खजुरी डैम के फाटक खोले गये

Published at :01 Oct 2016 8:01 AM (IST)
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खजुरी डैम के फाटक खोले गये

गढ़वा/मझिआंव : मझिआंव प्रखंड के खजुरी डैम के टूटने की खबर के बाद शुक्रवार को लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता राम कुमार प्रसाद ने डैम का निरीक्षण किया़ निरीक्षण के दौरान डैम के फाटक को बंद देख कर कार्यपालक अभियंता ग्रामीणों पर भड़क उठे़ उन्होंने कहा कि पिछली बार ग्रामीणों के हल्ला करने पर […]

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गढ़वा/मझिआंव : मझिआंव प्रखंड के खजुरी डैम के टूटने की खबर के बाद शुक्रवार को लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता राम कुमार प्रसाद ने डैम का निरीक्षण किया़ निरीक्षण के दौरान डैम के फाटक को बंद देख कर कार्यपालक अभियंता ग्रामीणों पर भड़क उठे़ उन्होंने कहा कि पिछली बार ग्रामीणों के हल्ला करने पर डैम का फाटक खोल दिया था़
लेकिन निरीक्षण के दौरान डैम के फाटक को बंद देख कर कार्यपालक अभियंता ने ग्रामीणों से पूछा कि आखिर यह किसके आदेश पर फाटक को बंद किया गया़ इसका जवाब किसी भी ग्रामीण के पास नहीं था़ उन्होंने कहा कि डैम के फाटक को पुन: खोल दिया गया है़. इसे किसी भी स्थिति में पुन: बंद नहीं करें. उन्होंने कहा कि आप लोग मछली बचाने के लिए डैम का फाटक बंद कर दिये थे़ मछली से ज्यादा कीमती आप लोगों की जान है़
तीन दशक बाद भी पानी नहीं मिला है किसानों को : मझिआंव प्रखंड अंतर्गत स्थित खजुरी जलाशय योजना का शिलान्यास वर्ष 1987 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे ने अपने कर कमलों किया था़ तत्कालीन प्राक्कलन के हिसाब से ढाई करोड़ की लागत से बननेवाले इस डैम के निर्माण में कई बाधाएं आयी. कई वर्ष तक डैम का निर्माण कार्य उस समय सक्रिय नक्सली संगठनों ने ग्रामीणों के मुआवजे की मांग को लेकर बंद कर दिया था़
नक्सली संगठन के प्रभाव खत्म होने के बाद भी डूब क्षेत्र के विस्थापित लोगों के मुआवजे को लेकर लंबे समय तक डैम का काम बाधित रहा़ वर्ष 2012 में मुआवजे के भुगतान के बाद नदी के मुख्य धारा को बांधने के साथ कुछ नहर का काम किया गया़ लेकिन इसके बाद भी नहर का कार्य पूरा नहीं हो पाया है़, जिसके कारण किसानों को इस डैम का लाभ नहीं मिल पा रहा है़ यदि डैम का नहर बना कर कार्य पूरा कर दिया जाये, तो इस डैम से खजुरी, बीरबंधा, भुसुआ, सकरकोनी, आमर, लकड़ही सहित करीब एक दर्जन गांव सिंचित हो सकते हैं.
ग्रामीणों के बीच चूड़ा-गुड़ का किया वितरण : शुक्रवार को खजुरी डैम के टूटने की आशंका से गांव छोड़ कर बीरबंधा पहाड़ी पर शरण लिये हुए ग्रामीणों को मझिआंव नगर पंचायत की ओर से चूड़ा- गुड़ दिया गया़
नगर पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा देवी ने ग्रामीणों के बीच पहुंच कर अपने हाथों चूड़ा-गुड़ बांटा़ इस दौरान अध्यक्ष ने कहा कि बीरबंधा गांव के ही कुछ लोगों द्वारा डैम का फाटक बंद करने के बाद डैम पर पानी का दबाव बढ़ गया़ इससे स्पेलवे का दीवार थोड़ा टूट गया़ अध्यक्ष ने कहा कि यह सारी समस्या मछली बचाने के कारण हुई है़
पिछले 20 अगस्त को ही जब पहली बार डैम टूटने की अफवाह फैली थी, उस समय लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता ने डैम का फाटक खोल कर वार्ड नंबर 11 के पार्षद विमला देवी व उसके पति विष्णु चौधरी को डैम की चाबी दी थी़ लेकिन उन्होंने मछली बह न जाये, यह सोचकर ग्रामीणों के सहयोग से डैम का फाटक बंद कर दिया़ इस बीच भारी बारिश होने से डैम में पुन: पानी का दबाव बढ़ गया और स्पेलवे का दीवार लगभगर तीन मीटर के व्यास में गिर गया़ उन्होंने कहा कि अगर फाटक नहीं खुलता, तो डैम के टूटने का खतरा था़ लेकिन यह खतरा अब टल गया है़
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