अतिक्रमण// ठगे भी गये लोग, हुई थी हजारों की वसूली!

संवाददाता, दुमकाजो लोग गिरफ्तार किये गये हैं, उनमें से ऐसे लोग जो दुमका से बाहर के रहने वाले हैं, उनलोगों ने खुलासा किया है कि उनसे सिदो कान्हू के नाम पर मंदिर बनवाने के लिए भारी-भरकम राशि पहले वसूली गयी, फिर बाद में यह बताया गया कि सरकारी बस पड़ाव के खाली परिसर में वे […]
संवाददाता, दुमकाजो लोग गिरफ्तार किये गये हैं, उनमें से ऐसे लोग जो दुमका से बाहर के रहने वाले हैं, उनलोगों ने खुलासा किया है कि उनसे सिदो कान्हू के नाम पर मंदिर बनवाने के लिए भारी-भरकम राशि पहले वसूली गयी, फिर बाद में यह बताया गया कि सरकारी बस पड़ाव के खाली परिसर में वे इन्हीं महापुरुषों के नाम से बस्ती बसायेंगे. इसके लिए भी लोगों से दो-दो हजार रुपये वसूले गये. इसी पैसे से जनरेटर भी खरीदा गया और फिर खाने-पीने का सामान भी. बिहार से भी जुटे थे आदिवासीजो लोग यहां जमीन कब्जा करने पहुंचे थे, उनमें काफी तादाद में बिहार के रहने वाले आदिवासी भी थे. इनमें से कुछ तो कटिहार, पूर्णिया, बौंसी, बांका आदि इलाकों के थे, तो कुछ साहेबगंज, पाकुड़, बोरियो-बरहेट तथा दुमका के.मिर्ची बम और रबर बुलेट भी लेकर पहुंची थी पुलिसविपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पुलिस-प्रशासन ने ठोस रणनीति तैयार की थी, जिसमें दंगारोधी दस्ता के अलावा पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अश्रु गैस के गोले, मिर्ची बम (पैपर बम) तथा रबर बुलेट भी लेकर पहुंची थी. पुलिस को किसी तरह का बल प्रयोग नहीं करना पड़ा. परिसर को खाली कराने जो जवान भेजे गये थे, वे लाठीधारी ही थे, जबकि सरकारी बस स्टैंड के बाहर जो जवान तैनात थे, वे सशस्त्र थे. हालांकि पुलिस को इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ा.
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