विमान सेवा जल्द पर उड़ान प्रशिक्षण दूर

Updated at : 25 Jun 2017 4:19 AM (IST)
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विमान सेवा जल्द पर उड़ान प्रशिक्षण दूर

जायजा. डीसी ने आला अधिकारियों संग किया एयरपोर्ट का निरीक्षण छह से आठ फ्लाइट शुरू करने की है योजना दुमका : उपराजधानी दुमका से हवाई सेवा का सपना जल्द ही पूरा होता दिख रहा है. लोगों को भी महसूस होने लगा है कि चंद महीनों में ही दुमका से छोटे विमानों से उड़ान संभव हो […]

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जायजा. डीसी ने आला अधिकारियों संग किया एयरपोर्ट का निरीक्षण

छह से आठ फ्लाइट शुरू करने की है योजना
दुमका : उपराजधानी दुमका से हवाई सेवा का सपना जल्द ही पूरा होता दिख रहा है. लोगों को भी महसूस होने लगा है कि चंद महीनों में ही दुमका से छोटे विमानों से उड़ान संभव हो पायेगा. मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास के दिन केंद्रीय नागरिक उड‍्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा द्वारा की गयी घोषणा का असर जल्द होने वाला है. हाल में भी उन्होंने दुमका एयरपोर्ट पर छह से आठ फ्लाइट शुरू करने की बात कही थी. इधर उपायुक्त मुकेश कुमार ने जिला के आला अधिकारियों के साथ दुमका एयरपोर्ट पहुंच कर निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान हवाई पट्टी पर छोटे विमानों की आवाजाही हो सकती है.
पायलट ट्रेनिंग सेंटर के भवन से यात्रियों को बोर्डिग के पास, सुरक्षा जांच और आगमन प्रस्थान कराया जा सकता है. उपायुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट के क्षेत्र विस्तार के लिए आवश्यक अधियाचना प्राप्त होते ही समयबद्ध एवं त्वरित कार्रवाई की जायेगी. उपायुक्त के साथ अपर समाहर्ता इंदु गुप्ता, अनुमंडल पदाधिकारी जय प्रकाश झा, उप निदेशक जनसंपर्क अजय नाथ झा, कार्यपालक अभियंता रामेश्वर दास, कनीय अभियंता बुलेट महतो आदि उपस्थित थे.
4000 फीट का है रनवे, 9500 फीट बढ़ सकती है लंबाई!
दुमका एयरपोर्ट का रनवे लगभग 4000 फीट लंबा है. चार्टड और छोटे विमान तो इतने लंबे रनवे में उतर जाते हैं. लेकिन यात्री विमानों के लिए रनवे की लंबाई इससे कहीं अधिक होनी चाहिए. कुछ साल पहले तक इस रनवे को 2000 फीट और लंबा करने की योजना बन रही थी. यह भी संभावना तलाशी जा रही थी कि इसके रनवे को आबादी वाले क्षेत्र को प्रभावित किये बिना अधिकतम कितना लंबा किया जा सकता है. भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता रामेश्वर दास ने बताया कि इस रनवे को और 9500 फीट लंबा किया जा सकता है. इसे लेकर एक सर्वेक्षण किया गया था.
नौ वर्ष गुजरे हैंगर बनने में, पायलट ट्रेनिंग बना सपना
संतालपरगना के गरीब, आदिवासी व पहाड़िया बच्चों को उंची उड़ान भरने व पायलट बनने का सपना नौ साल बीतने तथा कई सरकारों के बदलने के बाद भी अब तक अधूरा ही है. 2008 में उड़ान अकादमी शुरू करने की पहल हुई थी, तब शिबू सोरेन मुख्यमंत्री थे. लेकिन वह पहल तब केवल दिखावा ही तब साबित हुआ था. तंबू में कुछ दिन तक विमान रहे, फिर उसे रांची वापस मंगवा लिया गया. 2017 का आधा साल गुजरने को है. अब तक इस उड़ान अकादमी के लिए हैंगर व पायलट ट्रेनिंग सेंटर का भवन मात्र बन पाया है.
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