठक की. बैठक में शौचालय निर्माण की प्रगति की पोल खुली.

पटनायक ने कहा गुमला जिला को मई व जून माह के अंत तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हर हाल में करना है. दो माह (मई व जून) में 90 हजार शौचालय का निर्माण करना है. इसमें विभाग एवं जिला प्रशासन हर संभव मदद् करेगी. सिमडेगा व लोहरदगा जिला के स्वयं सहायता समूह व राज मिस्त्रियों का सहयोग गुमला को दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त यूनिसेफ, प्रदान, विकास भारती, जेएसएलपीएस जैसे एनजीओ इस कार्य में मदद् करेंगी.

उन्होंने कहा पड़ोसी दो जिला ओडीएफ हो चुके हैं. वहां की परिस्थितियां गुमला से एक जैसी है. फिर भी गुमला में शौचालय निर्माण की प्रगति बहुत धीमी है. पांच मई से शौचालय निर्माण हेतु विशेष अभियान चलेगा. इसके लिए पड़ोसी जिलों की तर्ज पर टीम भावना, जिला-प्रखंड-पंचायत-गांव स्तर तक माईक्रो प्लानिंग कर कार्य करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े सभी लोगों को काम करने की सलाह दी.

स्वच्छ भारत के निदेशक राजेश शर्मा ने जिला की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य के कार्यक्रमों की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए बताया जिला को शेष दो माह में ओडीएफ करने के लिए प्रतिदिन 1324 शौचालय बनाने की जरूरत है. इसके लिए 1500 राज मिस्त्रियों की आवश्यकता होगी. वर्तमान में 52 शौचालय प्रतिदिन की गति से कार्य चल रहा है.

निर्माण कार्य का एमआईएस इंट्री के संबंध में उन्होंने कहा निर्मित शौचालयों का मात्र 20 प्रतिशत की इंट्री हुई है. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. आवश्यकतानुसार कम्प्यूटर ऑपरेटर लगाएं. डाटा में फोटो अपलोड की स्थिति भी ठीक नहीं है. फोटोग्राफी व अपलोड कार्य के लिए स्वतंत्र स्थानीय लोगों की मदद् ली जाय.

इस कार्य के लिए मिशन की तरफ से 25 रुपये प्रति फोटो देय है. ग्राम स्तर पर प्रत्येक माह के दूसरे दिन स्वच्छता सभा हो, जिसमें सबकी भागीदारी रहे. स्वच्छता ग्राहियों से नियमित संवाद रखें, उनका मानदेय का भुगतान समय पर हो. उन्होंने पड़ोसी जिला से आने वाले राजमिस्त्रियों, स्वयं सहायता समूहों के आवास तथा भोजन आदि का प्रबंध पंचायत भवन आदि की व्यवस्था करने को कहा.

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