मुर्गी पालन कर स्वावलंबी बन रहीं महिलाएं

Updated at : 24 Aug 2018 4:30 AM (IST)
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मुर्गी पालन कर स्वावलंबी बन रहीं महिलाएं

आम सभा में एक वर्ष का लेखा-जोखा किया पेश दुमका : एकता में बड़ी ताकत होती है. इसे साबित करके दिखा रही हैं दुमका की 400अधिक महिलाएं. ये महिलाएं एकता महिला कुक्कुटपालक स्वावलंबी सहकारी समिति बनाकर 2009 से कार्य को कर रही हैं. मुर्गीपालन के कारोबार को वृहद रूप देकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर […]

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आम सभा में एक वर्ष का लेखा-जोखा किया पेश

दुमका : एकता में बड़ी ताकत होती है. इसे साबित करके दिखा रही हैं दुमका की 400अधिक महिलाएं. ये महिलाएं एकता महिला कुक्कुटपालक स्वावलंबी सहकारी समिति बनाकर 2009 से कार्य को कर रही हैं. मुर्गीपालन के कारोबार को वृहद रूप देकर अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर रही हैं. अच्छी आमदनी से इनका आत्मबल ऊंचा हो रहा है. तो जीवन स्तर में भी काफी बदलाव दिख रहे हैं. गुरुवार को इस सहकारी समिति की आमसभा हुई तो समिति ने साल भर का जो लेखा-जोखा पेश किया. वह चौंकाने वाला था. ज्यादातर आदिवासी महिलाओं से बने समूह की अध्यक्ष मिनुति कोल ने बताया कि समूह उनके जैसे 408 परिवारों के लिए सिर्फ आमदनी का साधन नहीं, बल्कि
सशक्तीकरण का माध्यम भी है.
दुमका प्रखंड के पथरगढ़ा व पताईथान की 15 महिलाओं द्वारा मुर्गीपालन के साथ हुई शुरुआत आज 33 गांवों की आदिवासी महिलाएं कमेटी से जुड़ चुकी हैं. प्रत्येक को सालाना 25 से 30 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है.
19 लाख 6 हजार का हुआ लाभ :
मिनुति ने बताया कि पिछले एक साल में यानी 2017-18 में सहकारी समिति ने 7 लाख 54 हजार 8 सौ 71 मुर्गियों को तैयार किया और उसे बेचा. इन मुर्गियों का वजन 891.90 मीट्रिक टन था. इसे बेच कर समिति ने 7 करोड़ 94 लाख 98 हजार रुपये की आमदनी की, इसमें से उत्पादनकर्ताओं को 63 लाख 10 हजार रुपये भुगतान करने के बाद शुद्ध लाभ 19 लाख 6 हजार 37 रुपये का रहा. बड़ी बात यह रही कि समिति के तमाम सदस्यों का इस बार जीवन बीमा भी करा दिया गया.
आंकड़ों का सच
2009 से कुक्कुट पालक स्वावलंबी सहकारी समिति से जुड़ीं महिलाएं
408 परिवारों की महिलाएं मुर्गीपालन से बनीं आत्मनिर्भर व सशक्त
इस साल 1227 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
मिनुति ने बताया कि इस वर्ष 408 से बढ़ कर 500 दीदियों को इस सहकारी संगठन से जोड़ कर मुर्गीपालन कराने की योजना और लक्ष्य तय किया गया है. 11 लाख 31 हजार 200 चूजे को पालने, उत्पादन को बढ़ा कर 1227 मीट्रिक टन तक पहुंचाने तथा वार्षिक बिक्री की रकम को बढ़ा कर 11.34 करोड़ तक ले जाने की भी कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं. महिलाओं में इसे लेकर उत्साह भी है. मिनुति ने बताया कि उनका लक्ष्य शुद्ध मुनाफे को 30 लाख रुपये तक ले जाने की है.
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