केतार में "89 लाख से बनी पुलिया बही

Published at :02 Aug 2016 7:05 AM (IST)
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केतार में "89 लाख से बनी पुलिया बही

केतार : पाचाडुमर मुख्य पथ से कमदरवा कालीकरण पथ में बनी पुलिया बरसात में ही बह गयी. ग्राम अभियंत्रण संगठन ने इसका निर्माण 89 लाख रुपये की लागत से कराया था़ पुलिया के बह जाने से कमदरवा, मुनमुन, बरहियाराज गांव की करीब 2000 की आबादी अपने पंचायत व प्रखंड मुख्यालय दोनों से कट गयी है़ […]

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केतार : पाचाडुमर मुख्य पथ से कमदरवा कालीकरण पथ में बनी पुलिया बरसात में ही बह गयी. ग्राम अभियंत्रण संगठन ने इसका निर्माण 89 लाख रुपये की लागत से कराया था़ पुलिया के बह जाने से कमदरवा, मुनमुन, बरहियाराज गांव की करीब 2000 की आबादी अपने पंचायत व प्रखंड मुख्यालय दोनों से कट गयी है़
छोटे-छोटे वाहनों का परिचालन भी पूरी तरह से बंद है़ इससे लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है़ संवेदक को काली सूची में डालें : इस घटना पर मुखिया अलका देवी ने कहा : संवेदक को काली सूची में डालने व जेइ पर कार्रवाई करने की जरूरत है़
संवेदक व जेइ की मिलीभगत से पुलिया का निर्माण काफी घटिया स्तर का हुआ़ इसमें बालू की मात्रा ज्यादा थी और ढलाई भी काफी कमजोर था़ पुल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने विरोध भी किया था़ लेकिन गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं किया गया़, इसके कारण पुलिया छोटे से नाले के बहाव में ही बह गया. दूसरी ओर, आरइओ के जेइ राजेंद्र सिंह वर्मा ने कहा : तेज बारिश की वजह से पुलिया बहा है़ इसका निर्माण फिर से कराया जायेगा़
मजदूरी भी अब तक नहीं मिली: पाचाडुमर मुख्य पथ से कमदरवा कालीकरण पथ के निर्माण में लगे करीब 24 मजदूरों की अब तक मजदूरी भी नहीं मिली है़ वे मजदूरी भुगतान को लेकर संवेदक के पास दौड़ रहे हैं. काम करनेवाले मजदूर गोरख राम, चंपा देवी, उमेश साह, कैलाश साह, मीरा देवी, नवलेश राम, मिथिलेश पासवान ने बताया कि उनकी 24,840 रुपये मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है़
भवनाथपुर. मूसलाधार बारिश में आधा दर्जन गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़नेवाला बुका गांव स्थित केरवा नदी का पुल बह गया़ यह पुल वर्ष 1993-94 में बनाया गया था़ पुल के बह जाने से बुका, चेरवाडीह, बनखेता, बघमनवा, चौरासी, पनियाही, सिकियालेवा, हेसलदाग आदि गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट गया़ अब गांव के लोगों को पांच से सात किमी अतिरिक्त दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय पहुंचाना होगा़
प्रशासन अगर सक्रियता दिखाती, तो पुल टूटने से बच जाता़ चार जुलाई को इस नदी के ऊपर भीता बांध का छलका टूट गया था़, जिससे वहां का सारा पानी इस नदी में आ रहा था़ वहीं बारिश में प्रखंड कार्यालय के समीप स्थित मुख्यमंत्री दाल-भात योजना केंद्र बारशि में डूब गया़
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