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Happy Holi 2021 : मारवाड़ी समुदाय की महिलाएं होलिका दहन को रखती हैं उपवास, निकालती है बाना

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
हाेलिक दहन के लिए मारवाड़ी समुदाय की महिलाएं छोटे उपले का बनाती है माला.
हाेलिक दहन के लिए मारवाड़ी समुदाय की महिलाएं छोटे उपले का बनाती है माला.
प्रभात खबर.

Happy Holi 2021, Jharkhand News (धनबाद) : मारवाड़ी समुदाय में होलिका दहन से ही होली की शुरुआत हो जाती है. फाल्गुन एकदशी के दिन घर की महिलाएं गाय के गोबर से बड़कुल्ला (छोटा उपला) चांद सितारा, छाल बनाकर उसे सुखाती है. होलिका दहन के दिन मुहूर्त के हिसाब से बड़कुल्ला, चांद सितारा, ढाल आदि सभी को नारियल की रस्सी में पिरोती हैं. फिर इसके 5 या 7 माला बनाये जाते हैं. रसोई में पूड़ी दाल की सिरा (हलवा) केरसांगरी की सब्जी, पूरी कांजी बड़ा बनाया जाता है.

सभी महिलाएं सारी सामग्री के साथ झंगरी (चना के पौधे ), गेंहू की बाली लेकर होलिका दहनवाले स्थान में जाती है. वहां जलती होलिका में सारी सामग्री डालकर पूजा करती हैं. फेरे लेती हैं. होलिका की अग्नि में पापड़ एवं झंगरी सेके जाते हैं. होलिका की अग्नि मिट्टी के पात्र में घर लाया जाता है.

इसके पीछे मान्यता है इस अग्नि में घर में लगी बुरी नजर जल जाती है. झंगरी (होला) पापड़ घर के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. बाना निकालकर उपवास तोड़ती हैं. हलवा और रुपये से बाना निकाला जाता है. महिलाएं अपनी सास को बाना देती है. होली के दिन विध्नहर्ता गणेश महाराज एवं लड्डू गोपाल को रंग चढ़ाकर फाग खेलते की शुरुआत की जाती है. होली के लिए पारंपरिक व्यंजन के साथ ठंढई एवं पकौड़ी जरूर बनाये जाते हैं.

क्या कहती हैं मारवाड़ी समुदाय की महिलाएं

धनबाद की साधना देवरालिया कहती हैं कि मारवाड़ियों में होली को लेकर खास तैयारी की जाती है. एकादश के दिन बड़कुल्ला ढाल तैयार किये जाते हैं. होलिका के दिन उपवास रखा जाता है.

चंद्रविहार कॉलोनी की सुनीता पसारी कहती हैं कि होलिका के दिन हम महिलाएं उपवास रखकर घर की सुख- समृद्धि के लिए पूजा करते हैं. घर में बने विशेष पकवान के साथ होलिका दहन स्थल पर जाकर फेरे लेते हैं.

धैया की गीता खेतान कहती हैं कि होलिका दहन के साथ हमारी होली शुरू होती है. उपवास रखकर सिरा, पूरी, केरसांगरी की सब्जी बनायी जाती है. होलिका दहन की अग्नि में पापड़ सेक कर पूरे परिवार को खिलाती हूं.

ग्रेवाल कॉलोनी की रितु खेमका कहती हैं कि गणपति देवा व लड्डू गोपाल को रंग चढ़ाने के बाद होली की शुरुआत होती है. होलिका दहन के दिन हम सभी महिलाएं उपवास रखते हैं. पूजा- अर्चना के बाद होलिका दहन वाले स्थल पर जाकर परिक्रमा करते हैं.

Posted By : Samir Ranjan.

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