रानीबहाल का नहीं हो सका विकास

Updated at :05 Apr 2015 8:13 AM
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रानीबहाल का नहीं हो सका विकास

राज्य में 32 वर्षो के बाद जब पंचायत चुनाव हुए तो लोगों में विकास की एक उम्मीद जगी. ग्रामीणों को लगा की अब सरकार गांव में होगी और विकास का खाका वे लोग अपने अनुसार तय कर पायेंगे. लेकिन चुनाव के चार साल बीतने के बाद भी पंचायत में सरकार की परिकल्पना आधी-अधूरी दिख रही […]

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राज्य में 32 वर्षो के बाद जब पंचायत चुनाव हुए तो लोगों में विकास की एक उम्मीद जगी. ग्रामीणों को लगा की अब सरकार गांव में होगी और विकास का खाका वे लोग अपने अनुसार तय कर पायेंगे. लेकिन चुनाव के चार साल बीतने के बाद भी पंचायत में सरकार की परिकल्पना आधी-अधूरी दिख रही है. मुखिया के पास सरकार ने 14 विभागों का जिम्मा दिया था. इससे पूर्व उनके पास पांच विभाग थे.

जिसे राष्ट्रपति शासन में बढ़ा कर 14 कर दिया गया. इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य ग्रामीण विकास, पेयजल आपूर्ति, सामाजिक सुरक्षा, सिंचाई, पशुपालन व मत्स्य पालन, समाज कल्याण जैसे ग्रामीणों से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग शामिल है. लेकिन सरकार की उदासीनता से आज भी इन विभागों को पंचायत के जिम्मे पूरी तरह से नहीं किया गया है. इसका सीधा असर ग्रामसभा पर पड़ रहा है.

रानीश्वर : पंचायत चुनाव के चार साल बीत जाने के बावजूद सदर प्रखंड के रानीबहाल पंचायत का अपेक्षित विकास नहीं हो सका है. लोगों को उम्मीद थी कि अब गांव में सरकार बनी है़ वे अपनी समस्याओं का गांव में ही समाधान करा पायेंगे पर ऐसा नहीं हो सका़ देखते ही देखते चार साल बीत गये.

पंचायत के गांवों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका. पंचायत की मुखिया व वार्ड सदस्य स्वयं के विकास के बारे में ही सोचते रहे मगर पंचायत को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका़ मुखिया सुजाता किस्कू अपनी गांव पहाड़पुर में पारा शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं. पारा शिक्षिका पद से इस्तीफा देकर वे चुनाव में उतरीं. पंचायत में रानीबहाल, कटहलडीहा, नुड़ुई बाथान, पाहाड़पुर, मुरजोड़ा, बालीराम, देवानबाड़ी आदि गांव है़ जहां एक उच्च विद्यालय व नौ प्राथमिक व मध्य विद्यालय के अलावा नौ आंगनबाड़ी केंद्र भी है़ पंचायत मुख्यालय रानीबहाल में एक प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र भी है तथा एक पशु चिकित्सा केंद्र भी है मगर सारी व्यवस्थाएं सिर्फ कहने के लिए है. वहीं यहां पुराना पंचायत भवन में ही पंचायत सचिवालय चल रहा है़ नया पंचायत भवन का कार्य चार साल से लंबित है़

पंचायत चुनाव के बाद आपदा प्रबंधन के लिए दो लाख रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है़ इसके अलावा 13वें वित्त आयोग से करीब 15 लाख रुपये व मुख्यमंत्री सड़क योजना से दस लाख रुपये प्राप्त हुआ था. आपदा प्रबंधन से चापानल मरम्मत करायी जानी थी. बावजूद पंचायत में खराब सभी चापानलों की मरम्मत नहीं हो सकी.

रानीबहाल पंचायत में पेयजल एक बड़ी समस्या है़ यहां अधिकांश चापानलों का पाइप खराब हो जाने के कारण चापानल बंद पड़ा है़ कभी-कभी ग्रामीण चंदा कर खराब चापानलों की मरम्मत कराते हैं. पंचायत से प्रखंड मुख्यालय की दूरी 35 किलोमीटर होने के कारण साधारण लोग चापानल मरम्मत व अन्य समस्याओं को लेकर प्रखंड मुख्यालय नहीं पहुंच पाते हैं 13वें वित्त आयोग की राशि से कुछेक गार्डवाल, नाली व पीसीसी पथ का निर्माण कराया गया है़

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