धनबाद : कोयला की कमी और दबंगई के कारण हार्ड कोक उद्योग बदहाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Oct 2019 8:54 AM
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इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसो. 86वीं आमसभा में अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा धनबाद : इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स की 86 वीं आम सभा सोमवार को जोड़ाफाटक रोड स्थित एसोसिएशन भवन में हुई. हार्डकोक इंडस्ट्रीज की दशा व दिशा पर मंथन किया गया. हार्डकोक इंडस्ट्रीज की दयनीय हालत के लिए बीसीसीएल की कोयला वितरण नीति और कोयला […]
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इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसो. 86वीं आमसभा में अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा
धनबाद : इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स की 86 वीं आम सभा सोमवार को जोड़ाफाटक रोड स्थित एसोसिएशन भवन में हुई. हार्डकोक इंडस्ट्रीज की दशा व दिशा पर मंथन किया गया. हार्डकोक इंडस्ट्रीज की दयनीय हालत के लिए बीसीसीएल की कोयला वितरण नीति और कोयला उठाव में रंगदारी टैक्स को प्रमुख कारण बताया गया.
एसोसिएशन अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि पिछले एक साल से हम कोयला क्षेत्र एक से पांच तक में कोयला नहीं उठा पा रहे हैं. एक व्यक्ति की दंबगई के कारण कोयला उठाव ठप है. यही हाल एरिया छह धनसार कोलियरी का है.
यहां दिसंबर 2017 से कोयला उठाव ठप है. न तो राज्य सरकार कुछ कर रही है और न कोयला कंपनी. लिहाजा हार्डकोक इंडस्ट्रीज धीरे-धीरे बंद हो रही है. केंद्र व राज्य में एक ही पार्टी की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार है. बावजूद औद्योगिक क्षेत्र में तो बहुत लाभ नहीं दिखा और इन साढ़े चार वर्षों में उद्योग बढ़ने की बजाय घटा है. धनबाद की बिजली पर्याप्त नहीं मिलती है और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति कमजोर है. उद्योगपति पलायन कर रहे हैं. ऐसी स्थिति बरकरार रही तो उद्योग बंद हो जायेंगे.
उपाध्यक्ष रतन लाल अग्रवाल ने स्वागत भाषण व वरीय उपाध्यक्ष एसके सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. मंच का संचालन आइआइटी आइएसएम के प्रो प्रमोद पाठक ने किया. आम सभा में राम कुमार अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल, शंभु नाथ अग्रवाल, अमितेश सहाय, योगेंद्र तुलस्यान, शिव कुमार कनोड़िया, सुनील गोयल, अनिल सावंरिया, रामेश्वर दयाल अग्रवाल, शिव शंभु अग्रवाल सहित काफी संख्या में उद्योगपति उपस्थित थे.
रंगदारों के एरिया में 95 फीसदी कोयला की नीलामी
एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि देश की कोयला राजधानी में स्थित कोयला आधारित उद्योग कोयले की कमी से दम तोड़ रहा है.
हार्डकोक उद्योग को करीब साढ़े तीन लाख मैट्रिक टन कोकिंक कोल की आवश्यकता प्रति माह होती है. किंतु दस लाख टन ही कोल इंडिया द्वारा नीलामी के लिए छोड़ा जाता है, उसमें से भी कोई 95 फीसदी कोयले के स्रोत ऐसे हैं जो हार्डकोक उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है. इतना ही नहीं वहांं से कोयला दिया जाता है, जहांं से हम रंगदारों के प्रकोप के चलते कोयला नहीं उठा पाते.
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