आदिम जनजातियों की स्थिति खराब

Published at :22 Mar 2016 7:18 AM (IST)
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आदिम जनजातियों की स्थिति खराब

अनुसूचित जनजाति आयोग के रामेश्वर उरांव ने राजबांस का दौरा किया, कहा गढ़वा : द्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन सह कांग्रेस के पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव ने कहा है कि गढ़वा जिले में आदिम जनजातियों के लिये राशि खर्च किये जाने के बावजूद उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है. इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी […]

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अनुसूचित जनजाति आयोग के रामेश्वर उरांव ने राजबांस का दौरा किया, कहा
गढ़वा : द्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन सह कांग्रेस के पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव ने कहा है कि गढ़वा जिले में आदिम जनजातियों के लिये राशि खर्च किये जाने के बावजूद उनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है.
इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जायेगी. श्री उरांव सोमवार को गढ़वा पहुंच कर चिनिया प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव राजबांस में रह रहे आदिम जनजाति परिवार से मिले और उनकी स्थिति की जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने राजबांस निवासी परमेश्वर कोरवा के घर जाकर उसकी स्थिति देखी. परमेश्वर के घर में खाने के लिये कोई अनाज नहीं था. जबकि आदिम जातियों को प्रत्येक महीने में मुफ्त चावल व गेहूं दिया जाता है. उन्होंने गांव में बिरसा आवास योजना की स्थिति की जानकारी ली, जिसमें उन्हें बताया गया कि प्रथम किस्त के रूप में 44 हजार रुपये ही जनजातियों को मिले हैं.
जबकि उन्हें एक लाख रुपये मिलना चाहिए. इसी तरह दो वर्ष से बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने, वन अधिकार के तहत किसी को वन भूमि का पट्टा नहीं मिलने, सिंचाई व पेयजल सुविधा की स्थिति खराब रहने, बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं कराने आदि पर उन्होंने नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि वे सभी स्थितियों से केंद्र सरकार को अवगत करायेंगे क्योंकि आदिम जनजातियों की मॉनिटरिंग केंद्र सरकार करती है. साथ ही मंगलवार को वेअधिकारियों के साथ बैठक कर आदिम जनजातियों के लिए हो रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा करेंगे.
कृषि से नहीं जुड़ी हैं आदिम जनजातियां : राजबांस से लौटकर स्थानीय परिसदन भवन में उन्होंने बताया कि पूरे भारत में 75 प्रकार की आदिम जनजातियां निवास करती हैं. इनमें झारखंड में आठ व गढ़वा जिला में दो प्रकार की आदिम जनजातियां शामिल हैं. गढ़वा जिले में कोरवा व परहिया आदिम जनजातियां रहती हैं. अन्य आदिवासी समुदाय कृषि को अपना चुकी है. लेकिन आदिम जनजाति अभी भी कृषि के पूर्ववाली जीवन शैली में जी रही है.
इन्हें कृषि से जोड़ना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अभी तक जनजातियों के लिए काफी काम किये गये हैं. काफी राशि भी खर्च हुई है, लेकिन स्थिति में बहुत बदलाव नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि जनजाति परिवार के प्रत्येक विवाहित महिला को वृद्धावस्था पेंशन की सुविधा मिलनी चाहिए.
कोई दायित्व नहीं मिला, तो राम नाम भजेंगे
केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन के रूप में दो कार्यकाल पूरा करने के बाद अब सिर्फ आठ महीने का कार्यकाल श्री उरांव का रह गया है. श्री उरांव ने कहा कि वे धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति है.
यदि आगे सरकार व कांग्रेस पार्टी की ओर से कोइ दायित्व नहीं मिला, तो रामनाम भजेंगे. खेती बाड़ी लायक जो जमीने हैं, उसमें मेहनत करेंगे और अपना मन लगायेंगे. उन्होंने कहा कि उनके परिवार का दूसरा कोई व्यक्ति राजनीति में नहीं आयेगा. उन्होंने हाल ही भी प्रदेश कांग्रेस की ओर से गढ़वा जिला प्रभारी के मिले दायित्य के प्रति असंतोष जाहिर किया है.
उन्होंने कहा कि पांच मार्च को झारखंड प्रभारी बीके हरि प्रसाद की उपस्थिति में संपन्न हुई कांग्रेस की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जोन(प्रमंडल) स्तर पर कमेटी बनेगी, उसके बाद जिला प्रभारी की नियुक्ति होगी. लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने मनमाने तरीके से जोन स्तर की समिति नहीं बनायी, बल्कि सीधे जिला प्रभारियों की घोषणा कर दी है, जो गलत है. उन्होंने कहा कि बैठक में लिये गये निर्णय का पालन होना चाहिए.
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