धालभूमगढ़. ग्रेवल खदान बंद होने से चार हजार मजदूर हैं बेरोजगार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Feb 2016 4:00 AM (IST)
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खदान खोलने के लिए प्रदर्शन धालभूमगढ़ : ग्रेवल खदान को पर्यावरणीय स्वीकृति से मुक्त करने और खदान का लीज निर्गत करने की मांग को लेकर पावड़ा-नरसिंहगढ़, दूधचुआ, घोड़ाधुआ, रूआशोल, भारूडीह आदि गांवों के मजदूरों ने बुधवार को नरसिंहगढ़ पंचायत की मुखिया दिपाली सिंह, पंचायत समिति सदस्य संजू रानी नाथ और नूतनगढ़ की पंचायत समिति सदस्य […]
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खदान खोलने के लिए प्रदर्शन
धालभूमगढ़ : ग्रेवल खदान को पर्यावरणीय स्वीकृति से मुक्त करने और खदान का लीज निर्गत करने की मांग को लेकर पावड़ा-नरसिंहगढ़, दूधचुआ, घोड़ाधुआ, रूआशोल, भारूडीह आदि गांवों के मजदूरों ने बुधवार को नरसिंहगढ़ पंचायत की मुखिया दिपाली सिंह, पंचायत समिति सदस्य संजू रानी नाथ और नूतनगढ़ की पंचायत समिति सदस्य का लगभग दो घंटे तक घेराव कर नारेबाजी की.
पंचायत प्रतिनिधियों ने मजदूरों को ग्रेवाल लीज के लिए सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया. मजदूरों ने पंचायत प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के बाद घेराव से मुक्त किया. मजदूरों ने पंचायत प्रतिनिधियों को बताया कि ग्रेवल खदान बंद होने से लगभग चार हजार मजदूर बेरोजगार हैं. मजदूरों के पास रोजगार के लिए पलायन छोड़ कर दूसरा विकल्प नहीं है. मजदूर भुखमरी की कगार पर हैं. पश्चिम बंगाल सरकार माइनर मिनरल में लीज दे रही है.
चालान निर्गत कर रही है. ग्रेवल, बालू, मुरम माइनर मिनरल है. इन्हें अनापत्ति लेने की आवश्यकता नहीं है. मौके पर रिंकी मुंडा, भारती मुंडा, बिनती मुंडा, दिपाली मुंडा, छवि राय, नागी सोरेन, प्रिया सोरेन, मालती बेसरा, दुर्गी मुर्मू, शंकरी कर्मकार, जुही हांसदा शामिल थीं.
2013 से लीज नवीनीकरण है बंद: दिलीप सेन
धालभूमगढ़ प्रखंड की नूतनगढ़ पंचायत के पंचायत समिति सदस्य सह पूर्व लीज होल्डर दिलीप कुमार सेन ने बताया कि 2013 से उनका लीज नवीनीकरण नहीं हुआ है. अनापत्ति के लिए रांची प्रदषूण नियंत्रण बोर्ड में आवेदन दिया था. अनापत्ति किया गया. उनसे कहा कि बिना रुपये के कुछ भी नहीं होगा. विवश होकर सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर किया. जो विचाराधीन है.
सर्वोच्च न्यायालय से राज्य सरकार को पक्ष रखने के लिए कई बार सूचना निर्गत हुआ.
राज्य सरकार की ओर से पक्ष नहीं रखा गया है. ग्रेवल उद्योग में उत्पादन कुदाल और गैंती से होता है. धान, सब्जी की खेती में गैंती और कुदाल का उपयोग होता है. इसलिए सरकारी व्यवस्था अनुरूप खेती के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा. जिला खनन पदाधिकारी संजीव कुमार मंडल ने दूरभाष पर बताया कि अनापत्ति लेना सरकारी व्यवस्था है. मजदूर मांग पत्र देंगे तो सरकार को अग्रसारित किया जायेगा.
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