गिरिडीह के केडिया बंधु बने टॉप ग्रेड कलाकार

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आकाशवाणी और दूरदर्शन में मिला खिताब, अब इनके नाम के आगे लगेगा पंडित रांची : झारखंड के केडिया बंधु यानी मोरमुकुट केडिया और मनोज केडिया आकाशवाणी और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड कलाकार बन गये हैं. सितार और सरोद की इनकी अनोखी जोड़ी है. अपने देश में ही नहीं विदेशों में भी सितार और सरोद वादन […]

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आकाशवाणी और दूरदर्शन में मिला खिताब, अब इनके नाम के आगे लगेगा पंडित
रांची : झारखंड के केडिया बंधु यानी मोरमुकुट केडिया और मनोज केडिया आकाशवाणी और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड कलाकार बन गये हैं. सितार और सरोद की इनकी अनोखी जोड़ी है. अपने देश में ही नहीं विदेशों में भी सितार और सरोद वादन में धूम मचा चुकी यह जोड़ी आकाशवाणी और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड के कलाकार बन गयी है. आकाशवाणी रांची की स्थापना 1957 में हुई है, तब से अब तक कोई भी कलाकार यहां का टॉप ग्रेड कलाकार नहीं बन पाया था.
आकाशवाणी रांची के म्यूजिक डिपार्टमेंट के आर्टिस्ट संदीप चटर्जी के अनुसार भारत सरकार के आकाशवाणी महानिदेशालय से टॉप ग्रेड की सूचना आकाशवाणी रांची को मिलते ही यहां खुशी की लहर दौड़ गयी. झारखंड के शास्त्रीय संगीत जगत में यह एक बडी उपलिब्ध मानी जा रही है.
मालूम हो कि टॉप ग्रेड की ग्रेडिंग मिलते ही कलाकार पंडित या उस्ताद बन जाता है. केडिया बंधु को अब पंडित मोरमुकुट केडिया और पंडित मनोज केडिया के नाम से संबोधित किया जायेगा. विगत 16 वर्षों से केडिया बंधु भारत सरकार के आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के पूरे झारखंड के सितार व सरोद के एकमात्र ए क्लास के कलाकार हैं.
इंडियन कौंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन के सदस्य हैं. 1996 में राष्ट्रीय युवा महोत्सव में मोरमुकुट केडिया ने सितार वादन में पूरे देश में प्रथम स्थान गोल्ड मेडल प्राप्त किया है. मनोज केडिया ने 1992 में प्रयाग संगीत समिति की संगीत प्रवीण एमए में प्रथम श्रेणी से टॉप कर तीन गोल्ड मेडल प्राप्त किया.
मैहर घराने के कलाकार हैं
केडिया बंधु मैहर घराना के युवा कलाकार हैं. झारखंड के गिरिडीह शहर में पैदा हुए और बचपन से ही पिता पंडित शंभूदयाल केडिया से संगीत की तालीम ली. इनको संगीत की तालीम दिलाने की प्रेरणा एक शास्त्रीय संगीत कार्यक्र म में सितार वादक पंडित रविशंकर, सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खां की युगलबंदी व उस्ताद अल्लाह राखा खां के तबला संगीत को देख सुनकर मिली.
तालीम के दौरान ही प्रसिद्ध संगीतज्ञ स्वामी पागलदास मृदंगाचार्य ने इन्हें केडिया बंधु की उपाधि दी. बचपन में पांच वर्षों तक केडिया बंधु को संगीतज्ञ प्रजानंदी जी का भी गुरु त्व प्राप्त हुआ. 1976 में विश्व विख्यात सरोद वादक पद्मभूषण उस्ताद अली अकबर खां का गुरु सानिध्य प्राप्त हुआ. इसके बाद पांच वर्षों तक मैहर घराने के संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खां के प्रिय शिष्य एसडी डेविड से नियमति दीक्षा ली.
फिर उस्ताद अलाउद्दीन खां की पुत्री व पंडित रविशंकर की धर्मपत्नी गुरु मां अन्नपूर्णा से संगीत की शिक्षा ली. पंडित सुनील मुखर्जी से भी इन्हें तालीम मिली है. तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन, सुखिवंदर सिंह पिंकी, वायलिन वादक डॉ एन राजन और पंडित जसराज, व्ही जी जोग व मुंबई के राजाराम शुक्ला का भी इन्हें गुरु सानिध्य प्राप्त है.
केडिया बंधु ने पंडित किसन महाराज, पंडित गुंदई महाराज, उस्ताद जाकिर हुसैन, पंडित स्वपन चौधरी आदि विश्वविख्यात तबला वादकों के साथ सफल कार्यक्र म भी पेश किया है.
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