कंधे का सहारा छिन गया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Jan 2016 8:20 AM (IST)
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कांडी(गढ़वा) : छतरपुर-जपला मार्ग पर शहीद वाहन चालक संजय शर्मा का शव अपने पैतृक गांव कांडी प्रखंड के कुशहा पतरिया पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया. संजय के शहीद होने की खबर गांव में रात में ही मिल गयी थी. उसी समय से कुशहा पतरिया सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ […]
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कांडी(गढ़वा) : छतरपुर-जपला मार्ग पर शहीद वाहन चालक संजय शर्मा का शव अपने पैतृक गांव कांडी प्रखंड के कुशहा पतरिया पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया. संजय के शहीद होने की खबर गांव में रात में ही मिल गयी थी. उसी समय से कुशहा पतरिया सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ पड़ी थी.
सुबह से ही उसके घर पर शोक-सांत्वना देनेवाले लोगों का तांता लगा हुआ था. लोग संजय के शव को पहुंचने का इंतजार कर रहे थे. उसके पिता रामवृक्ष साह, माता अदरी देवी और पत्नी रामसखीका क्रंदन सुनकर उपस्थित लोग भी अपना आंसू रोक नहीं पाये.
उपस्थित लोगों में जिप सदस्य हसन रजवार, मुखिया गीता देवी, सतबहिनी झरना तीर्थ समिति के अध्यक्ष राम नरेश सिंह, झारखंड नवनिर्माण मोरचा के लड्डू पांडेय, राहुल कुमार दुबे, नीरज सिंह, अनिल सिंह, मुन्ना शर्मा, मनीष पांडेय सहित सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.
अपराह्न चार बजे शव पहुंचने के बाद माहौल और गमगीन हो गया. शव को तिरंगे झंडे में लपेटकर अधिकारियों ने उसके घर पहुंचाया. इसके बाद दाह-संस्कार किया गया.
2008 में पुलिस में बहाल हुआ था संजय : संजय अपने पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर था. संजय की शादी वर्ष 2000 में बिहार के रोहतास जिला के पड़ुका में हुई थी.
वर्ष 2008 में वह पुलिस में बहाल हुआ था. संजय के परिवार की माली हालत काफी दयनीय है. घर में पांच भाइयों के लिये हिस्से में एक-एक कमरे हैं.
घर का खाना कोई रसोई घर नहीं होने के कारण दलान में बनता है. संजय के पांच बच्चे हैं. जिसमें सबसे बड़ा बेटा निलेश कुमार मात्र 12 साल का है, जबकि अन्य बच्चों में पूजा कुमारी, आरती कुमारी, सरस्वती कुमारी व दुर्गा कुमारी क्रमश: आठ साल, छह साल,चार साल एवं दो साल के हैं.
शहीद पुलिस के जवान संजय शर्मा के पिता रामवृक्ष साह ने रोते हुए कहा कि उनके कंधे का सहारा ही छिन गया है.
उन्होंने कहा कि बड़ी मुश्किल से बेटा को नौकरी मिलने के बाद वह घर की स्थिति सुधरने के लिए आशान्वित थे. लेकिन आज संजय का लाश देख कर छाती फट रही है.
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