एक साथ जली 12 चिताएं, गांव में नहीं जले चूल्हे
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Jan 2018 9:15 AM (IST)
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खुशी-खुशी छठी समारोह में गये थे. लौटे लाश बन कर दुर्जय पासवान गुमला : सिसई से अवैध बालू का उठाव हो रहा है. इससे अधिकारी मोटी रकम कमा रहे हैं. रात में चोरी-छिपे बालू को रांची भेजा जा रहा है. हाइवा व 12 चक्का गाड़ी का उपयोग हो रहा है. महीनें में लाखों रुपये की […]
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खुशी-खुशी छठी समारोह में गये थे. लौटे लाश बन कर
दुर्जय पासवान
गुमला : सिसई से अवैध बालू का उठाव हो रहा है. इससे अधिकारी मोटी रकम कमा रहे हैं. रात में चोरी-छिपे बालू को रांची भेजा जा रहा है. हाइवा व 12 चक्का गाड़ी का उपयोग हो रहा है.
महीनें में लाखों रुपये की कमाई एक अधिकारी कर रहे हैं. प्रभात खबर ने मुद्दा उठाया था. चेताया भी था. मामले का खुलासा किया था, लेकिन लूट का फंडा देखिये. सभी चुप रहे. प्रशासन तो कमाई में लगा था. विधायक व सांसद ने भी कुछ नहीं बोला. नतीजा देखिये. अवैध बालू लदे ट्रक से 13 लोगों की जान चली गयी. 13 लोगों की मौत बड़ी घटना है.
कई परिवार उजड़ गया. महिलाओं व पुरुषों के साथ मासूम बच्चों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी. अगर समय रहते प्रशासन चेत जाता, तो आज 13 लोगों की जान नहीं जाती. किस कदर यहां लूट मची है. इस लूट में लोगों की जान जा रही है. यहां बड़ा सवाल है. जब सरकार हर महीने तनख्वाह दे ही रही है, तो फिर लूट की यह अंधेरगर्दी क्यों. जनता को लाभ पहुंचाना है, लेकिन लाभ पहुंचाने की जगह उनकी जान से खेल रहे हैं. हम बात करें भरनो प्रखंड के पलमाडीपा की घटना की, तो यहां 13 लोगों की मौत इस कारण से चली गयी कि अवैध रूप से बालू लदा ट्रक (सीजी14एमएस-3892) तेजी से रांची जा रहा था. जैसा सूचना मिली है. रात को तीन से चार ट्रिप करने के चक्कर में गाड़ी को तेजी से चलाते हैं, जिससे आये दिन हादसे हो रहे हैं. पहले भी हादसा हुआ, लेकिन इतना भयावह नहीं. अभी भी समय है. अगर प्रशासन बालू के अवैध उठाव पर रोक नहीं लगाया, तो इसी प्रकार बालू लदे ट्रक चालकों की लापरवाही से लोगों की जान जाती रहेगी.
हादसे में मृत लोगों के नाम
करौंदाजोर की सतमी देवी (45) व उसकी बेटी सरस्वती कुमारी (5), जतरगड़ी की लोदरो देवी (50) व उसका नाती अमन महतो (9), जतरगड़ी की गांगो देवी (50), उसकी बेटी सुमित्रा देवी (35) व पोता आलोक गोप (8), जतरगड़ी के टेंपो चालक कृष्णा महतो (22), जतरगड़ी की मुनी देवी (50) व उसका पोता राहुल महतो (5), चालक कृष्णा का दोस्त रोहित उरांव (14), जतरगड़ी की जानकी देवी (55) व रूपेन देवी (40) है.
लोहरा गोप के परिवार के थे मरने वाले
मरने वाले 12 लोग जतरगड़ी गांव के स्वर्गीय लोहरा गोप के परिवार से थे. लोहरा गोप के छह पुत्र हैं. इन्हीं छह पुत्रों के परिजन छठी कार्यक्रम में बेड़ो गये थे. सबसे दुखद है. स्वर्गीय लोहरा के मंझले बेटे बिहारी महतो की पत्नी गांगो देवी, बेटी सुमित्र देवी व पोता आलोक गोप की मौत हो गयी. सिर्फ एक मृतक रोहित उरांव दोस्ती के नाते कृष्णा महतो (चालक) के साथ छठी कार्यक्रम में गया था, लेकिन इस हादसे में रोहित की भी मौत हो गयी.
जाम हटाने पहुंचे अधिकारी
जाम हटाने डीसी श्रवण साय, एसपी अंशुमान कुमार, डीडीसी एनके सिन्हा, एसडीओ केके राजहंस, एसडीपीओ बच्चनदेव कुजूर, डीएसपी इंद्रमणि चौधरी, बीडीओ शीतल कुमारी, सीओ अनूप कच्छप, थानेदार धर्मपाल कुमार व थानेदार अजय ठाकुर सहित कई अधिकारी थे.
