जिप सदस्य अर्जुन पूर्ति बरी

Published at :12 Feb 2016 6:01 AM (IST)
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जिप सदस्य अर्जुन पूर्ति बरी

घाटशिला : 27 जनवरी 2009 को चर्चित बहरागोड़ा कॉलेज के प्राचार्य शशि भूषण प्रमाणिक हत्याकांड की सुनवाई करते हुए गुरुवार को घाटशिला के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार दुबे की अदालत ने छात्र नेता सह जिला परिषद सदस्य अर्जुन पूर्ति को बरी कर दिया. मामले में आरोपी की ओर से पैरवी अधिवक्ता जेडी […]

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घाटशिला : 27 जनवरी 2009 को चर्चित बहरागोड़ा कॉलेज के प्राचार्य शशि भूषण प्रमाणिक हत्याकांड की सुनवाई करते हुए गुरुवार को घाटशिला के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार दुबे की अदालत ने छात्र नेता सह जिला परिषद सदस्य अर्जुन पूर्ति को बरी कर दिया. मामले में आरोपी की ओर से पैरवी अधिवक्ता जेडी पटेल और एसपी महतो ने की.

एपीपी अनंत हेंब्रम थे.

इस संबंध में मृतक के पुत्र संजय कुमार प्रमाणिक के बयान पर थाना में कांड संख्या 08/2009, दिनांक 28 जनवरी 09, भादवि की धारा 302, 34 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत मानुषमुडि़या के अर्जुन पूर्ति, घाटशिला के दाहीगोड़ा निवासी पियूष कुमार साव और सालबनी के प्रो जसो राज राणा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी.
पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान किया और अर्जुन पूर्ति के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत किया. प्रो जसोराज राणा और पीयूष कुमार साव के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया. केस डायरी में इन दोनों के खिलाफ पुलिस ने अनुसंधान जारी रखते हुए प्राथमिकी अभियुक्त अर्जुन पूर्ति के खिलाफ भादवि की धारा 302, 34 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत आरोप पत्र संख्या 22/09, दिनांक 23 मई 09 आरोप पत्र समर्पित किया.
क्या था मामला
दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक 27 जनवरी 09 को प्राचार्य शशि भूषण प्रमाणिक तबीयत खराब होने से कॉलेज से वापस घर आ गये थे. वे बोलाई कुमार साव के मकान में भाड़ा में रहते थे. प्राचार्य अपने कमरा में सोये थे. कमरे में टिवी चल रहा था. वे रजाई ओढ़ कर सोये थे. कमरे का दरवाजा आधा खुला था. जब वे टिवी बंद करने गये तो देखा कि पिता के सिर के पीछे की तरफ से और कान से खून गिरा हुआ था. उन्होंने पिता को हिला डुला कर देखा तो उन्हें मृत पाया. उन्हें सिर में गोली मार कर हत्या की गयी है.
पियूष साव का नामांकन रद हुआ था: प्राथमिकी में कहा गया है कि प्राचार्य पर छात्र नेता अर्जुन पूर्ति बीएड में फर्जी ढंग से नामांकन कराने के लिए दबाव डालता था और नामांकन करवाया भी था. जो जांच में रद होने की संभावना थी. इसके लिए अर्जुन पूर्ति धमकाया करता था और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दिया करता था.
पियूष कुमार साव का नामांकन रद हुआ था.
घर मालिक समेत सात की गवाही हुई थी:अधिवक्ता जेडी पटेल ने बताया कि प्राचार्य हत्याकांड में कोर्ट में उनके पुत्र संजय कुमार प्रमाणिक, सुबोध कुमार प्रमाणिक, सुनील कुमार प्रमाणिक, राजेश मंडल, मयंक कुमार मिश्रा, घर मालिक बोलाई साव और अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक डॉ देवी प्रसाद हांसदा की गवाही हुई थी.
कोर्ट का फैसला सर्वमान्य :
कोर्ट से बरी होने के बाद छात्र नेता सह जिला परिषद सदस्य अर्जुन पूर्ति ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों की साजिश के कारण उन्हें प्राचार्य शशि भूषण प्रमाणिक हत्या कांड में फंसाया गया और उनकी गिरफ्तारी करायी गयी. मामले में पुलिस अभी भी असली आरोपियों से कोसों दूर है. कोर्ट पर उन्हें भरोसा था. कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है. वह सर्वमान्य है. न्यायालय ने फैसला सुना कर उनके साथ इंसाफ किया है.
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