छात्रवृत्ति रुकने से धान-बकरी बेचकर दी फीस, अब पढ़ाई छोड़ने की नौबत

Updated at : 29 May 2018 5:31 AM (IST)
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छात्रवृत्ति रुकने से धान-बकरी बेचकर दी फीस, अब पढ़ाई छोड़ने की नौबत

तमिलनाडु में इंजीनियरिंग कर रहीं झारखंड की छात्राएं छात्राओं ने कहा- कल्याण विभाग से सिर्फ एक बार साढ़े सात हजार छात्रवृत्ति मिली गालूडीह : झारखंड सरकार ने राज्य के बाहर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर रोक लगा दी है. इसके कारण गरीब, आदिवासी, हरिजन, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक छात्र-छात्राएं प्रभावित हो रहे हैं. घाटशिला […]

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तमिलनाडु में इंजीनियरिंग कर रहीं झारखंड की छात्राएं

छात्राओं ने कहा- कल्याण विभाग से सिर्फ एक बार साढ़े सात हजार छात्रवृत्ति मिली
गालूडीह : झारखंड सरकार ने राज्य के बाहर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर रोक लगा दी है. इसके कारण गरीब, आदिवासी, हरिजन, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक छात्र-छात्राएं प्रभावित हो रहे हैं. घाटशिला प्रखंड की हेंदलजुड़ी और बनकांटी पंचायत की पांच आदिवासी (संताल) छात्राएं तमिलनाडु में वेंकेटेश्वर हाई पॉलिटेक्निक कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं. सभी ने जून 2016 में नामांकन लिया है. दो वर्ष में कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति के नाम पर प्रति छात्रा मात्र साढ़े सात हजार रुपये मिले. छात्राओं ने बताया कि नामांकन के समय हमने पांच हजार जमा किए. छात्रवृत्ति नहीं मिलने से प्रथम वर्ष की फीस जमा नहीं कर पाये.
द्वितीय वर्ष की परीक्षा के समय कॉलेज प्रबंधन ने प्रथम वर्ष की फीस जमा करने की शर्त रखी. तब परीक्षा में बैठने की बात कही. परिजनों ने धान, बैल-बकरी बेचकर प्रथम वर्ष की फीस जमा की. अब छात्रवृत्ति नहीं मिली तो आगे की पढ़ाई संभव नहीं हो पायेगी.
छह मई को छात्राएं घर आयीं, आज लौटेंगी तमिलनाडु
पांचों छात्राएं तमिलनाडु में कॉलेज हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती हैं. छात्राओं ने कहा 4 मई को वहां से चले थे. छह मई को घर पहुंचे. 29 मई को फिर तमिलनाडु जायेंगे. छात्राओं ने कहा सरकार के निर्णय के पहले हम लोगों ने नामांकन कराया है. इस पर विचार होना चाहिए. छात्रवृत्ति नहीं मिली तो हम लोगों की पढ़ाई बीच में छूट जायेगी. करियर चौपट हो जायेगी. परिवार के लोग किसान और मजदूर तबके हैं.
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