पूरा गांव रोने की आवाज से गूंज उठा
जैसे ही प्रशासन शव लेकर गांव पहुंचा, पूरा गांव रो पड़ा. हर व्यक्ति रो रहा था. लोगों को रोता देख कई अधिकारियों की आंखें भी नम् हो गयी. गांव में दाह संस्कार के दौरान केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत, स्पीकर दिनेश उरांव सहित कई नेता पहुंचे. नेताओं ने मृतक के परिजनों को ढाढ़स बंधाया. वहीं अंचल द्वारा मृतक के परिजनों को 50-50 किलो चावल दिया.
पोस्टमार्टम की व्यवस्था की
गुमला सदर अस्पताल में सभी शवों के पोस्टमार्टम की व्यवस्था डीसी श्रवण साय की निगरानी में की गयी.सुबह से ही डीसी अस्पताल में जमे हुए थे. शवों के पोस्टमार्टम के बाद खुद डीसी श्रवण साय, एसपी अंशुमान कुमार, डीडीसी एनके सिन्हा, भाजपा जिला अध्यक्ष सविंद्र कुमार सिंह, महामंत्री यशवंत कुमार सिंह, भाजयुमो जिला अध्यक्ष मिशिर कुजूर शव को लेकर गांव गये. सोमवार की देर शाम एक ही स्थान पर 12 शवों का दाह संस्कार किया गया, जबकि रोहित उरांव के शव को दफनाया गया. पोस्टमार्टम हाउस में भाजपा के प्रदेश मंत्री मुनेश्वर साहू, पिछड़ी मोर्चा के अध्यक्ष शिवदयाल गोप, नगर अध्यक्ष संजय साहू सहित कई लोग थे.
रात को नहीं सो सके अधिकारी
रविवार की रात को जैसे ही घटना की सूचना डीसी, एसपी व डीडीसी को हुई, वे लोग रात को भरनो पहुंचे. रातभर अस्पताल में ही रहे. रात 12 बजे केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत भी अस्पताल पहुंचे. वे मृतक के परिजनों से मिलते हुए घटना की जानकारी ली.
जतरगड़ी में किसी के घर नहीं जला चूल्हा
जतरगड़ी से लौट कर सुनील रवि
भरनो प्रखंड से 12 किमी दूरी पर जतरगड़ी गांव है. यहां करीब 230 परिवार है. इसमें 30 परिवार अहीर जाति का है, जबकि 200 परिवार आदिवासी जाति का है. इसी गांव के 14 लोगों की मौत हुई है. मरने वाले सभी 12 लोग एक ही परिवार के अहीर जाति के हैं, जबकि एक मृतक आदिवासी है. गांव के 16 लोग छठी समारोह में बेड़ो प्रखंड के गड़गांव चटगुरा गांव गये थे. यहां रामप्रसाद गोप के घर में छठी समारोह था.
रविवार की सुबह करीब 10 बजे सभी लोग टेंपो से गड़गांव चटगुरा गांव गये थे. समारोह के बाद रात को सभी अपने गांव जतरगड़ी लौट रहे थे, तभी पलमाडीपा के समीप बालू लदे ट्रक ने टेंपो को अपनी चपेट में ले लिया. इस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हो गयी. इस ह्रदय विदारक घटना के बाद पूरा गांव रो रहा है. 13 लोगों की मौत से जतरगड़ी गांव में मातम पसरा है. सोमवार को किसी के घर में चूल्हा नहीं जला.
पशु गोहाल घर व आंगन में बंधे के बंधे रहे. कोई पशुओं को चराने जंगल नहीं ले गया. यहां तक कि पशुओं को भी खाने के लिए भोजन नहीं मिला. प्रभात खबर सोमवार को अहले सुबह गांव पहुंचा. सभी जाग रहे थे. लोगों से बात हुई. लोगों ने कहा : इतनी बड़ी घटना है. ऐसे में किसी को क्या नींद आयेगी. आंखों ही आंखों में सुबह हुई. मुंह तक कोई नहीं धोया था. हर घर का चूल्हा बुझा हुआ था. गांव में कुछ लोग इकट्ठे मिले. उनसे बात की.
कई लोग घटना के बारे में बताते बताते रो पड़े. मृतक के परिजन के घर गये. सभी रो रहे थे. बात करने की हिम्मत नहीं जुट पा रहे थे. किसी प्रकार बात हुई, तो परिजनों ने सिर्फ इतना कहा कि खुशी का माहौल गम में बदल गया. इधर, गांव के कुछ लोग टेंपो से भरनो आने की तैयारी कर रहे थे. सड़क जाम करने से पहले गांव के लोगों ने सरकार व प्रशासन को कोसा. लोगों ने गांव की समस्या बतायी. अहीर जाति के दो तीन परिवार को छोड़ कर किसी को सरकारी सुविधा नहीं मिलती है. इंदिरा आवास व पीएम आवास नहीं मिला है.
गांव में चलने के लिए कच्ची सड़क है. आंगनबाड़ी केंद्र किराये के मकान में चलता है. सरकारी स्कूल में मात्र दो शिक्षक हैं. पानी की सबसे बड़ी समस्या है. लोगों ने कहा कि 13 लोगों की मौत के बाद तो प्रशासन जागे.
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