बहरागोड़ा कॉलेज में नाम ग्राम विषय पर सेमिनार
Updated at : 14 Dec 2016 5:33 AM (IST)
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बहरागोड़ा : बहरागोड़ा कॉलेज में मंगलवार को बांग्ला पीजी विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष डॉ टीके मंडल की अध्यक्षता में नाम ग्राम विषय पर सेमिनार हुआ. इसमें मुख्य वक्ता करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर के बांग्ला विभागाध्यक्ष बैधनाथ त्रिपाठी ने कहा हर स्थान के नामकरण के पीछे कोई वजह होती है. पहले प्राकृतिक तत्वों के आधार […]
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बहरागोड़ा : बहरागोड़ा कॉलेज में मंगलवार को बांग्ला पीजी विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष डॉ टीके मंडल की अध्यक्षता में नाम ग्राम विषय पर सेमिनार हुआ. इसमें मुख्य वक्ता करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर के बांग्ला विभागाध्यक्ष बैधनाथ त्रिपाठी ने कहा हर स्थान के नामकरण के पीछे कोई वजह होती है. पहले प्राकृतिक तत्वों के आधार पर नामकरण किया जाता था. बाद में व्यक्ति के नाम के आधार पर किया जाने लगा. इसका संबंध भाषा समूह से भी है.
उन्होंने कहा कि अरांची शब्द से रांची बना. अरांची का अर्थ होता है बड़ा डंडा, जिससे चरवाहा मवेशी चराता था. जिसे अंग्रेजों ने मांगो कहा वह अब मानगो है. सखी शब्द से साकची बना. महुलडीह महुलिया है. गालू नामक व्यक्ति के नाम पर गालूडीह का नाम हो गया. उन्होंने कहा कि पहले घर में मंदिर होता था. जब लोगों ने घरों से मंदिर को अलग कर दिया, तो कृष्णपुर, रामपुर, विष्णुपुर के रूप में गांवों का नामकरण हुआ. महुल पेड़ के नाम से महुलबेड़ा बना. जड़ी का अर्थ नहीं होता है
जिस नदी के किनारे बालू अधिक था उसे बालीजुड़ी कहा गया. बहेड़ा का पेड़ काफी संख्या में गोड़ा जमीन पर था, इसलिए बहरागोड़ा नाम पड़ा. मौके पर डॉ सत्य प्रिय माहली ने गांव के नामकरण पर प्रकाश डाला. सेमिनार में डॉ एसपी सिंह, डॉ बालकृष्ण बेहरा, डॉ अजय वर्मा समेत अन्य विभाग के शिक्षक, छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी प्राचार्या प्रो भुवनेश्वरी षाड़ंगी ने दी.
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