घायल डॉ बीके दास की मौत

Published at :07 Oct 2016 6:45 AM (IST)
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घायल डॉ बीके दास की मौत

शोक . लहठी गांव में पसरा मातमी सन्नाटा शव के पास रोते िवलखते परिजन व जुटी ग्रामीणों की भीड़. फोटो। प्रभात खबर भागलपुर ले जाने के दौरान रास्ते में ही तोड़ा दम शव पहुंचते उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ सभी कर रहे थे घटना की निंदा महागामा : महगामा थाना के लहठी गांव के चिकित्सक डॉ […]

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शोक . लहठी गांव में पसरा मातमी सन्नाटा

शव के पास रोते िवलखते परिजन व जुटी ग्रामीणों की भीड़. फोटो। प्रभात खबर
भागलपुर ले जाने के दौरान रास्ते में ही तोड़ा दम
शव पहुंचते उमड़ी ग्रामीणों की भीड़
सभी कर रहे थे घटना की निंदा
महागामा : महगामा थाना के लहठी गांव के चिकित्सक डॉ बीके दास की भागलपुर जाने के क्रम में रास्ते में ही मौत हो गयी. बुधवार देर शाम तलवार से हुए जानलेवा हमले में चिकित्सक गंभीर रूप से घायल हो गये थे. महगामा रेफरल अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सकों भागलपुर रेफर कर दिया था. रात 12 बजे भागलपुर अस्पताल जाने के क्रम में रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी. लहठी गांव के ही कृष्णा यादव उर्फ बोधा यादव ने तलवार से प्रहार कर घायल कर दिया था.
थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि प्रतिशोध में हत्यारे ने घटना को अंजाम दिया है. बताया कि दो साल पूर्व आरोपित द्वारा चिकित्सक के घर से दस हजार रुपये की चोरी की गयी थी. गांव में पंचायती कर पंचों ने राशि वापस करने का आदेश दिया था. पंचों द्वारा लिये गये फैसले पर आरोपित ने छह हजार रुपये वापस किया था. चार हजार नहीं देने पर चिकित्सक शेष राशि माफ कर दी थी. इसके बाद आरोपित बाहर कमाने चल गया था. दो वर्ष पूर्व गांव लौटा था. प्रतिशोध की भावना में घटना को अंजाम दिया है. चिकित्सक पर हमला करने वाले आरोपित कृष्णा यादव पुलिस ने रात में ही छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया. थाना प्रभारी ने बताया कि गुरुवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
परिजनों का रो-रोकर है बुरा हाल
चिकित्सक की मौत की खबर के बाद लहठी गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया है. ग्रामीण इस घटना के बाद हतप्रभ है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बना है. पुत्र अपूर्व कुमार दास, प्रदीप कुमार दास, भाई रॉबिन कुमार दास, प्रवीर कुमार दास, विनय कुमार दास, मनय कांति दास, मृणाल कांति दास, कमाल कृष्ण दास, तुषार कांति दास का रो-रोकर बुरा हाल बना हुआ था.सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दोपहर एक बजे चिकित्सक का शव गांव पहुंचा. शव देखने ग्रामीणों की भीड़ जुट गयी. हर कोई इस घटना की निंदा कर रहा था.
30 वर्षों तक की अनवरत सेवा
ऊर्जानगर में प्राइवेट क्लिीनिक में चिकित्सक ने 30 वर्षों तक रोगियों को अपनी सेवा दी. हर रोज सैकड़ों मरीजों का इलाज करते थे. गरीब तबके के मरीजों को नि:शुल्क दवा भी दिया करते थे. नि:शुल्क इलाज कर दवा देते थे. परिजनों से बताया कि इसीएल में सीनियर ओवरमैन के पद से पूर्व में सेवानिवृत हुये थे. उनकी मौत से इसीएल कर्मचारियों ने भी संवेदना जतायी है.
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