एक बंदी की हुई रिहाई

Published at :15 Apr 2015 9:08 AM (IST)
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एक बंदी की हुई रिहाई

गोड्डा : झालसा के तहत मंगलवार को मंडल कारा में जेल अदालत का आयोजन किया गया. जेल अदालत की अध्यक्षता एसडीजेएम वाइके सिंह ने किया. इस दौरान एसडीजेएम श्री सिंह के समक्ष बोआरीजोर थाना में दर्ज धान की चोरी के आरोपित रिया पहाड़िया के मामले को लेकर पेशगी की गयी. इस दौरान आरोपित रिया पहाड़िया […]

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गोड्डा : झालसा के तहत मंगलवार को मंडल कारा में जेल अदालत का आयोजन किया गया. जेल अदालत की अध्यक्षता एसडीजेएम वाइके सिंह ने किया. इस दौरान एसडीजेएम श्री सिंह के समक्ष बोआरीजोर थाना में दर्ज धान की चोरी के आरोपित रिया पहाड़िया के मामले को लेकर पेशगी की गयी.
इस दौरान आरोपित रिया पहाड़िया के आचरण को देखते हुए न्यायिक पदाधिकारी द्वारा रियायत बरतते हुए सजा में छूट दी गयी. एसडीजेएम श्री सिंह ने आरोपित रिया पहाड़िया को दोबारा इस प्रकार की कोई गलती नहीं करने की हिदायत देकर रिहा कर दिया. मालूम हो कि बोआरीजोर थाना में 23/12/95 को गांव के ही बाबू पहाड़िया उर्फ मांझी ने धान की फसल काटने का आरोप लगाया गया था.
बंदियों को मिली कानून की जानकारी: मंडल कारा में विधिक जागरूकता शिविर के तहत बंदियों को कानून की महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी. एसडीजेएम श्री सिंह ने कहा कि बंदियों को कानून ने बहुत से सुधार के मौके दिये हैं. यदि कोई भी व्यक्ति जुर्म कर अपने जुर्म को स्वीकार कर आचरण में सुधार करने की कोशिश करता है तो उसके साथ कानून रियायत बरतती है. अपराध करने वाले को कानून सजा देती है. मंडल कारा में विचारधीन बंदी के पास यदि कोई वकील नहीं है तो वैसे बंदी जेलर के माध्यम से सरकारी वकील ले सकते हैं.
अपराध करने वाले मुजरिम कानून से नहीं बच सकते : न्यायिक दंडाधिकारी
प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अमित कुमार वैश्य ने कहा कि अपराध करने वाले मुजरिम कानून से नहीं बच सकते हैं. छोटे-छोटे वादों में कानून को तोड़ कर कई लोग जेल में आते हैं. वैसे लोग आवेश में आकर कानून का उल्लंघन करते हैं. कोशिश करना चाहिए कि किसी भी बात को लेकर आवेश में आकर कोई गलत कदम नहीं उठायें, कानून हाथ में न लें. सरकार ने बंदियों को कई तरह की सुविधाएं दी हैं. जिससे वह न्याय पा सकते हैं.
जेल एक पाठशाला की तरह
अधिवक्ता अजय प्रसाद साह ने कहा कि जेल एक पाठशाला की तरह है. छोटे-छोटे गुनाह कर कानून तोड़ कर जेल में आते हैं.
जेल में बीतायी गयी अवधि के दौरान बंदी अपने आचरण में परिवर्तन कर आगे बेहतर जिंदगी जी सकते हैं. इस दौरान पीपी राजकुमार मंडल, बार एसोसिएशन अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, अधिवक्ता संदीप दुबे, चंद्रभूषण प्रसाद, जेलर महेंद्र राम आदि उपस्थित थे.
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