मंडरा रहा महामारी का खतरा

धनबाद: बारिश-धूप में खदबदाता कचरा, उससे निकलती बदबू और बेखबर नगर निगम के अधिकारी. ऐसे में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है. हाल के दिनों में शहर में सफाई पूरी तरह ठप है. कोई चौक-चौराहा या गली-मुहल्ला ऐसा नहीं जहां कचरे का अंबार लगा ना हो. कहने को तो निगम के पास 123 […]
धनबाद: बारिश-धूप में खदबदाता कचरा, उससे निकलती बदबू और बेखबर नगर निगम के अधिकारी. ऐसे में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है. हाल के दिनों में शहर में सफाई पूरी तरह ठप है. कोई चौक-चौराहा या गली-मुहल्ला ऐसा नहीं जहां कचरे का अंबार लगा ना हो. कहने को तो निगम के पास 123 सफाई मजदूर हैं, लेकिन इसमें लगभग 20 मजदूर साहब व जनप्रतिनिधियों के सेवा में लगे रहते हैं. मात्र सौ मजदूर है. इसमें कुछ अनुपस्थित रहते हैं. ऐसे में शहर की सफाई कैसी होगी. इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
मेयर, डिप्टी मेयर व साहबों के क्षेत्र में ही सफाई : मेयर, डिप्टी मेयर व साहब जहां रहते हैं, वहां तो सफाई है. बाकी मुहल्लों का राम मालिक. कई-कई दिन सफाई वाले नहीं आते. बारिश में कचरा घुल कर सड़कों में बहने लगता है. पहले कभी भी ऐसी स्थिति नहीं हुई थी.
1.56 करोड़ रुपये मानदेय ले चुके जनप्रतिनिधि : जनता ने जिस आशा के साथ चुन कर मेयर, डिप्टी मेयर व पार्षद को नगर निगम भेजा, वे भी सूरत नहीं बदल पा रहे हैं. बयानबाजी के अलावा वे कुछ नहीं कर पाते. जबकि इन चार सालों में पार्षदों ने निगम से एक करोड़ 48 लाख रुपया मानदेय के रूप में लिया है. दूसरी ओर मेयर चार लाख 80 हजार व डिप्टी मेयर तीन लाख 64 हजार मानदेय के रूप में ले चुके हैं. पार्षदों का मासिक मानदेय सात हजार है. जबकि मेयर का दस हजार व डिप्टी मेयर का नौ हजार.
न ब्लीचिंग पाउडर है और ना डीडीटी : बरसात का मौसम शुरू हो गया. निगम के पास न तो ब्लीचिंग पाउडर है और न ही डीडीटी. झाड़, टोकरी व बेलचा का टेंडर हुआ लेकिन पीसी के कारण अब तक कार्य आवंटन नहीं हुआ. निगम की कु-व्यवस्था के कारण शहर नारकीय बन गया है. बरसात के पूर्व 28 बड़े नाला की सफाई करनी थी लेकिन वह भी काम पूरा नहीं हुआ.
अब तक नहीं हुआ दैनिक मजदूरों का टेंडर : दैनिक मजदूरों का टेंडर भी नहीं हुआ है. तीन बार टेंडर की तिथि निर्धारित की गयी. लेकिन स्थगित करना पड़ा. 22 जून को तकनीकी बीट खुला. तीन एनजीओ का प्रजेंटेशन देखा गया. 27 को फाइनेंशियल बीट खुलेगा. इसके बाद तय होगा कि किस एनजीओ को टेंडर मिलेगा. हालांकि इस प्रोसेस में भी दस से पंद्रह दिन निकल जायेगा.
सफाई फंड में पड़ा है 52 लाख : नगर निगम के पास सफाई मद में 52 लाख रुपया पड़ा हुआ है. निगम चाहता तो तीन माह पहले ही दैनिक मजदूर रख सकता था. लेकिन को-ऑपरेटिव के माध्यम से सफाई कराने के निर्णय में तीन माह बीत गये. पिछली बोर्ड में निर्णय भी हो चुका है. लेकिन अब तक टेंडर नहीं हुआ.
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